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एसओजी जांच में चौंकाने वाले खुलासे:6 स्टॉकिस्ट का खेल; जो रेमडेसिविर बीकानेर के लिए आए, उनकी जयपुर के नामी हॉस्पिटल्स में सप्लाई की

बीकानेर2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • ड्रग कंट्रोलर सोते रहे...ब्लैक मार्केटिंग होती रही

रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर पूरे प्रदेश में कालाबाजारी की खबरें सामने आ रही हैं। बीकानेर में भी बुधवार को पुलिस ने मेडिकल से जुड़े चार पेशेवरों को गिरफ्तार किया था। इस बीच दो दिन से बीकानेर में रेमडेसिविर के रिकॉर्ड की जांच कर रही एसओजी को स्टॉकिस्ट के एक माह के रिकॉर्ड में चौंकाने वाली गड़बड़ियां मिली हैं।

बीकानेर में रेमडिसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी और गड़बड़ियों की जानकारी मिलने पर एसओजी टीम यहां के छह स्टॉकिस्ट के एक अप्रैल से तीन मई तक के रिकॉर्ड खंगाल रही है। स्टॉकिस्ट की ओर से इंजेक्शन सप्लाई और ड्रग कंट्रोलर को भेजी गई संख्या का मिलान किया तो गड़बड़ियांं सामने आईं।

खास बात ये है कि इंजेक्शन जयपुर से बीकानेर के स्टॉकिस्ट को भेजे गए हैं और इन स्टॉकिस्ट ने जयपुर के ही दुर्लभजी, फोर्टिस, महाराजा सहित अनेक अस्पतालों में सप्लाई किए हैं। इसके अलावा इंजेक्शन सप्लाई किसी और को किए, जबकि ड्रग कंट्रोलर को गलत नाम बताए। ऐसे अस्पतालों को भी इंजेक्शन दे दिए गए जो कोविड-19 के लिए अधिकृत ही नहीं हैं। अस्पतालों के अलावा डॉक्टर्स को भी सप्लाई किए गए हैं।

रेमडेसिविर इंजेक्शन की पूरी जानकारी रखने के लिए बीकानेर में सहायक ड्रग कंट्रोलर को अधिकृत किया गया है लेकिन, इन गड़बड़ियों की उन्हें भनक ही नहीं लगी। अस्पतालों में किस मरीज को कितने इंजेक्शन लगे, एसओजी इसका भी पता लगा रही है। इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां जल्द हो सकती हैं।

एसओजी के राडार पर ये 6 स्टॉकिस्ट

1. मित्तल ड्रग एजेंसी 2. जिंदल मेडिकोज 3. राजेन्द्र मेडिकोज 4. तंवर मेडिकोज 5. मित्तल फार्मा 6. गौरव एजेंसी

जो अस्पताल अधिकृत नहीं, उन्हें भी दिए रेमडेसिविर- जीवन रक्षा, गोविन्दम, वरदान, डीटीएम फोर्टिस, कोठारी और एम एन अस्पताल ही अधिकृत हैं। जबकि, इंजेक्शन पीडी कृष्णा, वरदान, मारवाड़ सहित अन्य अस्पतालों को भी दिए गए। स्टॉकिस्ट से इंजेक्शन लेने के लिए डॉक्टर की पर्ची के साथ आधार कार्ड, फार्म भी जरूरी।

इधर, 20 से ज्यादा रेमडेसिविर बेच चुके थे चारों मेडिकल पेशेवर आरोपी, कहां से लाए 36 घंटे बाद भी पता नहीं

कोरोना मरीजों को लगने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़े गए तीन नर्सिंग कर्मी और मेडिकल स्टोर सहायक अब तक 20 से ज्यादा रेमडेसिविर बेच चुके हैं। 5400 रुपए में आने वाली रेमडेसिविर के चारों 24 हजार तक में बेचते थे। इन्हें ये इंजेक्शन कहां से हाथ लगे और इस काम में इनके साथ और कौन हैं, पुलिस को अभी तक इसका पता नहीं लगा है।

गौरतलब है कि पुलिस की डीएसटी टीम और सदर थाना पुलिस ने बुधवार को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते चौधरी लैब के नर्सिंग स्टाफ घड़साना निवासी संदीप नायक, जीवन रक्षा अस्पताल में मेडिकल स्टोर हेल्पर बल्लभ गार्डन निवासी रमेशसिंह, बेस्ट हैल्थ केयर में नर्सिंग कर्मी नोखा निवासी महेन्द्र बिश्नोई और वरदान अस्पताल में नर्सिंगकर्मी अनिल जाट को गिरफ्तार किया था।

एसएचओ सत्यनारायण गोदारा ने बताया कि रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वालों को पकड़ने के िलए पुलिस ने बुधवार को बोगस ग्राहक भेजकर स्टिंग किया था। स्पेशल टीम के इंचार्ज एएसआई रामकरण ने बताया, कांस्टेबल सवाईसिंह बोगस ग्राहक बनकर गया था।

जो अस्पताल और डॉक्टर कोविड-19 के लिए अधिकृत नहीं हैं, उन्हें भी रेमडेसिविर इंजेक्शन सप्लाई किए गए हैं। इनके बारे में पता लगाकर तस्दीक किया जाएगा। मेरी ड्यूटी ऑक्सीजन सिलेंडर के काम में लगा रखी है। इसलिए एक इंस्पेक्टर को इंजेक्शन का रिकॉर्ड और स्टॉकिस्ट पर निगरानी के लिए लगा रखा है।- सुभाष मुटनेजा, सहायक ड्रग कंट्रोलर

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