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कोरोना काल में दोहरी मुसीबत:दस महीने से पढ़ाई बंद; सेमेस्टर ही पूरा नहीं हुआ फिर भी कॉलेज मांग है रहा पूरी फीस

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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एकता माहेश्वरी - Dainik Bhaskar
एकता माहेश्वरी
  • फीस जमा कराने के आदेश का विराेध, छात्र बोले- आर्थिक हालात ठीक नहीं

काेराेना संक्रमण के कारण 10 महीने से प्रदेश के स्कूल, काॅलेज बंद थे। इस अवधि की फीस जमा कराने काे लेकर अभिभाभवकाें और स्कूल संचालकाें के बीच विवाद सामने आए। कुछ ऐसा ही राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) भी कर रहा है। आरटीयू से संबद्ध टेक्निकल कॉलेज बंद रहने के बावजूद छात्रों ने फीस पूरी जमा कराई थी।

इन छात्राें की अब तक कोई भी परीक्षा नहीं हाे पाई और सेमेस्टर की पढ़ाई भी अधूरी है। इसके बाद भी आरटीयू पूरी फीस मांग रहा है। इससे छात्रों में नाराजगी है। शहर के माणिक्यलाल वर्मा टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग काॅलेज की ओर से 13 जनवरी काे नाेटिफिकेशन जारी कर बीटेक की सभी ब्रांच, एमटेक और पीएचडी की टैक्सटाइल ब्रांचाें के स्टूडेंट्स काे एकेडमिक सेशन 2020-21 की सेमेस्टर फीस 31 जनवरी 2021 तक ऑनलाइन जमा कराने काे कहा है।

काॅलेज की ओर से जारी पत्र के अनुसार काॅलेज फीस के साथ जाे छात्र इस सेशन में हाॅस्टल सुविधा जारी रखना चाहते हैं। वे हाॅस्टल फीस भी जमा करवाएं। इधर, इस आदेश का काॅलेज में पढ़ने वाले छात्राें ने विराेध शुरू कर दिया है।

यूजीसी का आदेश है- यूनिवर्सिटी, काॅलेज दें रियायत
छात्राें का कहना है कि जनवरी से जून-2020 और जुलाई से दिसंबर-2020 तक के सेमेस्टर की फीस उन्हाेंने जमा करवाई थी, जबकि मार्च में काॅलेज बंद हाे गए थे, जाे 17 जनवरी तक बंद रहे। अब तक किसी संकाय की परीक्षा नहीं हुई है। नया सेमेस्टर आधा-अधूरा चलने की संभावना है।

इसके बावजूद 31 जनवरी तक फीस जमा कराने काे कहा जा रहा है। 27 मई 2020 काे यूजीसी सचिव ने यूनिवर्सिटी और काॅलेजाें काे जारी पत्र में कहा कि कई अभिभावकाें ने लाॅकडाउन में आर्थिक परिस्थितियां कमजाेर हाेने के कारण वार्षिक और सेमेस्टर फीस, ट्यूशन फीस, परीक्षा फीस आदि जमा करवाने में असमर्थता जताई है।

ऐसे में आग्रह है कि काेराेना की विकट परिस्थितियाें के मद्देनजर यूनिवर्सिटी और काॅलेज अभिभावकाें काे फीस जमा करवाने में रियायत देने का प्रयास करें। दूसरी ओर, छात्राें का भी कहना है कि लाॅकडाउन के कारण उनके परिवाराें की आर्थिक स्थिति भी बहुत खराब हाे गई है।

केस 1 : किसान क्रेडिट कार्ड से लाेन लेकर भरी बेटे की फीस
एक छात्र के पिता सिलाई का काम करते हैं। लाॅकडाउन के दाैरान दुकान बंद रही। जुलाई 2020 की फीस के लिए रुपए का जुगाड़ मुश्किल हाे गया। इस पर दादाजी के नाम की कृषि भूमि पर किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लिया। अब पहले वाली किस्त चुकाने के बाद ही फिर लिमिट बनेगी। इसके बाद ही जनवरी 2021 की फीस जमा होने की संभावना है।
केस 2 :निर्माण कार्यों में मजदूरी नहीं मिली, बचत से दी फीस
पिताजी मंदिर निर्माण में कारीगरी का काम करते हैं। लॉकडाउन में काम बिल्कुल बंद हाे गया। ऐसे में पुरानी बचत से रुपए निकालकर फीस भरनी पड़ी। अब आगामी सेमेस्टर की फीस की चिंता सता रही है।
केस 3 : पिता की बीमारी के उपचार में खर्च हो गया पैसा
पिताजी मजदूरी करते थे। लॉकडाउन में काम धंधा ताे गया ही, वे बीमार भी हो गए। इलाज में हजाराें रुपए खर्च हुए ताे जुलाई में भी फीस नहीं जमा करा पाया। अब जनवरी 2021 की फीस कैसे जमा होगी, इसका अभी कोई पता नहीं है। लाॅकडाउन में काॅलेज बंद रहे ताे छात्र ने खुद ही घर चलाने के लिए जॉब शुरू कर दी।

