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  • 77% Of Parents Said Society's Pressure And Frustration Of Not Being Able To Fix Marriage Increased The Tendency To Walk On The Wrong Path, 90% Said Now The Harshest Punishment Should Be Given To Stop Copying In The Exam

भास्कर सर्वे:77% पेरेंट्स बोले- सोसाइटी का प्रेशर और शादी तय न हो पाने की कुंठा से गलत रास्ते पर चलने की प्रवृत्ति बढ़ी

बीकानेर2 महीने पहलेलेखक: दिलीपसिंह पंवार
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डॉ. गौरव बिस्सा, डॉ नवीन शर्मा। - Dainik Bhaskar
डॉ. गौरव बिस्सा, डॉ नवीन शर्मा।
  • 90% ने कहा- एग्जाम में नकल रोकने के लिए अब कठोरतम सजा दी जाए
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल के बढ़ते प्रकरणों पर प्रदेशभर में 400 से अधिक पेरेंट्स-स्टूडेंट्स से पूछे सवाल

सब कुछ एक साथ पा लेने का जुनून, कंपटीशन एग्जाम में कैलेंडर न होना, बढ़ती बेरोजगारी, माता पिता की बढ़ती अपेक्षाएं, कोचिंग संस्थानों द्वारा रिजल्ट को बेस्ट बनाने के प्रयास में नकल के मामले बढ़ रहे हैं। नीट, एसआई, रीट आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सरकार का पूरा सिस्टम उतर आया, लेकिन पूरी तरह नकल नहीं रोक सके। सफलता पाने के लिए अभ्यर्थी अब किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

अनुचित तरीकों से परीक्षा में सफलता पाने की बढ़ती प्रवृत्ति से मेधावी युवा मायूस हैं। उनमें डिप्रेशन और तनाव बढ़ रहा है। पिछले दिनों नीट से रीट तक हुई परीक्षाओं में पेपर आउट होने पर दैनिक भास्कर ने बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव बिस्सा और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन शर्मा के साथ प्रदेश के 429 प्रतिभागियों और पेरेंट्स का सर्वे किया।

कंपटीशन एग्जाम में नकल रोकने और नकल के सामाजिक प्रभाव पर अब तक पहली बार भास्कर ने कराया सर्वे

  • 79% लोगों का मानना है कि नकल की बढ़ती प्रवृत्तियों के चलते मेहनतकश युवाओं में डिप्रेशन, तनाव और मानसिक अस्थिरता बढ़ रही है।
  • 77%ने बताया कि परीक्षाओं के समय पर न होने से माता पिता और समाज का दबाव, वैवाहिक रिश्ता न हो पाने की कुंठा भी नकल करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है।
  • 81% के मुताबिक प्रश्न पत्र का विश्लेषणात्मक न होना, सोच और समझ की टेस्टिंग करने वाले प्रश्नों का अभाव होना भी एक कारण।
  • 54% को सिस्टम की कार्यप्रणाली पर ही विश्वास नहीं है।
  • 73% प्रतिभागियों के अनुसार पेपर सैटर्स को लगता है कि तथ्यात्मक प्रश्न पूछकर वे अनावश्यक लीगल मैटर्स में नहीं उलझेंगे।
  • 90% ने कहा-नकल कराने वाले गिरोह और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।
  • 78% के अनुसार, परीक्षा केन्द्रों पर आब्जर्वर, केन्द्राधीक्षक और इन्विजिलेटर सरकारी कर्मचारी हों।
  • 85% ने माना, पेपर छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस बदलते रहना चाहिए। रिजर्व प्रश्नपत्रों का निर्माण, इन्टरनेट की स्पीड को स्लो डाउन करना तथा परीक्षा केन्द्रों पर ब्लूटूथ डिटेक्शन यंत्र लगे।
  • 89% ने माना है कि पोर्टेबल मोबाइल नेटवर्क जैमर के उपयोग से एक क्षेत्र विशेष के सभी मोबाइल नेटवर्क बंद किए जा सकते हैं।
  • 74% ने कहा, यदि संभव हो तो महिलाओं के परीक्षा केंद्र अलग बनाए जाएं। एेसे सेंटर पर आब्जर्वर, केन्द्राधीक्षक और इन्विजिलेटर महिलाएं ही हों ताकि महिला अभ्यर्थियों की तलाशी और निगरानी अच्छे से हो।
  • 91% ने कहा, कोचिंग संस्थानों के एक्रीडिटेशन के लिए नियामक आयोग बने, ताकि नकल गैंग चलाने वाले कोचिंग सेंटर्स पर अंकुश लगे।

समाधान: रेटिना स्कैनिंग डिवाइस व बायोमैट्रिक से रोक सकते हैं नकल
पोर्टेबल रेटिना स्कैनिंग डिवाइसेज से नकल रोका जा सकता है। मनुष्य की आंख के रेटिना का रंग चेंज नहीं हो सकता। साथ ही बायोमैट्रिक मशीन का इस्तेमाल हो सकता है।

ऐसे हुआ सर्वे: 429 लोगों को लेकर किए गए शोध में प्रतिभागियों से प्रश्नावली भरवाई गई। प्राप्त आंकड़ों का सांख्यिकी टेस्ट किया।

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