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शिक्षा विभाग:शिक्षा सत्र छोटा होने से 60% सिलेबस पूरा होना मुश्किल, छुट्टियों में भी होगी कटौती

बीकानेरएक महीने पहले
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  • बोर्ड परीक्षाओं के लिए स्कूलों के डेढ़ सौ दिन खुलने की बाध्यता

कोविड 19 की भेंट चढ़ चुके शिक्षा सत्र को बचाने के लिए शिक्षा विभाग दो बड़े निर्णय करने जा रहा है। इस साल शीतकालीन अवकाश जहां कम हो जाएगे, वहीं शिक्षा सत्र अब मार्च नहीं बल्कि 15 मई तक चलेगा। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं भी अप्रेल- मई में होने की संभावना है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में विस्तृत कार्य योजना बनाकर शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा को भेज दी है

जहां से मुख्यमंत्री को भेजी गई है। उम्मीद की जा रही है कि आजकल में ही यह निर्देश जारी होंगे। जानकारी के मुताबिक इस बार दीपावली व शीतकालीन अवकाश महज तीन-तीन दिन के होंगे। जो पहले एक सप्ताह से अधिक के होते थे। वहीं, शिक्षा सत्र को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। पंद्रह मई तक स्कूल नियमित रूप से खुलेंगे। इसके बाद बोर्ड परीक्षा आयोजित करेगा। ऐसे में मई के अंतिम सप्ताह में शुरू होने वाली परीक्षा जून

के प्रथम सप्ताह तक आयोजित हो सकती है। दरअसल, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की परीक्षाओं के लिए स्कूलों के 150 दिन खुलने की बाध्यता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो शून्य सत्र घोषित करना होगा। निदेशालय ने इसी कारण दीपावली व शीतकालीन अवकाश कम करने का प्रस्ताव दिया है।

75 फीसदी उपस्थिति बाध्यता की कैसे होगी पालना
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की परीक्षा के लिए 75 फीसदी उपस्थिति जरूरी है। अगर दो नवम्बर से इन बच्चों को स्कूल बुलाया भी जाता है तो उन्हें 15 मई तक सिर्फ 25 फीसदी दिन ही अवकाश मिलेगा। कोरोना काल में अगर कोई बच्चा कोविड पॉजीटिव आ गया तो उसे 15 दिन तो सरकार ही आइसोलेट कर देती है। वहीं अभिभावक कोविड के भय से स्कूल भेजने को तैयार नहीं हुए तो उपस्थिति के लिए भी बोर्ड को विशेष छूट देनी पड़ेगी।
पढ़ाई फिर भी पूरी नहीं होगी, 90 फीसदी स्टूडेंट्स नहीं पहुंच रहे हैं मार्गदर्शन लेने : अगर स्कूल संचालकों का मानें तो 60 फीसदी पाठ्यक्रम पूरा करना भी अब मुश्किल होगा। दरअसल, बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं है। दसवीं बारहवीं कक्षा के बच्चों को मार्गदर्शन के लिए स्कूल आने की छूट थी लेकिन 90 फीसदी स्कूलों में कोई बच्चा मार्गदर्शन लेने नहीं आया।

^शिक्षक निरंतर स्कूल जा रहे हैं। राज्य सरकार को चाहिए कि 10वीं व 12वीं कक्षा के छात्रों की क्लास लगाने का पर विचार करें।
महेंद्र पांडे, महामंत्री, राजस्थान प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक संघ
^कोरोना संक्रमण की केस निरंतर बढ़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में भी मार्गदर्शन वाले बच्चों की संख्या भी नगण्य रही। ऐसे में दो नवम्बर से कक्षाएं शुरू होगी तो भी बच्चों को अभिभावक नहीं भेजेंगे।
रवि आचार्य, प्रदेश मंत्री, शिक्षक संघ राष्ट्रीय

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