डॉक्टर्स डे / उपचार करते संक्रमित हुए भर्ती रहकर मरीज भी देखे

डाॅ. सुशीलराज भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पदस्थ्य है। डाॅ. सुशीलराज भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पदस्थ्य है।
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डाॅ. सुशीलराज भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पदस्थ्य है।डाॅ. सुशीलराज भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पदस्थ्य है।

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:55 AM IST

भीलवाड़ा. काेराेनावायरस काे काबू में रखने के उपायाें से भीलवाड़ा दुनिया में माॅडल बना। यह संभव हुआ है एमजी अस्पताल के डाॅक्टर्स के कारण। इन्हीं डाॅक्टर्स के समर्पण का एक उदाहरण हैं सुशीलराज राजाैरिया। आइसाेलेशन वार्ड में लगातार ड्यूटी दी। खुद संक्रमित हाे गए ताे यहीं भर्ती हुए।

भर्ती रहते हुए चिकित्सकीय पेशे का धर्म नहीं भूले। वार्ड में उसी तरह अन्य काेराेना राेगियाें का उपचार करते रहे जैसे बीमार हाेने से पूर्व करते रहे। वे स्वस्थ हुए साथ ही सैकड़ाें मरीजाें के लिए नया जीवन जीने का हाैसला बने। आज डाॅक्टर्स डे पर इन्हीं सुशीलराज की कहानी।

बुखार आया था। 18 जून काे सैंपल दिया। इसकी रिपाेर्ट 19 जून काे आई जाे पाॅजिटिव थी। उसी दिन शाम काे उन्हें वार्ड में भर्ती कर लिया गया। वार्ड में भर्ती हाेने पर कुछ समय ताे मन नहीं लगा। साेचा कि साेते रहने से ताे अच्छा है राेगियाें की सेवा में लगें। तब वार्ड में भर्ती राेगियाें का उपचार करने लगे। इसके बारे में पीएमओ डाॅ. अरुण गाैड़ से भी कहा ताे उन्हाेंने कहा कि आप की मन हाे अाप वार्ड में ड्यूटी दाे। इसके बाद से ही वार्ड में ड्यूटी देने लगा।

आम दिनाें की तरह ही वे मरीजाें से मिलते। पीपीई किट पहने, दूरी बनाए रखते हुए सेवा करता। वार्ड में रहने का एक फायदा यह रहा कि 24 घंटे मरीजाें के लिए उपलब्ध था। उनकी पारिवारिक परेशानियाें के बारे में भी बात हाेती। वार्ड में रेागी काेराेना से डरे रहते हैं। मैं कहता हूं कि डरने की जरूरत नहीं है। मैं ताे डाॅक्टर हूं तब भी काेराेना पाॅजिटिव आ गया हूं। आपके साथ हूं। वैसा ही उपचार ले रहा हूं। मैं स्वस्थ हाे जाऊंगा, आप भी हाेंगे।

मेरा भर्ती रहना काेराेना पीड़ित लाेगाें के मन से डर निकलने में सहायक बना। वार्ड में भर्ती हाेने के बाद पहली ही रिपाेर्ट निगेटिव आ गई ताे दूसरे राेगियाें का भी हाैंसला बंधा। आठ दिन उपचार के बाद मैं 27 जून काे डिस्चार्ज हाे गया। आरसी व्यास काॅलाेनी में रहने वाले पड़ाेसी, दाेस्त, शुभचिंतक फाेन करते। इससे संबल मिलता।

सुबह-शाम किया याेग

मैं सुबह-शाम याेग करता। साथी मरीजाें काे भी याेग करने के लिए जागरुकता करता था। भजन सुनता जिससे मन काे शांति मिलती थी। काेराेना काे लेकर नाॅलेज बढ़ाने के लिए नेट पर स्टडी करता। नई दवा, शाेध के बारे में पढ़ता रहता।

पिता ने संभाला परिवार काे

माता-पति, पत्नी व बच्चे जयपुर रहते हैं। पाॅजिटिव आने पर परिवार सहम गया। पिता मेडिकल से रिटायर हैं। उन्हाेंने सभी काे संभाला और कहा कि ये नार्मल बीमारी है कुछ दिन में ठीक हाे जाएगा। हुआ भी ऐसा ही। अभी सब 14 दिन हाेम क्वारैंटाइन हैं।

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