फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनाने के मामले में एसओजी का एक्शन:नगालैंड से फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनवाने पर बीकानेर के 4 जिप्सम कारोबारी गिरफ्तार

बीकानेर13 दिन पहले
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स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने फर्जी आर्म्स लाइसेंस प्रकरण में चार जिप्सम कारोबारियों को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ उदयपुर में मुकदमा दर्ज है। प्रकरण में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एडीजी (एसओजी एवं एटीएस) अशोक राठौड़ ने बताया कि फर्जी आर्म्स लाइसेंस प्रकरण में आरोपी कमल किशोर भाटी (38) पुत्र बृजमोहन भाटी निवासी वार्ड नंबर-66 कोटगेट, नवल सिंह (35) पुत्र देवी सिंह निवासी वार्ड नंबर-3 सर्वोदय बस्ती, जुगल सिंह (40) पुत्र अुर्जन सिंह निवासी सर्वोदय बस्ती और बृजेन्द्र सिंह शेखावत (39) पुत्र लूण सिंह निवासी रामपुरा बेरी हमीरवाल चूरू हाल वार्ड नंबर-3 सर्वोदय बस्ती को गिरफ्तार किया है।

चारों आरोपियों के कब्जे से नागालैण्ड राज्य से बनवाए फर्जी आर्म्स लाईसेंस भी जब्त कर लिए गए है। चारों को पकड़ने के लिए शुक्रवार को एसओजी का दल यहां आया था। डीएसटी की टीम ने उन्हें पकड़ कर एसओजी को सौंप दिया। सुखैर उदयपुर में 2017 में फर्जी आर्म्स लाइसेंस का प्रकरण दर्ज हुआ था। चारों आरोपियों के आर्म्स लाइसेंस फर्जी थे, जिन्हें जब्त किया गया है।

आरोपियों ने नागालैण्ड राज्य से फर्जी आर्म्स लाइसेंस जारी करवाकर हथियार खरीद किए थे। नागालैण्ड राज्य से फर्जी आर्म्स लाइसेंस प्रकरण में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रकरण का अनुसंधान किया जा रहा है। डीएसटी की टीम में एसआई चंद्रजीत, ओम प्रकाश, कालूराम, रामकरण, विजय सिंह, कानदान, अब्दुल सत्तार, दीपक यादव, लखविन्द्र सिंह, सवाई सिंह और देवेन्द्र शामिल थे।

बीकानेर के 84 लोगों ने बनाए थे फर्जी लाइसेंस, एसओजी जांच चल रही : नागालैंड से बीकानेर के भी 84 लोगों ने फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनवाए थे। इनमें रसूखदार के अलावा आपराधिक किस्म के लोग भी शामिल थे। पुलिस ने मामले की जांच के बाद 63 लोगों को क्लीन चिट देते हुए 21 के खिलाफ चालान की सिफारिश की थी। प्रकरण की फाइल अब एसओजी के पास है।

एसओजी एक-एक केस की फिर से पड़ताल में जुट गया है। उदयपुर के मामले में गिरफ्तारी के बाद इन प्रकरणों में भी कार्रवाई हो सकती है। यहां बता दें 10 अक्टूबर 2017 को नया शहर थाने में एएसपी सुरेन्द्र सिंह की रिपोर्ट पर दीपक आरोड़ा, जावेद खान, नितिन चढ्‌ढ़ा और जुगल राठी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने अपनी जांच में चारों को ही मुलजिम नहीं माना था।

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