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तकनीक:टेक्सटाइल कॉलेज के तीन छात्रों ने बनाई एशिया की पहली साड़ी फोल्डिंग मशीन

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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  • जयंत, अमित व सुमित ने बनाई मशीन, बड़े उद्योग व छोटी दुकानों पर साड़ी समेटने का काम चंद मिनट में...औद्याेगिक भ्रमण में देखी थी समस्या
  • काेराेना संक्रमित क्षेत्र में दवा छिड़काव के लिए उज्जवल ने बनाया मानव रहित गाड़ी का मॉडल

एमएलवी टेक्सटाइल एंड इंजीनियरिंग कॉलेज में इस बार नए और अलग तरीके के प्रोजेक्ट को न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं की ओर से चुना जा रहा है बल्कि ऐसे प्रोजेक्ट भी बनाए जा रहे हैं जो कि एशिया में पहली बार बने हों। कॉलेज के छात्रों ने साड़ी फोल्डिंग मशीन बनाई जो कि एशिया में पहली बार बनी है।

इससे टेक्सटाइल उद्योग की बड़ी परेशानी का समाधान होने की संभावना है। यह मशीन काॅलेज के तीन छात्राें जयंत, अमित व सुमित ने बनाई है। वहीं कोरोना काल के मद्देनजर काॅलेज के एक अन्य छात्र उज्ज्वल राठाैड़ एक ऐसी मानव रहित गाड़ी का मॉडल बनाया है जिससे सफाईकर्मी कोरोना संक्रमित क्षेत्र से 30 फीट दूर रहकर केमिकल का छिड़काव कर सकते हैं।
इससे हर प्रकार की साड़ी फाेल्ड की जा सकती है, आकार भी छाेटा है

मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के फाइनल इयर स्टूडेंट्स जयंत श्रीमाली, अमित मोटवानी और सुमित भाटी समेत अन्य स्टूडेंट्स इंडस्ट्रीयल टूर पर गए थे। उद्योगों में साड़ी बनने के बाद उसे फोल्ड और पैक करने में बहुत समय, पैसा और श्रमिक लगते हैं। इसके बारे में पता चला तो कुछ और सर्वे किए फिर मशीन बनाने का विचार आया। इसका आकार 80x80x80 सेमी है, जो कि बहुत छोटा है।

इससे हर प्रकार की साड़ी फोल्ड की जा सकती है। यह स्वचालित मशीन बड़े उद्योग से लेकर छोटी दुकानों में भी इस्तेमाल हो सकती है। मैकेनिकल ब्रांच के प्रोफेसर राहुलसिंह मौर्य ने बताया कि इंडिया और यूएस पेटेंट में तलाश चुके हैं अभी तक ऐसी कोई मशीन नहीं बनी है। इंडस्ट्रियल जानकारी भी एकत्रित की है। इस आधार पर कह सकते है कि यह मशीन अपनी तरह की एशिया में पहली फोल्डिंग मशीन है। इसका जल्द पेटेंट प्राप्त करेंगे।

कोरोना संक्रमित क्षेत्र से दूर रहकर भी कर सकेंगे केमिकल छिड़काव
कॉलेज के छात्र उज्ज्वल राठौड़ ने कोरोना से बचाव और सफाई कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मानव रहित गाड़ी का मॉडल बनाया है। इसकी मदद से सफाई कर्मी दूर से ही कोरोना संक्रमित क्षेत्र में केमिकल का छिड़काव कर सकते हैं। यह अपने छोटे आकार, अच्छी क्षमता के कारण कम चौड़ाई वाली गलियों में भी आसानी से छिड़काव कर सकती है।

गाड़ी की कीमत किसी भी ड्रोन से कम है। गाड़ी के मॉडल का सुझाव सरकार को एमवाय जीओवी के इनोवेशन चैलेंज में भी कॉलेज की तरफ से भेजा गया है। उज्जवल ने यह गाड़ी सॉलिडवर्क्स सॉफ्टवेयर में डिजाइन की है। उज्जवल प्रोफेसर सूरज गुप्ता के मार्गदर्शन में इस मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसके पेटेंट के लिए भी आवेदन किया जाएगा।

कैमरे व फव्वारे से लैस हाेगी यह गाड़ी...

गाड़ी रिमोट से कंट्रोल होगी और बैट्री से चलेगी। इस पर कैमरा और फव्वारा लगाया है। कैमरा चालक को जगह का मुआयना करने में मदद करेगा वहीं फव्वारा केमिकल का छिड़काव करेगा। इसे 30 फीट की दूरी से भी चलाया जा सकता है। साथ ही जीपीएस का उपयोग कर इसकी रेंज को और बढ़ा सकते हैं।

यह 30x20x40 इंच की छोटी गाड़ी है, इसकी क्षमता 225 लीटर है, जिसे उपयोग के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। इसे टैंक से सीधे जोड़कर और अधिक केमिकल का छिड़काव किया जा सकता है कम लागत और आसानी से गाड़ी को चलाया जा सकता है।

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