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सियासत क्वारेंटाइन:पितलिया की निगरानी के लिए प्रशासन ने 3-3 घंटे की ड्यूटी पर पांच होम गार्ड लगाए; कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा है या सीट का?

भीलवाड़ा16 दिन पहले
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आखिर किसका डर? पितलिया ने नामांकन वापसी के दौरान सुरक्षा के लिए बेंगलुुरु से बुलाए थे विशेष बाउंसर - Dainik Bhaskar
आखिर किसका डर? पितलिया ने नामांकन वापसी के दौरान सुरक्षा के लिए बेंगलुुरु से बुलाए थे विशेष बाउंसर
  • द ग्रेट पाॅलिटिकल थिएटर - भीलवाड़ा, जयपुर व बैंगलुरु तक 5 दिन चले ड्रामे के बाद अब...

प्रदेश में उप चुनाव तीन विधानसभा सीटाें पर हाे रहे हैं लेकिन केंद्र में सहाड़ा का चुनाव ही है। चिकित्सा विभाग के नाेटिस के बाद नामांकन उठाने वाले भाजपा के बागी और उप चुनाव की सियासत का केंद्र बने लादूलाल पितलिया हाेम क्वारेंटाइन हाे गए हैं लेकिन वे बाहर नहीं निकल जाए इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने तीन-तीन घंटे की निगरानी के लिए पांच हाेम गार्ड लगा दिए हैं।

इधर, मंगलवार काे एक नया खुलासा हुआ है कि पितलिया काे नामांकन के दाैरान और नामांकन वापसी काे लेकर चल रहे कयासाें के कारणा सुरक्षा का डर था इसलिए उसने बैंगलुरु से विशेष बाउंसर बुलाए थे। हालांकि ये बाउंसर अब नही है लेकिन राजनीतिक गलियाराें में अब चर्चाएं शुरू हाे गई कि पितलिया काे किससे डर था। नामांकन वापस करने के बाद पितलिया ने मुख्यमंत्री से सुरक्षा दिलाने की भी गुहार लगाई थी।

क्वारेंटाइन मैसेज: पितलिया पहली मंजिल पर क्वारेंटाइन लेकिन समर्थकाें से बरामदे में मिल रहे हैं...लादूलाल पितलिया को उनके आवास में पहली मंजिल पर होम क्वारेंटाइन किया गया है। लेकिन उचित दूरी के साथ उनका समर्थकों से मिलना जारी है। पहली मंजिल पर बने कमरे में पितलिया बैठते हैं और बरामदे में इनके समर्थक बैठते हैं। दिनभर सियासी चर्चाएं चलती रहती हैं।

इनसाइड स्टोरी - पितलिया का फायदा दाेनों पार्टियां लेना चाहती हैं, भाजपा अपने प्लान में उलझी, सरकार में कांग्रेस तो मिला क्वारेंटाइन नोटिस
लादूलाल पितलिया को लेकर भाजपा अपने ही प्लान में उलझकर रह गई है। भाजपा नामांकन से पहले लादूलाल को बिठा नहीं सकी। इसके बाद भाजपा ने जैसे-तैसे उनसे नामांकन उठवाया तो वे दबाव का आरोप लगाकर गायब हो गए। कुछ दिनाें बाद भाजपा वापस उनकाे लेकर आई और प्रचारित किया कि पितलिया ने सहमति से नामांकन उठाया है और भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे।

इस बीच कांग्रेस की एंट्री हुई और पितलिया को प्रदेश से बाहर आने का तर्क देकर क्वारेंटाइन करवा दिया। अब क्वारेंटाइन में होते हुए भी लादूलाल का समर्थकों से मिलना जारी है। एक सप्ताह से चल रहे पाॅलिटिक ड्रामे के कारण नामांकन उठाने के बावजूद पितलिया कंफ्यूज है कि किसे समर्थन देना चाहिए और किसे नहीं।

कई ऑडियो वायरल हुए इसलिए अब माेबाइल से दूरी
पितलिया से जुड़े अब तक कई ऑडियो वायरल हाे चुके हैं इसलिए अब वे माेबाइल से दूरी बरतने लगे हैं। पितलिया से मिलने के लिए आने वाले उनके समर्थकाें से माेबाइल नीचे ही रखवाए जा रहे हैं। हालांकि उनसे मिलने के लिए उनके खास लाेगाें काे अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा पितलिया माेबाइल पर बात करने से भी बच रहे हैं।
पितलिया ने जयपुर में सैंपल दिया, रिपाेर्ट का इंतजार
पितलिया की ओर से जयपुर में काेराेना जांच के लिए सैंपल देने की बात सामने आई है। रायपुर बीसीएमओ ने कहा कि हमारे यहां पितलिया का किसी तरह का सैंपल नहीं लिया गया है। जयपुर में सैंपल देने की बात सामने आई है। वहां से जैसी रिपोर्ट आएगी वैसे ही कार्यवाही की जाएगी। इधर, कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि अगर पितलिया कोरोना रिपाेर्ट निगेटिव देकर प्रचार कर सकते हैं, किसने रोका है।

भास्कर रिकॉल - यह सीट बागियों से चर्चित... पांच चुनाव में पांच बागी लड़े
सहाड़ा विधानसभा सीट पर अक्सर बागी हाथ आजमाते रहे। कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही इससे पीड़ित रही है। कभी बागियों को मनाने में सफल रहे तो कभी चाहकर भी ऐसा नहीं कर सके। ऐसे में चुनाव लड़कर मुकाबले को रोचक बनाने के साथ ही पार्टी को नुकसान भी पहुंचा है। वर्ष 2018 के चुनाव, 2008, 1998, 1993, 1985 में बागी या निर्दलीय के चलते चुनाव में तीसरा एंगल हमेशा बना रहा। वहीं वर्ष 2013, 2003 के चुनाव ऐसी समस्या का सामना पार्टियों को नहीं करना पड़ा।

बद्रीलाल जाट का त्रिकोण अभी भी बाकी...इस बार उपचुनाव में लादूलाल पितलिया के हटने के बावजूद भी आरएलपी बद्रीलाल जाट चुनावी रेस में हैं। जाट बाहुल्य क्षेत्र होने और भाजपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रहे रुपलाल जाट के भाई होने से बद्रीलाल जाट त्रिकोणीय मुकाबले में अहम बने हुए है। इससे पहले विधानसभा 2018 में लादूलाल पितलिया को भाजपा से टिकट नहीं मिल पाने पर बागी होकर चुनाव लड़े और 30573 वोट हासिल किए।

वर्ष 2008 में कांग्रेस से बागी होकर नारायण उपाध्याय ने चुनाव लड़ा और 8299 वोट हासिल किए। इससे पहले वर्ष 1998 के चुनाव में कांग्रेस से बागी होकर चेतन डीडवानियां ने ताल ठोकी।

10807 वोट हासिल किए जो कि 13.2 वोट प्रतिशत रहा। वर्ष 1993 में दूरदर्शी पार्टी के रुपलाल जाट चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। वर्ष 1985 के चुनाव में निर्दलीय उतरे लादूलाल जाट दूसरे नंबर पर रहे। इन्होंने 28.8 प्रतिशत मत हासिल करके लोकदल के प्रत्याशी मिश्रीलाल मेहता को तीसरे स्थान पर धकेल दिया

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