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  • 15 Positives Occurred In A Family Of 17 People; The Daughter in law And Niece Were Safe, Both Would Arrange For Everyone's Food, Later They Also Became Infected, So We Handled

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:17 लोगों के परिवार में 15 पॉजिटिव हुए; बहू व भतीजी सुरक्षित थीं, दोनों सभी के खाने की व्यवस्था करतीं, बाद में वो भी संक्रमित हो गईं तो हमने संभाला

बीकानेर6 महीने पहले
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संगठन में शक्ति है। बुरे वक्त में कभी भी धैर्य नहीं खोना चाहिए। बुरा वक्त आया है तो निकल भी जाएगा। मुसीबतें सभी पर आती हैं लेकिन समाधान वही निकाल पाते हैं जो धैर्य को अपना साथी बना लेते हैं। यह कहना है बीकानेर के जाने-माने व्यवसायी राजू मूलचंदानी का। राजू मूलचंदानी ने बताया कि कैसे उनका 17 सदस्यों का पूरा परिवार एक-एक कर कोरोना की चपेट में आ गया। लेकिन, आत्मविश्वास और एकजुट होकर बिना अस्पताल में भर्ती हुए इसे मात दे दी। पढ़िए उन्हीं की जुबानी...

पिछले साल सितंबर में मेरा छोटा भाई मनोज व्यापार के लिए लुधियाना गया था। वहां से वापस आया तो उसकी तबीयत कुछ खराब हुई। उसने जांच करवाई तो कोरोना पॉजिटिव आया। उस समय इस बीमारी के बारे में काफी अफवाह थी। 17 सदस्यों के हमारे परिवार में सभी साथ रहते हैं। ऐसे में मेरे पिताजी खेमचंद ने कहा कि सभी को कोरोना की जांच एहतियात के तौर पर करवानी चाहिए। दो दिन के अंदर सभी सदस्यों ने जांच करवाई। 17 में से 15 जने पॉजिटिव आ गए। कोई घबराया नहीं। मैंने डॉक्टर से मोबाइल पर संपर्क किया। हमारे दो मकान थे। हम एक मकान में शिफ्ट हो गए।

मेरे माता-पिता व हम चारों भाई व उनकी पत्नियां सभी पॉजिटिव थे। सभी अलग-अलग कमरों में शिफ्ट हो गए। गनीमत रही कि पुत्रवधु मेघना व भतीजी जया उस समय निगेटिव थी। उन्हें दूसरे घर में रखा। मेघना और जया हमारे खाने का ध्यान रखने लगीं। इतने बड़े परिवार की ऐसी गंभीर स्थिति में जिम्मेदारी उठाना दाेनाें के लिए संभव नहीं था। फिर भी उन्हाेंने हार नहीं मानी। हम सबने प्लानिंग की। दाेनाें की जिम्मेदारियां बांटी। दूर रहने की हिदायत दी और हाेम डिलीवरी जैसे माध्यमाें काे अपनाने की स्ट्रेटजी बनाई।

इसके बाद शुरू हुई काेराेना गाइड लाइन की पालन की जिम्मेदारी। एक मकान में रहने के कारण हम लोगों ने कभी मास्क नहीं उतारा। मकान को दिन में कई बार सैनेटराइज करते रहते। शाम होने पर सभी परिजन मास्क पहनकर ढोलक पर भजन-कीर्तन करते। कैरम खेलते। एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाई और 12-15 दिन के अंदर ही हम सभी स्वस्थ हो गए। इस दौरान हमारी सेवा करने वाली मेघना व जया भी पाॅजिटिव आ गईं। अब उन्हें क्वारेंटाइन किया और हम लाेगाें ने कमान संभाल ली। एकजुटता और आत्मविश्वास से हम कोरोना से जंग जीत गए।

84 साल के मुखिया से लेकर छोटे बच्चे तक पॉजिटिव आए परिवार के मुखिया खेमचंद (84) व पत्नी गंगा देवी (78), राजू व उनकी पत्नी शालिनी, पुत्र दीपक व पुत्रवधु मेघना, बेटी-शिवांगी, घनश्याम दास व उसकी पत्नी मीरा, लड़कियां जया तथा दिव्या। मनोज व पत्नी राजश्री, प्रकाश व पत्नी किशना, बेटा योगेश व बेटी वृंदा।

गर्म पानी पीया, भोजन में पौष्टिकता का ध्यान रखा
राजू मूलचंदानी बताते हैं कि उनके पूरे परिवार ने एक-दूसरे का साथ दिया। गर्म पानी पीते रहे, हेल्दी फूड पर ध्यान दिया। काढ़ा, नारियल पानी, चाय, फ्रूट व ज्यूस से इस बीमारी को हराया।मां को बुखार आया तो उन्हें अलग कमरे में शिफ्ट किया : सभी सदस्यों में केवल मां गंगादेवी को बुखार आया। इस पर उन्हें सभी से अलग करते हुए छत पर कमरे में एहतियात के तौर पर रखा। दिन में उन्हें बार-बार जाकर कमरे से बाहर रहकर संभालते रहे। खाना-पीना देते रहे और अंत में भगवान ने साथ दिया कि किसी को कुछ नहीं हुआ। हमने कोरोना जैसी महामारी को मिलकर हराया।

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