प्रदेश में पटवारी नहीं, किसान भी कर सकेंगे गिरदावरी:नए पैटर्न पर सरकार ने किए प्रयास शुरू, 4 अफसराें की टीम माॅडल समझने गई महाराष्ट्र

भीलवाड़ा7 महीने पहलेलेखक: जसराज ओझा
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रामलाल जाट, राजस्व मंत्री। - Dainik Bhaskar
रामलाल जाट, राजस्व मंत्री।

अब राजस्थान में भी फसलाें की गिरदावरी महाराष्ट्र पैटर्न पर कराने की तैयारी है। वहां पटवारी की बजाय किसान खुद अपने खेताें में खराबे का आंकलन करते हैं। माॅडल का अध्ययन कराने मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने राजस्थान से चार सदस्यीय कमेटी काे महाराष्ट्र भेजा है। कमेटी में भू-प्रबंध आयुक्त आईएएस महेंद्र पारख, भीलवाड़ा कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते, वरिष्ठ वैज्ञानिक अरुण माथुर व सिस्टम एनालिस्ट राेहिताश्व कुमार मीणा शामिल हैं।

चाराें अधिकारी बुधवार काे महाराष्ट्र पहुंच गए जाे 7 जनवरी तक पुणे व मुंबई में वहां के राजस्व िअधिकारियाें से चर्चा करेंगे। किसानाें से भी वार्ता करते हुए प्रक्रिया समझेंगे। टीम अपनी रिपोर्ट में बताएगी कि किसानों से फसल गिरदावरी कराने से फायदा क्या है? रिपोर्ट मुख्य सचिव काे साैंपी जाएगी। इसके बाद सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। राजस्व मंत्री रामलाल जाट के अनुसार मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत की पहल पर राजस्थान में यह बड़ा फैसला हाेगा। किसान जब ऑनलाइन प्रक्रिया से जुड़ेंगे ताे कई फायदे मिलेंगे।

कृषि भूमि के बेचान का नामांतरण भी ऑनलाइन
अभी राजस्थान में कृषि भूमि के बेचान का नामांतरण ऑनलाइन नहीं हाेता है। इसे भी सरकार ऑनलाइन करना चाहती है। कारण है कि ऑनलाइन नहीं हाेने से प्रक्रिया में बहुत समय लगता है। ऐसे में जमीनों की खरीद-फराेख्त में गड़बड़ियांं हाेती हैं। इससे विवाद भी बढ़ते हैं। महाराष्ट्र में यह प्रक्रिया भी ऑनलाइन हाेती है, इसी तर्ज पर राजस्थान में करने की योजना है।

सरकार इसलिए कर रही बदलाव
अभी बेमौसम बरसात या अन्य किसी आपदा से फसलाें में नुकसान पर पटवारी काे फसल गिरदावरी करनी हाेती है। यह गिरदावरी समय पर नहीं हाेती है क्याेंकि राजस्थान में पटवारियाें के करीब आधे पद रिक्त हैं। ऐसे में गिरदावरी रिपाेर्ट के अभाव में किसानाें काे फसल बीमा याेजना का लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे में अब यह जिम्मेदारी किसानाें काे ही देंगे, ताकि वास्तविक नुकसान का समय पर पता लग सके।

कलेक्टर नकाते के सुझाव काे माना
भीलवाड़ा कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते ने सुझाव दिया था कि फसल गिरदावरी पटवारियाें के बजाय किसान से ही कराई जा सकती है। वे खुद महाराष्ट्र से हैं, इसलिए उन्हें इस प्राेजेक्ट की जानकारी थी। गत दिनाें वीसी में उन्हाेंने यह सुझाव दिया था, जाे मुख्य सचिव ने माना।

अपने माेबाइल से फाेटाे खींचेगा किसान
इस प्राेजेक्ट काे राजस्थान में लागू किया ताे किसान के खेत में काैनसी फसल उगा रखी है, इसकी जानकारी वे खुद सरकार काे देगा। वह एक माेबाइल एप के जरिये फसल की फाेटाे खींचकर उस पर अपलाेड करेगा। इससे वास्तविक नुकसान का पता चलेगा। इससे बीमा क्लेम भी जल्दी मिलेगा। राजस्थान में काैनसी फसल ज्यादा हाेती है और किस क्षेत्र में किसान क्या खेती करते हैं, इसकी भी हकीकत सरकार काे पता चलेगी। उसी हिसाब से सरकार नई याेजनाएं तैयार कर सकेगी।

राजस्थान में लगभग सभी तहसीलाें काे डिजिटलाइेशन करने का काम पूरा हाे चुका है। अब सीएम अशाेक गहलाेत की मंशा है कि किसान ऑनलाइन पद्धति पर आए, ताकि राजस्व में झगड़े खत्म हाेने के साथ ही उन्हें याेजनाओं का फायदा मिल सके। हमने एक टीम महाराष्ट्र भेजी है, जाे वहां फसल गिरदावरी, भूमि बेचान का ऑनलाइन नामांतरण आदि की स्टडी करेगी। यदि किसान खुद गिरदावरी करेगा ताे बीमा क्लेम जल्दी मिलने के साथ ही अन्य फायदे हाेंगे। -रामलाल जाट, राजस्व मंत्री