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जिले में रोजाना 3 हजार टन अवैध बजरी का खनन:शिकायत करने वाले को डराया धमकाया जा रहा, बनास नदी में खोद की गई सैकड़ों फिट गहरी खाईयां

सवाई माधोपुर11 दिन पहले
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नदी से अवैध बजरी लेकर निकलते वाहन - Dainik Bhaskar
नदी से अवैध बजरी लेकर निकलते वाहन

जिले में अवैध बजरी खनन थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले के खंडार, बौंली, मलारना डूंगर सहित नदियों के पेटे वाले इलाकों में बजरी खनन धड़ल्ले से चालू है। जिलें में बनास, मोरेल नदी से अनुमानतः करीब 3 हजार टन बजरी का खनन रोजाना किया जा रहा है। इस अवैध खनन की नाक में नकेल कसने में प्रशासन व पुलिस नाकाम ही दिखाई पड़ती है। पुलिस की ओर से अवैध खनन को न रोककर अवैध बजरी परिवहन को रोकने के लिए जेसीबी से रास्तों को कटवाकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है।

नदी के पेटे अवैध खनन से बने गड्ढे
नदी के पेटे अवैध खनन से बने गड्ढे

तस्वीर में बनास नदी के समीप काटड़ा गांव में स्थित सैकड़ो फीट पुराने कुएं की गहरी खुदाई करने के बाद अब कुआ एक पिल्लर की तरह नजर आने लगा है। बनास नदी पेटे से स्थानीय खनन माफियाओं द्वारा जेसीबी एलएनटी बुलडोजर ट्रैक्टर ट्रॉलीयों द्वारा गहरी खुदाई करके बनास नदी के प्राकृतिक सौंदर्य को ग्रहण लगा दिया गया है।

क्षेत्र में सैकड़ों स्थानों पर बजरी के अवैध स्टॉक कर रखे हैं। जिससे क्षेत्र के दो या तीन प्रतिशत लोगों को छोड़कर अन्य लोगों को हानि हो रही है। ग्रामीणों द्वारा खनन माफियाओं की शिकायत करने एवं उनका सामना करने पर बलपूर्वक दबंगता से दबा दिया जाता है। क्षेत्र में से अगर कोई लोग खनन माफियाओं को शिकायत करता है तो उसको खनन माफियाओं द्वारा परेशान कर दबा दिया जाता हैं। बजरी माफियाओं की ओर से उन्हें बंधक तक बना लिया जाता है। पुलिस के रोकने पर पुलिस पर पथराव जैसी घटनाएं आम है।

जिले में इन जगहों पर हो रहा है अवैध खनन

खंडार के सेवती, आकोदा, अनियाला, क्यारदा, बनरावदा घाट, पादड़ा घाट, पादड़ी घाट, औण घाट, बडौद घाट,बडवास सावता डाबिच, खटकड़ मलारना डूंगर के भारजा नदी, भूखा सांगरावासा श्यामोली, बिलोली नदी, वाढ बिलोली ,गोखरू पुरा, औलवाड़ा ,निवाड़ी ,भूरीपहाड़ी काटड़ा बौली में जौलन्दा, पीपलवाड़ा बहनौली, महेशपुरा, देवली सहित नदी के पेटे में स्थित सभी गांवों से अवैध बजरी खनन धडल्ले चल रहा है।

वन्य जीव एवं बनास नदी का प्राकृतिक सौंदर्य अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है :

बनास नदी में दिन रात वाहनों के आवागमन तथा शोर-शराबे एवं वाहनों से निकलने वाले हानिकारक धुआं से ध्वनि प्रदूषण वायु प्रदूषण तथा अन्य कई प्रकार के प्रदूषण होने के कारण बनास नदी पेटे एवं वन विभाग में विचरण करने वाले वन्य जीव मजबूरन अपने स्थानों को छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाने को मजबूर हो गए हैं।

बनास नदी में सैकड़ों फिट गहरी खाईयां खोदने से प्राकृतिक सौंदर्य पर ग्रहण लगने के साथ-साथ बरसात के मौसम में कई मनुष्य एवं जीव जंतुओं के गहरे गड्ढे में फसने से उन्हे जान गंवानी पड़ती है। जिससे क्षेत्र के लोगों में प्रशासन के प्रति असन्तोष व्याप्त है। खनन माफियाओं का क्षेत्र में भय व्याप्त है, लेकिन क्षेत्र के लोग बजरी के अवैध कारोबार की शिकायत कर थक चुके हैं। खनन माफियाओं तंग आकर परेशान होकर ग्रामीण घर बैठने को मजबूर हो गए हैं।

अनेकों स्थानों पर अवैध स्टाक :

कुछ ही दिनों बाद बरसात का मौसम चालू होना है। इसकी वजह से बनास नदी में पानी आने के कारण खनन माफियाओं द्वारा एडवांस तैयारियां कर मलारना स्टेशन क्षेत्र के दर्जनों गावों में विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा सैकड़ों की संख्या में खातेदारी सवाईचक चारागाह वनभूमि जमीन में सड़कों के किनारे जगह-जगह अवैध स्टोक कर लिया है। जिसके बाद इस बजरी को महंगे दामों में बेचा जाएगा। जिससे गरीबों को आशियाना बनाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।

क्षेत्र की सड़कें एवं कच्चे मार्ग में जर्जर :

ग्रामीणों का कहना है कि बजरी के ओवरलोड वाहनों से क्षेत्र की सड़कें जर्जर हो चुकी है साथ ही किसानों के खेतों में होकर दिन दहाड़े बजरी के ओवरलोड वाहन सरपट दौड़ रहे हैं। किसान अगर विरोध करते हैं तो खनन माफिया झगड़े के लिए तैयार रहते हैं। जिससे वह बिना रोक टोक के सरेआम निकल रहे हैं। जिससे किसानों के खेतो में फसल बुवाई में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन बना अनभिज्ञ

इस बारे में दैनिक भास्कर की टीम की ओर से मलारना डूंगर उप जिला कलेक्टर रघुनाथ खटीक से बातचीत की गयी तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए बताया कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। जानकारी जुटाकर खनन माफियाओं के प्रति नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

फोटो : खेमराज मीणा