भीलवाड़ा में ऑक्सीजन की ऑडिट:स्टाफ-मरीज को ऑक्सीजन उपयोग के लिए किया जागरूक- लो प्रेशर वाले को हाई प्रेशर ऑक्सीजन नहीं

भीलवाड़ा6 महीने पहले
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  • इस पहल से बचने लगे 80 सिलेंडर, प्रदेश में पहला प्रयोग

ऑक्सीजन की बढ़ती कालाबाजारी और दुरुपयोग के चलते भीलवाड़ा में जिला कलेक्टर ने ऑक्सीजन की ऑडिट शुरू कराई है। संभवतया भीलवाड़ा प्रदेश का पहला जिला है जहां ऑडिट की प्रथम रिपोर्ट में ही करीब 80 से 100 सिलेंडर की बचत सामने अटाई है। उखड़ती सांसों को रोकने के लिए प्रशासन ने यह नवाचार किया है।

हालांकि दिल्ली व उत्तरप्रदेश में ऑक्सीजन की कमी पर इस तरह की ऑडिट के बाद सेामवार काने प्रदेश के भी मुख्य सचिव ने भी वीसी में यह निर्देश दिए हैं। ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था और ऑक्सीजन के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशासन ने एक टीम भी बनाई गई है।

यह टीम अन्य जिलों से सिलेंडर की व्यवस्था करने के साथ ही अस्पतालों में जाकर मरीजों को ऑक्सीजन के प्रभावी उपयोग के लिए सुझाव दे रही है। इसका नतीजा यह हुआ है कि रोजाना 80 से 100 सिलेंडर जितनी ऑक्सीजन की बचत होने लगी है।

इस बारे में कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते का कहना है कि मैंने और एडीएम ने जब निरीक्षण किया तो पता चला कि ऑक्सीजन फिजूल खर्च हो रही थी। ऐसे में ऑक्सीजन के प्रभावी इस्तेमाल के लिए नई पहल की गई है जिसमें स्टाफ और मरीज दोनों को जागरूक किया जा रहा है। हमने इसकी ऑडिट कराई इसके बाद करीब सागै सिलेंडर की बचत हुई है।

कमेटी का सुझाव -मरीज की स्थिति गंभीर हो तो ही ऑक्सीजन लगाई जाए, लो प्रेशर में नहीं दें

भीलवाड़ा में हुई ऑडिट की रिपोर्ट के बाद कमेटी ने सुझाव दिया है कि अस्पतालों में बिना वजह खराब की जा रही ऑक्सीजन को लेकर अंकुश जरूरी है। इसके लिए स्टाफ को पाबंद किया है। जहां जरूरत हो तो वहीं ऑक्सीजन लगाएं। जिन्हें लो प्रेशर की जरूरत हो उन्हें हाई प्रेशर ऑक्सीजन न दें। मरीजों की ऑक्सीजन चैक करें जरूरत के अनुसार ही ऑक्सीजन लगाएं।

यहां तक कि मरीज को कहा है कि बातचीत कर रहे हैं या खाना खा रहे हैं या फिर इधर उधर हो तो ऑक्सीजन के प्रवाह को बंद रखें। स्टाफ के साथ ही मरीज की जिम्मेदारी है कि ऑक्सीजन का प्रभावी उपयोग करें क्योंकि इससे उनका तो फायदा है ही बल्कि अन्य भर्ती मरीजों के लिए भी अधिक ऑक्सीजन मिल सकेगी।

कलेक्टर, एडीएम ने मरीज के ऑक्सीमीटर लगाकर देखा तो पता चला फिजूल ऑक्सीजन दी जा रही, इसलिए अब बचत जरूरी... कुछ दिनों पहले कलेक्टर शिवप्रसाद एम नका ते और एडीएम राकेश कुमार ने अस्पतालों में निरीक्षण किया।

इस दौरान पता चला कि कई मरीज के बेड पर ऑक्सीजन फिजूल खराब हो रही है। जिनको जरूरत नहीं है उनके भी ऑक्सीजन लगाई जा रही है। कुछ मरीज बातों में मशगूल थे और ऑक्सीजन भी चल रही थी। कहीं मरीज वार्ड में इधर उधर घूम रहा तो भी ऑक्सीजन शुरू थी। इसके चलते ऑक्सीजन दुरुपयोग हो रहा था।

संक्रमितों के लिए एंबुलेंस और शव वाहन की दरें निर्धारित ज्यादा लेने पर कलेक्ट्रेट के कंट्रोल रूम में शिकायत करें

कोरोना काल में एंबुलेंस चालकों और शव वाहन की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए परिवहन विभाग ने कदम उठाया है। विभाग की ओर से सुलभ और सस्ती एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस/शव वाहन का किराया निर्धारित किया है। पहले 10 किलोमीटर के 500 रुपए तय किया है जिसमें आना जाना शामिल है। इसके बाद निम्न दर रहेगी।

10 किलोमीटर के बाद यह किराया

क्र. श्रेणी किराया सं. प्रति किमी 1 मारुति वैन, मार्शल, मैक्स आदि 12.50 2 टवेरा, इनोवा, बोलेरो, क्रूर्जर आदि 14.50 3 अन्य बड़ी एंबुलेंस/शव वाहन 17.50

एसी वाहन होने पर 1 रुपए प्रति किमी अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। कोविड संक्रमित का शव ले जाने के लिए चालक की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये पीपीई किट और सेनेटाइजेशन का खर्च 350 रुपए अतिरिक्त वसूल किया जाएगा। यह किराया दो तरफ का है क्योंकि ये वाहन वापसी यात्रा में उपयोग नहीं लिए जा सकते है।

जिला परिवहन अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि निर्धारित किराए से अधिक किराया लेने या सेवा देने से मना करने पर ऐसे वाहन संचालकों पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। इनकी शिकायत कलेक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम 01482-233032, 233035 में की जा सकती है। वाहन का पंजीयन एवं चालक का लाइसेंस दोनों निलंबन एवं निरस्त किया जा सकता है। कोरोना संक्रमितों के शव ले जाने के लिए नगर परिषद ने निशुल्क व्यवस्था भी कर रखी है।

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