कामयाबी : पहले ऑनलाइन कैंपस प्लेसमेंट में 3 का चयन

कोरोना काल के बाद इंडस्ट्रीज की दशा सुधरने के साथ ही कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट होने लगे हैं। एमएलवी टेक्सटाइल एंड इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट को कोरोना काल में अधिकतम पैकेज 10 लाख रुपए वार्षिक का मिल चुका है। यह पैकेज आईटी स्टूडेंट को मिला है।

पहली बार ऑनलाइन कैंपस प्लेसमेंट कराने पर टेक्सटाइल कॉलेज के तीन स्टूडेंट्स का बहुराष्ट्रीय कंपनी में चयन हुआ है। सहायक आचार्य अनुराग जागेटिया ने बताया कि आईटी ब्रांच के अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स अनुज माहेश्वरी, एकता कोठारी और सिमरन पाठक का वी2 फोर्स कंपनी में चयन हुआ है। विभागाध्यक्ष नीतेश चौहान ने बताया कि इन स्टूडेंट्स को 3.16 लाख रुपए का पैकेज मिला है।

पहली बार ऑनलाइन प्लेसमेंट में 5 कॉलेज के 150 स्टूडेंट्स शामिल
ऑनलाइन प्लेसमेंट की शुरुआत से भीलवाड़ा के कॉलेजों के साथ ही राजधानी के दूर के कॉलेजों को फायदा मिल रहा है। पहली बार प्लेसमेंट के लिए एक कंपनी की ओर से ऑनलाइन व्यवस्था कराई गई। ताकि स्टूडेंट्स को इधर से उधर नहीं जाना पड़े। अपने घर पर ही बैठकर इस प्लेसमेंट में शामिल हो सकते थे। इस प्लेसमेंट में अजमेर का महिला इंजीनियरिंग कॉलेज, कोटा का आरटीयू, भरतपुर का इंजीनियरिंग कॉलेज और भीलवाड़ा का टेक्सटाइल कॉलेज और निजी कॉलेज शामिल हुआ है।
22 स्टूडेंट्स काे प्लेसमेंट, सबसे ज्यादा 9 टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी ब्रांच से
आईटी, टेक्सटाइल की ब्रांच में प्लेसमेंट की दर अच्छी रही है। लेकिन अन्य ब्रांचों में प्लेसमेंट के लिए जूझना पड़ा है। डॉ. अरविंद वशिष्ठ ने बताया कि कोरोना के असर कम होने के बाद 22 प्लेसमेंट हो चुके हैं। वेल्सपन इंडिया लिमिटेड में 9 टेक्सटाइल टेक्नॉलोजी, 2 टेक्सटाइल केमेस्ट्री और 2 इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन के स्टूडेंट्स का हुआ है। वर्धमान टेक्सटाइल्स में टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी के 3, टीसीएस में आईटी ब्रांच के 6 स्टूडेंट्स का प्लेसमेंट हुआ है।

ऑनलाइन पढ़ाई कराई थी, सरकार के निर्देशाें की कर रहे पालना : प्राेक्टर
काॅलेज छात्राें से राज्य सरकार के निर्देशाें के अनुसार ही फीस ली जा रही है। पढ़ाई ऑनलाइन चली थी। परीक्षाएं इस महीने से शुरू हाेंगी। काॅलेज चलाने के लिए फीस जरुरी है। हम वैसे ही साल में दाे बार 50-50 प्रतिशत फीस लेते हैं। फीस में रियायत के लिए हमने राज्य सरकार काे पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा था, लेकिन वहां से भी निर्देश मिले कि फीस लेनी है। हालांकि लेट फीस नहीं ली जाए ताे हमने लेट फीस नहीं ली थी।
- डीएन व्यास, चीफ प्राेक्टर, एमएलवी टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग काॅलेज, भीलवाड़ा

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