पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

निगम का मिस मैनेजमेंट:ट्रैक्टरों से कचरा कलेक्शन पर हर महीने 50 लाख का पेमेंट, अब ऑटो टिपर पर खर्च होंगे ‌ 90 लाख

बीकानेर16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर ने निगम के कचरा कलेक्शन सिस्टम की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात सामने आई। - Dainik Bhaskar
भास्कर ने निगम के कचरा कलेक्शन सिस्टम की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात सामने आई।
  • शहर में कचरा उठाने पर निगम का खर्च 1.51 करोड़

शहर में डोर टु डोर कचरा कलेक्शन के लिए 34 करोड़ का एमओयू होने के बाद हर महीने कचरा उठाने पर निगम के डेढ़ करोड़ से अधिक रुपए खर्च होंगे। इसे लेकर अभी से सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर में दस साल से ट्रैक्टरों से कचरा कलेक्शन का काम हो रहा है। पहली बार निगम ने एक बड़ा टेंडर और कर दिया। भास्कर ने निगम के कचरा कलेक्शन सिस्टम की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात सामने आई।

शहर में हर दिन एकत्रित होने वाले कचरे का आकलन औसत 300 मीट्रिक टन तक आंका गया है। वर्तमान में शहर के 80 वार्डों में कचरा कलेक्शन के लिए 150 ट्रैक्टर लगाए हुए हैं। इनके अलावा निगम की गाड़ियां भी कचरा उठा रही हैं। कचरा उठाकर गाड़ियों में भरने के लिए सात जेसीबी मशीन ठेके पर ली हुई है।

उन्हें प्रति घंटे के हिसाब से पेमेंट किया जाता है। इसके अलावा डोर टु डोर कचरा कलेक्शन के लिए 60 ऑटो टिपर भी हैं। जिन पर करीब 11 लाख रुपए मासिक खर्च आता है। हम केवल 150 ट्रैक्टरों की ही बात करें तो हर महीने लगभग 50 लाख का भुगतान फर्म को किया जा रहा है। एक साल काम करने पर फर्म को करीब छह करोड़ का भुगतान होगा। अब निगम ने डोर टु डोर कचरा कलेक्शन के लिए कुल 160 ऑटो टिपर लगाने की तैयारी कर ली है। इसका ठेका 34 करोड़ में किया गया है। ठेका लेने वाली फर्म को भी हर महीने करीब 90 लाख का भुगतान किया जाएगा। यानी निगम का हर महीने 1.50 करोड़ से अधिक रुपया कचरे पर ही खर्च हो जाएगा।

  • 300 मीट्रिक टन औसत कचरा आंका रोजाना का शहर में
  • 200 पॉइंट शहर में जहां से रोज उठाया जाता है कचरा
  • 10 साल से ट्रैक्टरों से उठा रहे कचरा, पहली बार इतना बड़ा टेंडर

कांग्रेसी पार्षदों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

निगम का कचरा कलेक्शन गणित

  • 60 ऑटो टिपर प्रतिदिन करते हैं डोर टु डोर कलेक्शन - मासिक खर्च 11 लाख रुपए
  • 150 ट्रैक्टर रोजाना तीन ट्रिप में उठा रहे शहर का कचरा- मासिक खर्च 50 लाख रुपए
  • 7 जेसीबी मशीन ठेके पर कर रही कचरा उठाने का काम- 473 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से पेमेंट
  • 60 ऑटो टिपर से कचरा कलेक्शन पर मासिक खर्च आंका औसत 90 लाख रुपए

ऐसे किया 34 करोड़ का आकलन : डोर टु डोर कचरा कलेक्शन के लिए 34 करोड़ का एमओयू निगम ने किया है। निगम ने इसके लिए सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के फार्मूले को अपनाया है। इसके अनुसार पांच लाख से अधिक की आबादी वाले शहर में एक व्यक्ति एक दिन में 450 ग्राम कचरा फैलाता है। उस हिसाब से शहर की वर्तमान आबादी को देखते हुए 300 टन कचरा प्रतिदिन औसत माना गया है। फर्म को 1017 रुपए प्रति टन के हिसाब से तौल पर भुगतान किया जाएगा। हर माह 9000 टन कचरे के हिसाब से 90 लाख रुपए से अधिक का भुगतान फर्म को होगा।

