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शक्ति रूपेण संस्थिता:राजस्थान के एकमात्र पुलिस मोटर ड्राइविंग स्कूल में पहली बार 18 लड़कियां ट्रेनिंग ले रहीं; बोलीं- हम पुरुषों से एक कदम आगे

बीकानेर20 दिन पहलेलेखक: मनमोहन अग्रवाल
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पुलिस की नौकरी में ड्राइवर का ऐसा पद है जिसमें लंबे समय से पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है। नई भर्ती होने वाली युवतियां अब इस मिथक को तोड़ रही हैं। पहले ड्राइवर बनने के लिए आवेदन ही नहीं करती थीं, लेकिन अब पूरे जोश और उत्साह के साथ भर्ती होकर ट्रेनिंग ले रही हैं। पुलिस महकमे में भर्ती होने वाले ड्राइवर को ट्रेनिंग देने के लिए प्रदेश का एकमात्र संस्थान पुलिस मोटर ड्राइविंग स्कूल बीकानेर में है। इस बार यहां 18 महिलाएं ट्रेनिंग ले रही हैंै। अब तक आठ बैच में 782 ड्राइवर ट्रेनिंग ले चुके हैं जिनमें से महिलाएं सिर्फ 7 थीं।

सुगना बावरी, नैनवा (बूंदी)
हमारे समाज में बहुत कम लोग पढ़े-लिखे हैं। गांव में समाज का कोई भी सरकारी कर्मी नहीं है। मैं पहली लड़की हूं जो पुलिस में भर्ती हुई। समाज की महिलाओं के लिए मिसाल बनूंगी।

मीना गुर्जर, भवानीपुरा (टोंक)
छोटी थी तो साइकिल चलाती थी। फिर बाइक और कार का शौक लगा जिसे प्रोफेशन बनाने की ठान ली। किसी भी प्रोफेशन में लड़कियां पीछे नहीं, पुलिस में ड्राइवर बन ये साबित करना है।

प्रेम मावलिया, दाता रामगढ़ (हनुमानपुरा, सीकर)
बोलेरो गाड़ी दौड़ाती हूं। घरवालों ने कहा, इसे प्रोफेसन बना ले। तय किया और भर्ती हो गई पुलिस महकमे में ड्राइवर के पद पर। मिथक तोड़ना है कि यह फील्ड लड़कों का है।

सुमनलता, धोलीपार्क (हनुमानगढ़)
बेल्ट की नौकरी करनी थी जिसमें चैलेंज हो। पुलिस में ड्राइवर बनने से यह सपना पूरा हो रहा है। हमेशा अनुशासन में रहकर जोश और होश से काम करूंगी जिससे कि दूसरी लड़कियां भी इस जोब में आए।

मूली कुमार सींवर, नोखा (नागौर)
पुलिस की नौकरी में चैलेंज है। चैलेंज लेना मुझे अच्छा लगता है। इसलिए ड्राइविंग चुनी। क्रिमिनल से दो-दो हाथ करने के लिए हमेशा तैयार रहूंगी।

श्वेता चतुर्वेदी, जयपुर शहर
स्पोर्ट्स गर्ल हूं। टेनिस में नेशनल खेली हूं। इसलिए फिट हूं और अनुशासन पसंद करती हूं। यही कारण है कि पुलिस में भर्ती हुई। पिता ने लड़के की तरह पाला है। इसलिए ऐसा काम ही करना था जिससे उनका सीना चौड़ा हो।

अलका कुमारी, पीसांगन (अजमेर)
मुझे इस रुढ़िवादिता को तोड़ना है कि ड्राइविंग पुरुषों का पेशा है। इसलिए मैंने इसे चैलेंज के रूप में लिया है। जॉइंट फैमिली में रहती हूं जिसमें 18 लोग हैं, इसलिए अनुशासित हूं। पुलिस की नौकरी में यही सबसे जरूरी है।

संतोष चौधरी, कामां (भरतपुर)
लड़कियों के लिए कोई काम मुश्किल नहीं। ड्राइविंग तो आसान है। पहले बाइक चलाती थी। घर के लोग ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं तो बड़ी गाड़ियों का शौक हो गया। ग्राम पंचायत में पहली लड़की हूं जो पुलिस में भर्ती हुई।

छोटी बाई मीणा, लीली (लक्ष्मणगढ़ अलवर)
पापा के पास ट्रक है और उनका लोडिंग-अनलोडिंग का काम है। मैंरे पास भी हेवी व्हीकल का लाइसेंस है। सोचा, कुछ ऐसा करूं जिससे अलग पहचान बने। वर्दी का शौक था। पुलिस की नौकरी में ड्राइवर बनना तय कर लिया।

कमला गोठवाल, जसवंतपुरा (राजगढ़)
पापा आर्मी से रिटायर्ड हैं। बड़ी बहन दिल्ली पुलिस में है। उसी से प्रेरणा मिली और ड्राइविंग सीखी। मौका मिला तो भर्ती हो गई। ट्रेनिंग लेकर गाड़ी दौड़ाऊंगी। अपराधियों का पीछा कर उन्हें पकड़ूंगी।

बेनजीर, झुंझुनूं
पति का प्राइवेट स्कूल है। लेकिन, मुझे महिलाओं को प्रोटेक्ट करना था। खास तौर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के मामलों में। क्योंकि वो पीड़ा बता ही नहीं पाती। ड्राइवर रहकर उनकी हेल्प करूंगी।

सुनीता कुमारी, राइबरा (अलवर)
पति आर्मी में ड्राइवर हैं। दो ननद पुलिस डिपार्टमेंट में हैं। देवर दिल्ली पुलिस में ड्राइवर है। इन्हीं से ड्राइविंग के चैलेंजिंग पेशे के लिए मोटिवेशन मिली।

निहारिका कंवर, बांसवाड़ा
खाकी वर्दी देखकर मन में जोश भर जाता है। तय किया कि बेल्ट की नौकरी ही करनी है। कार चलाते समय भी पुलिस की गाड़ी चलाने के बारे में सोचती थी। सपना सच हुआ तो समाज के लिए अच्छा करूंगी।

अंजु खिलेरी, चक विजयसिंहपुरा (कोलायत)
घर में स्कार्पियो गाड़ी है। बेखौफ चलाती हूं। सोचा, कुछ ऐसा करूं कि इसी तरह स्टेयरिंग हाथ में रहे और हवा से बातें करूं। हो गई भर्ती पुलिस महकमे में ड्राइवर के पद पर।

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