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  • When The Oxygen beds Started Falling Short, The Corona Survey Was Conducted On The Election Pattern, 16000 Got Medicines In The Houses… Stalled In The Hospitals

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अस्पतालों में भीड़:ऑक्सीजन-बेड कम पड़ने लगे तो चुनाव पैटर्न पर कोरोना सर्वे हुआ, 16000 को मिली घरों में दवा...रुकी अस्पतालों में भीड़

भीलवाड़ा6 दिन पहलेलेखक: जसराज ओझा
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मेडिकल टीमें घर-घर जाकर तापमान और ऑक्सीजन सेचुरेशन जांचती है। लक्षण दिखने पर दवा देती है। - Dainik Bhaskar
मेडिकल टीमें घर-घर जाकर तापमान और ऑक्सीजन सेचुरेशन जांचती है। लक्षण दिखने पर दवा देती है।
  • ऑक्सीजन-बेड कम पड़ने लगे तो चुनाव पैटर्न पर कोरोना सर्वे हुआ, 16000 को मिली घरों में दवा...

काेराेना की चेन ताेड़ने के लिए अब जिला प्रशासन अन्य जिलाें और राज्याें सहित अलग-अलग तरह के माॅडल की स्टडी करा रहा है। प्रशासन की ऐसी ही एक स्टडी में चाैंकाने वाला सच सामने आया है। यह सच जिले के करीब 28 लाख लोगों को चेतावनी भी देता है कि इस वक्त कोरोना गाइडलाइन, सरकारी पाबंदियों की पालना बेहद जरूरी है।

कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते ने महाराष्ट्र में काेराेना नियंत्रण पर हाे रहे काम और चुनाव पैटर्न पर यहां भी सर्वे कराया है। इसकी पहली रिपाेर्ट से पता चला कि जिले की आबादी करीब 28 लाख में से महज 0.1 फीसदी यानि 2800 लाेगाें काे एकसाथ गंभीर स्थिति में अस्पतालों में बेड व ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जाए ताे इंतजाम नहीं है। 2800 लाेगाें काे एक साथ भर्ती करने के लिए 5600 ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता होती है, लेकिन अभी केवल 2 हजार सिलेंडर मुश्किल से मिल रहे हैं। अस्पतालाें में लगातार भीड़ बढ़ रही है। न बेड मिल रहे न ही पूरी ऑक्सीजन। मौंतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। ऑक्सीजन प्लांट भी जवाब दे रहे हैं। कलेक्टर नकाते का कहना है कि इन्हीं चुनाैतियों से निबटने के लिए यह सर्वे कराया है।

सर्वे क्यों जरुरत नहीं फिर भी लगवा रहे थे ऑक्सीजन
अभी एक-एक सिलेंडर की मारामारी चल रही है। कुछ निजी अस्पताल सिलेंडर ताे ले रहे हैं लेकिन उनका उपयाेग किन मरीजाें पर हाे रहा, इसका पता नहीं चला। कलेक्टर ने तीन डाॅक्टराें की एक कमेटी बनाई। ये डाॅक्टर चार निजी अस्पतालाें में गए और पल्स ऑक्सीमीटर से मरीजाें का ऑक्सीजन लेवल जांचा। इसमें पता चला कि 17 मरीज ऐसे थे, जिनका ऑक्सीजन लेवल 90 से ऊपर था फिर भी भर्ती रखे हुए थे। इन्हें डिस्चार्ज करने के लिए कहा गया। अब यह कमेटी लगातार जाकर जांच कर रही है।

सर्वे कैसे आरएएस अफसर ने भी फोन पर कई मरीजों से बात की
25 से 28 अप्रैल तक कलेक्टर कार्यालय में 86 जनाें ने ऑक्सीजन बेड मांगा। इनमें से 47 काे उपलब्ध कराया। बाकी काे क्याें नहीं मिला, इस पर आरएएस अधिकारी राजेश सुवालका से रिपाेर्ट मांगी। सुवालका ने इन राेगियाें से फाेन पर बात की। पता चला कि आठ राेगी अन्य शहर में चले गए। 04 की माैत हाे गई। 27 ने बताया कि वे घर आ गए और स्वस्थ है। इनसे कारण पूछा ताे बताया कुछ लक्षण थे और अस्पताल में आकर बेड मांगा। इनकी जांचें हुई ताे सबकुछ ठीक निकला। कई लाेग केवल घबराकर अस्पताल आ गए थे। ऐसे में डरने के बजाय हिम्मत रखना जरूरी है।

नतीजा }बीमारी का पता चलते ही जल्द इलाज मिला
जिले की 12 पंचायत समितियाें में तीन लाख 60 हजार 76 परिवाराें में बीएलओ ने सर्वे किया। इसमें पल्स ऑक्सीमीटर से इन घराें में सर्दी-जुकाम के मरीजाें की जांच की। पहले पांच दिन में 16 हजार 674 लाेग एेसे मिले, जिनमें कुछ लक्षण थे। इनकाे हाेम आइसाेलेट कर वहीं दवा किट दिया। इससे यह फायदा हुआ कि ये लाेग अस्पतालाें में नहीं आए और समय पर इनकाे पता भी चल गया। अब घर पर ही दवा लेंगे। इन पर स्थानीय अस्पताल प्रशासन निगरानी रख रहा है।

निजी अस्पतालों से कहा- जबरन रोक रखे मरीजों को छुट्‌टी दें

हमारे पास ऑक्सीजन की कमी है। 28 लाख की आबादी में से एक साथ 0.1 फीसदी मरीज यानि की 2800 आ जाएं ताे भी इंतजाम नहीं है। 1950 सिलेंडर की प्रतिदिन की डिमांड है जबकि कम मिल रहे हैं। निजी अस्पतालाें में ऑडिट कराई है, कुछ जगह बेवजह मरीजाें काे राेक रखा था, जिनकाे डिस्चार्ज करने के लिए कहा है। बीएलओ ने घर-घर सर्वे किया है जिसकी रिपाेर्ट भी आ गई है। 16 हजार 674 संदिग्ध मिले दवा किट दवा दिए हैं। - शिवप्रसाद एम नकाते, कलेक्टर

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