कोरोना गाइडलाइन की उड़ाई धज्जियां, हजारों की भीड़ जुटी:भीलवाड़ा में बिना मास्क दड़ा खेलने पहुंचे लोग,आयोजकों पर 10 हजार का जुर्माना

भीलवाड़ा3 दिन पहले
कोरोना की पाबंदियों के बाद इतनी भीड़ थी कि पैर रखने की जगह नहीं बची।

भीलवाड़ा में मकर संक्रांति पर खेले गए दड़ा में कोरोना गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। हजारों लोगों की भीड़ जुटी। एक चौक में इतने लोग थे कि पैर रखने की जगह तक नहीं थी। लोग एक-दूसरे से सटकर चल रहे थे। भीड़ में किसी ने मास्क तक नहीं पहना था। यह सब हुआ फूलियाकलां के धनोप गांव में मकर संक्रांति पर।

दरअसल, रियासत काल से दड़ा महोत्सव आयोजन की परंपरा चली आ रही है। मकर संक्रांति को महोत्सव में करीब 14 किलो वजनी दड़ा (गेंद) को ग्रामीण रस्सी से बांधकर खींचते हैं। इस खेल से ग्रामीण पूरे वर्ष के मौसम का अनुमान लगाते हैं। शुक्रवार को इस खेल में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। ग्रामीणों द्वारा पटेलों की मौजूदगी में दड़ा को गढ़ से निकालकर चौक में लाया जाता गया। करीब दो घंटे तक लगातार लोग इस खेल का आनंद उठाते रहे। अंत में पटेलों ने इस साल अकाल पड़ने की बात कही।

भीड़ देख अधिकारी चौंक गए
हजारों की भीड़ के साथ हुए आयोजन की सूचना जब अधिकारियों को मिली तो गांव पहुंचे। पता चला इसके लिए परमिशन भी नहीं ले रखी थी। इतनी भीड़ देख खुद अधिकारी भी चौंक गए। आयोजकों पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। प्रदेश में थर्ड वेव की एंट्री के बाद सरकार ने सख्त पाबंदियां लागू कर दी है। आयोजन में लोगों की संख्या को सीमित किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को शामिल कर इसका आयोजन किया गया।

फूलियाकलां तहसील के धनोप गांव में मकर संक्रांति पर इस 14 किलो की गेंद के साथ दड़ा खेलते हैं ग्रामीण।
फूलियाकलां तहसील के धनोप गांव में मकर संक्रांति पर इस 14 किलो की गेंद के साथ दड़ा खेलते हैं ग्रामीण।

35 साल बाद दड़ा फकीर मोहल्ले में पहुंचा
इस खेल का शुभारंभ गांव ठाकुर सत्येंद्र सिंह ने की। दो टीमों ने इन दड़े को अपनी तरफ खींचने की कोशिश की। अंत में दड़ा समय पूरा होने पर फकीर मोहल्ले में गया। जहां पटेलों ने खेल समाप्ति की घोषणा की। दड़ा फकीर मोहल्ले की तरफ जाने से परिणाम अकाल का माना गया। ग्रामीणों ने बताया कि 35 वर्ष बाद दड़ा फकीर मोहल्ले में पहुंचा। गत वर्ष खेल में दड़ा हवाला की तरफ गया था। जिससे सुकाल के संकेत मिले।

क्रेडिट - कमलेश शर्मा, फूलियाकलां