VIDEO में देखें तेजा गायन की परंपरा:गाकर दिया जाता है बारिश का धन्यवाद, तेजाजी के भोपा ने पूरी कहानी नाटक के जरिए लोगों को बताई

भीलवाड़ाएक महीने पहले
नाट्य रूप में तेजा गायन करते भोपा।

राजस्थान के मारवाड़ इलाकों में तेजा गायन तो आपने बहुत बार सुना होगा। हाथों में छतरियां लेकर खुले आसमान और खेतों के बीच तेजा गायन गाकर मारवाड़ में अच्छी बारिश की कामना की जाती है। इसके साथ मेवाड़ में भी तेजाजी महाराज के भक्तों की भी कमी नहीं है। यहां भी उसी श्रद्धा के साथ तेजा गायन किया जाता है। अब मेवाड़ में गाए जाने वाले तेजा गायन में भी बदलाव नजर आ रहा है। यहां तेजा गायन बारिश के बाद धन्यवाद देने के लिए किया जाता है। दोनों जगह तेजा गायन में मूल अंतर यही है कि मारवाड़ में बारिश के लिए और मेवाड़ में बारिश के बाद धन्यवाद देने के लिए तेजा गायन किया जाता है। दैनिक भास्कर डिजिटल पर पहली बार देखिए मेवाड़ में किस तरह से तेजा गायन किया जाता है। दोनों ही जगह गाए जाने वाले तेजा गायन के शब्द वही हैं। भक्ति वही है।

भीलवाड़ा के ग्रामीण हिस्सों में अभी तेजा गायन की धूम मची हुई है। तेजाजी महाराज के आराधक अलग-अलग गांव में तेजा गायन का आयोजन कर रहे हैं। अलग-अलग समाज के लोग भी इसमें शामिल हो रहे हैं। मेवाड़ में भक्तों द्वारा तेजा गायन को नाट्य मंचन के साथ प्रदर्शित किया जाता है। तेजाजी महाराज के ससुराल जाने और गायों के लिए लड़ाई लड़ने और नाग देवता से वचन निभाने की पूरी कथा को यहां के भक्तगण नाट्य रूप में प्रदर्शित करते हैं। तेजाजी महाराज के भोपा (पुजारी) द्वारा इस पूरी कथा को शब्दों और नाट्य मंचन के द्वारा लोगों को बताई जाती है।

सभी की खुशहाली के लिए होती है प्रार्थना
मेवाड़ में तेजा गायन लोगों की खुशहाली के लिए किया जाता है। अच्छी बारिश का धन्यवाद और लोगों के जीवन में सुख समृद्धि रहे, इसी के लिए तेजाजी महाराज से प्रार्थना की जाती है। इस समय आने वाली तेजा दशमी के कार्यक्रम को भी साथ में जोड़ा जा रहा है।

एक यह भी कारण
बताया जा रहा है कि मारवाड़ में तेजा गायन बेहतरीन कलाकारों द्वारा किया जाता है। मेवाड़ क्षेत्र में यह तेजा गायन तेजाजी के भोपा द्वारा गाया जाता है। यह भी एक बड़ा कारण है कि मारवाड़ और मेवाड़ के तेजा गायन में इतना बड़ा अंतर आ जाता है। मेवाड़ में भोपा द्वारा पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नाट्य मंचन करते हुए तेजा गायन किया जाता है, जिसे गीत के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

मारवाड़ में इंद्र को खुश करने के लिए होता है तेजा गायन
मारवाड़ में मान्यता है कि तेजा गायन से इंद्र खुश होते हैं और बारिश हो जाती है। किसान अपने आराध्य तेजाजी को रिझाने के लिए तेजा गायन करते हैं। तेजा गायन बारिश व अच्छी फसल की कामना के लिए 10वीं शताब्दी से होता आ रहा है।

फोटो वीडियो क्रेडीट - रामप्रसाद आचार्य, कोटडी