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मेवाड़ चैंबर के सुझाव:नई टेक्सटाइल नीति के लिए वस्त्र मंत्रालय काे भेजे सुझाव, पावरलूमों के आधुनिकीकरण की जरूरत, सरप्लस जीएसटी रिफंड समय पर हो

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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  • नई टेक्सटाइल नीति के लिए वस्त्र मंत्रालय काे भेजे सुझाव: टफ स्कीम काे पांच साल बढ़ाने और बिजली सस्ती की जानी चाहिए

मेवाड़ चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री ने नई टेक्सटाइल नीति के लिए वस्त्र मंत्रालय को सुझाव भेजे हैं। इसमें बताया गया कि टफ योजना को मार्च 2022 के बाद 5 साल के लिए आगे बढ़ाना चाहिए। चैंबर महासचिव आरके जैन ने बताया कि अभी देश में करीब 35 लाख पावरलूम लगे हैं। इसमें से करीब 10 प्रतिशत का ही आधुनीकरण हुआ है। इसलिए पावरलूम उद्योग, प्रोसेंसिग एवं विशेष रूप से टेक्निकल टेक्सटाइल को प्रोत्साहन देने के लिए टफ योजना में विशेष प्रावधान कर इसे 5 साल के लिए बढ़ाना चाहिए।

बैंकों की ओर से लघु एवं मध्यम उद्याेगाें से 70 प्रतिशत तक कोलेटरल सिक्युरिटी मांगी जाती है लेकिन यह बहुत ज्यादा है। उद्योग 5-6 साल पुराने होने पर मशीनों की कीमत सिक्युरिटी में शामिल नहीं की जाती है। नई नीति में एमएसएमई उद्योगों के लिए बैंको के लाेन, कोलेटरल सिक्युरिटी एवं क्रेडिट रेटिंग के बारे में स्पष्ट निर्देश होने चाहिए। पिछले 2 साल में रिजर्व बैंक ने कई बार रेपो रेट कम की है लेकिन लघु एवं मध्यम उद्योगों को इसका फायदा नही मिलता है। नई नीति में इसके लिए भी प्रावधान करना चाहिए।

ड्यूटी ड्राॅ-बैक की दरें 3 से 5 प्रतिशत बढ़ाने, यार्न पर जीएसटी 5 प्रतिशत करने का भी सुझाव दिया

  • टेक्सटाइल एक्सपाेर्ट बढ़ाने के लिए ड्यूटी ड्रा बेक के प्रावधानों को ओर आगे बढ़ाना चाहिए। मेनमेड टेक्सटाइल के लिए ड्यूटी ड्रा बेक की दरें 3 से 5 प्रतिशत से बढ़ानी चाहिए। राजस्थान, पंजाब, हिमाचल आदि कई राज्य बंदरगाहों से काफी दूर हैं। ऐसे राज्यों में स्थित टेक्सटाइल इकाइयाें काे निर्यात पर भाड़ा अनुदान दिया जाना चाहिए।
  • टेक्सटाइल उद्योग में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के लिए अलग-अलग उपकरण जैसे आरओ, एमईई आदि के लगाने पर 50 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान दिया जाना चाहिए।
  • टेक्सटाइल उद्योग की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि यार्न पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत या कपड़े पर 5 प्रतिशत है। केंद्र सरकार सरप्लस जीएसटी को रिफंड भी कर रही है लेकिन उसमें काफी लंबा समय लगता है। इसलिए इस परेशानी काे दूर करने के लिए यार्न पर भी जीएसटी दर 5 प्रतिशत की जाना चाहिए।
  • राजस्थान में विद्युत दरें काफी ज्यादा है। पावरलूम उद्योग में राजस्थान देश में सबसे पिछड़ा हुआ है। देश में लगे 35 लाख लूमों में से केवल 25 हजार लूम ही राजस्थान में हैं। राजस्थान के टेक्सटाइल उद्योगों को विद्युत दरों में अनुदान के भी प्रावधान करने चाहिए।
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