यूजर चार्जेज से डेढ़ करोड़ मिलने की उम्मीद

डोर टु डोर कचरा कलेक्शन करने वाली फर्म को शहर में यूजर चार्जेज वसूलने का काम भी सौंपा गया है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से तीन महीने और घरों से छह महीने बाद यूजर चार्जेज लिए जाएंगे। शहर में डेढ़ लाख घर और 50 हजार से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। निगम को इनसे हर महीने करीब डेढ़ करोड़ का राजस्व मिलने की उम्मीद है। निगम अधिकारियों का मानना है कि यूजर चार्जेज मिलने से कचरे के भुगतान का भार नहीं पड़ेगा।

डोर टु डोर कचरा कलेक्शन के काम में पूरी पारदर्शिता अपनाई जाएगी। इसके लिए पूरा सिस्टम बनाया जा रहा है। ट्रैक्टरों से कचरा कलेक्शन किया जाएगा या नहीं, इस पर विचार किया जाएगा।
एएच गौरी, आयुक्त

उधर, कचरा कलेक्शन की मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं

शहर में कचरा कलेक्शन का काम 150 ट्रैक्टरों से हो रहा है, लेकिन उसकी मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं है। निगम का दावा है कि जीपीएस से मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि निगम कार्यालय में लगा जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम ही एक सप्ताह से बंद है। कुछ ट्रैक्टरों पर जीपीएस ही नहीं है तो कुछ के जीपीएस खराब पड़े हैं।

आरोप ये भी है कि ना तो पूरे ट्रैक्टर चल रहे हैं ना ही तीन ट्रिप हो रहे हैं। फिर भी ठेकेदार को पेमेंट हो रहा है। ऐसे में सवाल ये है कि ऑटो टिपर के नए कांट्रेक्ट की मॉनिटरिंग कैसे होगी। क्योंकि निगम ने अब तक इसका कोई मैनुअली सिस्टम ही नहीं बनाया है।

जब 160 ऑटो टिपर कचरा उठाएंगे तो क्या ट्रैक्टर चलेंगे तय नहीं

शहर में ज्यादातर कचरा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और घरों से ही निकलता है। सफाई के दौरान कर्मचारी उन्हें एक स्थान पर इकट्‌ठा करके छोड़ देते हैं। शहर में ऐसे 200 पॉइंट हैं। बाद में वहां से ट्रैक्टर वह कचरा उठा ले जाते हैं। जब शहर में 160 ऑटो टिपर डोर टु डोर कचरा कलेक्शन करेंगे तो ट्रैक्टरों को कचरा नहीं मिलेगा। लेकिन ट्रैक्टर उस वक्त तक चलेंगे जब तक उसके ठेके का पीरियड खत्म नहीं हो जाता। टिपर 16 जुलाई से लांच हो रहे हैं, लेकिन ट्रैक्टरों को बंद करने का फैसला अब तक नहीं लिया जा सका है।

कांग्रेसी पार्षदों का आरोप...ठेकों में हो रहा भ्रष्टाचार

डोर टु डोर कचरा कलेक्शन के लिए 34 करोड़ के टेंडर को लेकर कांग्रेसी पार्षदों ने विकास के नाम पर ठेकों में भ्रष्टाचार का आरोप मेयर पर लगाया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष जावेद पड़िहार, अनिता शर्मा ने आयुक्त को ज्ञापन देकर कहा कि बोर्ड की बैठक में चर्चा किए बिना टेंडर जारी करना गलत है।

जब निगम यूडी टैक्स ले रहा है तो यूजर चार्ज नहीं लिया जाना चाहिए। कच्ची बस्तियों को यूजर चार्ज से मुक्त करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। पार्षदों ने पूछा है कि शहर में पहले से कचरा संग्रहण कर रही गाड़ियों को हटाया जाएगा या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जयपुर निगम में बीवीजी कंपनी की तर्ज पर ही यहां भी इस कंपनी से सांठ-गांठ की गई है।

खबरें और भी हैं...