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बेटे को गोद में मरता देखने वाली मां की पीड़ा:2 बेटियों की पहले ही हो चुकी मौत, आखिरी उम्मीद था बेटा, उसने रो-रोकर गोद में ही दम तोड़ दिया, इससे बड़ी सजा क्या होगी

भीलवाड़ाएक महीने पहलेलेखक: रावत प्रवीण सिंह
अपने बेटे के साथ आशादेवी रावत।

भीलवाड़ा के बदनौर कस्बे में सोमवार को एक 3 साल के बच्चे ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। गोलकी गांव में रहने वाली आशा देवी ठेकेदार से मजदूरी के पैसे लेने के लिए बैठी रही। बच्चे को 4 दिन से बुखार था। बुखार ठीक करने के लिए घरेलू नुस्खे किए, लेकिन बच्चे की तबीयत बिगड़ती गई। समय पर बच्चे को इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई।

आशा देवी ने भास्कर से बात करते हुए कहा कि भगवान किसी को गरीब नहीं बनाए। बनाए तो किसी की मेरे जैसी परीक्षा न ले। बेटा हमारी आखिरी उम्मीद था। उसे मैंने हाथों में तड़पकर मरता देख लिया। एक मां के लिए इससे बड़ी सजा क्या होगी।

एक मां के दर्द की कहानी उसी की जुबानी..
'मेरे बेटे की तबीयत खराब थी। मैं और पति गोप सिंह जामनगर (गुजरात) में ठेकेदार भंवर सिंह के लिए कुंआ खोदने का काम करते हैं। ठेकेदार भीलवाड़ा के मोगड़ा गांव का रहने वाला है। हमारी 6 हजार रुपए मजदूरी बाकी थी। घर पर पैसे खत्म हो चुके थे। गांव वालों की मदद से ही दो वक्त का खाना मिल जाता था। सुबह-शाम मजदूरी कर एक-एक दिन का गुजारा कर रहे थे। बेटा बीमार हुआ तो ठेकेदार ने पैसे लेने के लिए सोमवार को बदनोर बुलाया था। बदनोर पहुंचने पर ठेकेदार को फोन किया। उसने हमें रुकने के लिए कहा। 2 घंटे तक चौराहे पर उसका इंतजार करते रहे। आस लगाए खड़े थे कि पैसे मिलेंगे और बेटे का अस्पताल में इलाज हो जाएगा। जब बच्चा बार-बार रोने लगा तो लोगों की मदद से फिर फोन किया। तब ठेकेदार ने फोन स्विच ऑफ कर दिया। इस बीच बच्चे को उल्टी-दस्त हुए और उसका शरीर ठंडा पड़ गया। कुछ समझ नहीं आया। देखा तो बेटे की सांसें रुक गई थीं। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। दूसरे शहर में कुछ पता नहीं था। जेब में फूटी कौड़ी नहीं। मैं बेटे को छाती से चिपका कर बैठ गई। आखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। तभी वहां के लोगों ने मेरी मदद की। सभी ने पैसे इक्कठे किए, पुलिस साहब ने भी पैसे दिए। फिर वहां से लोगों ने मुझे गाड़ी करवाकर गांव छुड़वाया।'

आशा और पति गोप सिंह मजदूरी कर घर चलाते हैं।
आशा और पति गोप सिंह मजदूरी कर घर चलाते हैं।

आखिरी संतान भी चली गई
आशा ने बताया कि 3 साल का बेटा उनका सबसे बड़ा बेटा था। इसके बाद उनके दो बेटियां भी हुई थी। एक की जन्म के बाद ही मौत हो गई थी। वहीं, दूसरी बेटी 3 महीने बाद चल बसी थी। यह बेटा ही उनका आखिरी सहारा था, जो 4 दिन से बीमार था।

इस कच्चे घर में जीवन यापन कर रही है दंपती।
इस कच्चे घर में जीवन यापन कर रही है दंपती।

यह था मामला
गौरतलब है कि पाली जिले के जोजावर निवासी आशा पत्नी गोमसिंह रावत अपने तीन साल के बेटे को लेकर सोमवार को बदनोर आई थी। आशा का बेटा बीमार था। महिला ठेकेदार से मजदूरी के पैसे लेने आई थी। ठेकेदार ने उसे बदनोर रुकने को कहा था, लेकिन ठेकेदार ने अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया। महिला के बेटे की तबीयत बिगड़ने से उसकी वहीं मौत हो गई थी।

फोटो वीडियो क्रेडिट - डाउसिंह, जोजावर

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