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सिस्टम काे लगा फंगस:तीन बड़ी सरकारी संस्थाएं, तीनाें के काम में खामियां लेकिन कार्रवाई के नाम सिर्फ चार्जशीट और नोटिस

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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  • नगर परिषद; ठेकेदार से लूट के ड्रामा काे दबाया
  • जिला परिषद; नरेगा में फर्जी मंजूरी, कार्रवाई नहीं
  • यूआईटी; कलेक्ट्रेट में ही घटिया निर्माण कर दिया
  • बड़ा सवाल : कलेक्ट्रेट में ही काम घटिया तो अन्य कामों की गुणवत्ता कैसी?

सरकारी सिस्टम में गड़बड़ी के बावजूद कैसे ढील हाे रही है इसका बड़ा उदाहरण शहर में देखने काे मिल रहा है। विकास कराने वाली तीन बड़ी संस्थाएं हैं। इन तीनाें में हुई खामियां इन दिनाें चर्चा में हैं। सबसे पहले जिला परिषद में मनरेगा के तहत करीब 60 लाख रुपए के 34 कामाें की गलत तरीके से वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने का मामला है।

इस मामले में कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते ने जिला परिषद के एक्सईएन महेश ओझा समेत काेटड़ी के दाे तत्कालीन बीडीओ काे चार्जशीट देने के आदेश दिए थे। हालाकि संविदाकर्मियाें पर ताे गाज गिर गई लेकिन जिम्मेदाराें के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।

इसी तरह नगर परिषद में टेंडर से राेकने के लिए ढाई लाख रुपए की लूट का ड्रामा हुआ। इसके सीसीटीवी फुटेज है पर पुलिस भी अनजान है और परिषद के अधिकारी भी इसे हल्के में ले रहे हैं। वहीं यूआईटी का भी एक मामला है। कलेक्ट्रेट में हुए निर्माण कार्याें में गड़बड़ पर जिम्मेदार अफसराें काे नाेटिस थमाए गए हैं।

नगर परिषद; सीसीटीवी में वारदात और आराेपी लेकिन राजीनामा इसलिए लूट का केस नहीं, पुलिस का तर्क-काेई लूट हुई ही नहीं

नगर परिषद में नकली लूट के सीसीटीवी फुटेज में असली सबूत सामने आए हैं। पुलिस एक दिन पहले तक नकार रही थी की ऐसा कुछ नहीं हुआ। अगले दिन दैनिक भास्कर की ओर से जुटाए सीसीटीवी फुटेज में पीड़ित कौशल कुमार के हाथ से ढाई लाख रुपए से भरा बैग आरोपी छीनकर भागते हुए दिख रहा है।

हैरान करने वाली बात यह रही कि लूट का ड्रामा होने के बाद पुलिस की मौजूदगी में राजीनामा होने से ऐसे संगीन अपराध के लिए किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित कौशल कुमार ने पहले सभापति राकेश पाठक को बुलाकर पुलिस बुलाई। फिर थाने में जाकर समझौता कैसे हो गया वह समझ से परे हैं।

कोतवाल डीपी दाधीच ने बताया कि मेरी मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच राजीनामा हो गया है। इसके कारण परिवादी ने शिकायत देने से मना कर दिया। परिषद में घटनास्थल पर पहुंचे हेड कांस्टेबल हनुमान चाैधरी का कहना है कि न ताे किसी का बैग छीना है और न ही काेई लूट हुई है। न ही काेई रिपाेर्ट आई है। इधर, आयुक्त दुर्गा कुमारी का कहना था कि इस वारदात पर कार्रवाई करने के लिए पहले शिकायत की थी।

जिला परिषद: अधिकारियों काे नहीं मिली चार्जशीट

आठ जून काे जिला कलेक्टर की निजी आईडी का दुरुपयाेग कर मनरेगा में 60 लाख के 34 काम की स्वीकृतियां जारी करने का मामला आया। मनरेगा में माॅनीटरिंग में लापरवाही पर एक्सईएन महेश ओझा, तत्कालीन बीडीओं राजेंद्र सेन व संजय कुमार काे 17 सीसीए में चार्जशीट देने के आदेश दिए थे। हकीकत यह है कि जिला परिषद से फाइल कलेक्ट्रेट में चली गई पर इनकाे काॅपी नहीं मिली अभी भी ये वहीं कार्यरत है। ऐसे में जांच भी प्रभावित हाेने से फाइल आगे नहीं बढ़ रही है।

काेतवाली में एमआईएस मैनेजर अभिषेक पांडे व जेटीए महेश खाेईवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। ये दोनों संविदाकर्मी है। इसमे खुद एमआईएस मैनेजर पांडे ने ही इन स्वीकृति जारी करने की जानकारी दी थी। ये जांच रिपोर्ट में सामने आई है। हालांकि काेतवाली ने अभी तक काेई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में कलेक्टर ने जांच अधिकारी बदला है।

यूआईटी: कलेक्ट्रेट में काम हुआ नहीं और पैसा खत्म

कलेक्ट्रेट में 65 लाख रु की लागत के विभिन्न विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यूआईटी सचिव महिपाल सिंह ने कलेक्टर के निर्देश पर एक्सईएन अरविंद व्यास, एईएन जीतराम जाट, जेईएन किशाेर इसरानी व संबंधित ठेकेदार काे नाेटिस दिया है।

कलेक्ट्रेट में यूआईटी ने दो केंटीन सहित अन्य निर्माण कार्य करवाए। ये काम न ताे समय पर हुए और न इनकी गुणवता सही है। हालात ये हैं कि काम पूरा हाेने से पहले ही राशि पूरी हो गई। गत दिनों एडीएम प्रशासन राकेश कुमार ने मीटिंग में यूआईटी अफसरों के समक्ष नाराजगी जताई।

हाल में 14 जून को आयोजित मीटिंग में कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते ने जेईएन, एईएन व एक्सईन को नोटिस देने के निर्देश दिए। जांच के लिए कमेटी गठन के निर्देश दिए। सवाल यह कि जब कलेक्ट्रेट में ही समय पर काम नहीं हाे रहे हैं ताे बाकी जगह क्या हाल हाे रहा है।

आईडी हैक कर मनरेगा में 34 निर्माण कार्याें की स्वीकृति के मामले में काेतवाली में एफआईआर दर्ज है। यहां प्रगति नहीं हाेने से मैने एसपी काे पत्र लिखा है कि इसमें जांच अधिकारी बदला जाए। अफसराें काे चार्जशीट दी जाएगी उसमें कुछ संशाेधन हाेने से हस्ताक्षर बाकी है। यूआईटी के मामले में भी सचिव काे जांच करने के आदेश दिए हैं।

शिवप्रसाद एम नकाते, कलेक्टर​​​​​​​

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