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स्टेट जीएसटी की मनमर्जी:1500 रु. की रिकवरी के लिए व्यापारियाें के खाते सीज किए बजरी माफिया से जीएसटी की 22.40 लाख की वसूली छाेड़ी

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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  • बजरी खनन पर 5% जीएसटी लेकिन आज दिन तक न किसी को नोटिस दिए न कार्रवाई की

बजरी माफिया को सरकारी सिस्टम ही शह दे रहा है। इसका ताजा उदाहरण स्टेट जीएसटी विभाग से जुड़ा है। दरअसल, बजरी पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगती है, लेकिन आज दिन तक स्टेट जीएसटी विभाग की ओर से कभी बजरी के वाहनों को पकड़कर जीएसटी नहीं वसूली गई। दूसरी ओर, इसी विभाग के अधिकारी कोरोना काल में व्यापारियों से 1500 रुपए वसूली के लिए उनके बैंक खाता सीज करने के नोटिस जारी कर रहा है। यहां तक कि व्यापारियाें की 10-10 हजार रुपए की बैंक गारंटी भी जब्त कर ली।

स्टेट जीएसटी विभाग के आला अधिकारियाें की सुस्ती इतनी अधिक है कि जिन वाहनों को खनिज विभाग और पुलिस थानों ने पकड़ा उनसे जाकर भी जीएसटी वसूलने की काेशिश नहीं की।स्टेट जीएसटी विभाग के अधिकारियाें की लापरवाही के कारण भीलवाड़ा से 22.40 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान राज्य सरकार काे उठाना पड़ा है। स्टेट जीएसटी विभाग पहले से ही राजस्व में पिछड़ा हुआ है।

उनका टारगेट 50% भी मुश्किल से पूरा हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि विभागीय अधिकारियाें की सुस्ती के कारण बजरी माफिया पर कार्रवाई नहीं की गई है। भास्कर पड़ताल में सामने अाया कि खनिज विभाग जुर्माना वसूलने के बाद इसकी सूचना स्टेट जीएसटी सहित संबंधित सभी विभागों को भेजता है। इसके आधार जिस भी विभाग का बकाया या अन्य कोई कार्रवाई करनी होती है तो वह कर सकता है।

अफसराें का तर्क: 5% कम, वसूली से क्या मिलेगा फाइल संभालना मुश्किल
बजरी माफियाअाें से जीएसटी नहीं वसूलने के पीछे विभागीय अधिकारियाें का अजीब तर्क है। उनका कहना है कि 5 प्रतिशत जीएसटी की राशि बहुत कम होती है। इसके लिए फाइल मेंटेन करना मुश्किल काम है। इसी कारण से न तो अवैध बजरी खनन व परिवहन वालाें काे नोटिस दिया गया अाैर कभी जब्ती की कार्रवाई की गई। खनिज विभाग या पुलिस थानों में जब्त किए गए वाहनों से जुर्माना वसूला जा सकता था लेकिन वह भी नहीं किया गया। यह राजस्व बढ़ते बढ़ते 22.40 लाख रुपए तक पहुंच गया। हर महीने यह राजस्व बढ़ता जाएगा।

लापरवाही: खनन व परिवहन करने वालों को नोटिस नहीं दिया और जुर्माना भी छोड़ा
बजरी पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगती है। इसके लिए जो बजरी परिवहन कर रहा है वह जीएसटी जमा करा रहा है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग करना स्टेट जीएसटी विभाग का काम है। अवैध खनन या परिवहन पकड़े जाने पर स्टेट जीएसटी विभाग को भी जुर्माना वसूलना चाहिए था लेकिन अधिकारियाें ने ऐसा नहीं किया। किसी को भी नोटिस देकर जुर्माना वसूलने की कोशिश नहीं की गई। इसके चलते लाखों रुपए का राजस्व

नियम: खान विभाग और पुलिस ने 4.48 कराेड़ जुर्माना लिया, इस पर जीएसटी लेनी थी
अप्रैल से लेकर सितंबर तक के छह महीने में खनिज विभाग की ओर से 455 वाहन पकड़े। इनसे 4.48 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला। इस जुर्माने का 5 प्रतिशत जीएसटी भी स्टेट जीएसटी विभाग वसूलता तो सरकार काे 22.40 लाख रुपए का राजस्व मिलता। इन बजरी माफिया पर कार्रवाई स्टेट विभाग की ओर से की जाती तो राजस्व और अधिक एकत्रित हो सकता था जबकि इन छह महीनों में विभाग की राजस्व प्राप्ति 50 प्रतिशत से कम रही है।नुकसान राज्य सरकार को झेलना पड़ा है।

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