नगर निगम:हर दिन तैयार होती हैं 8 डाक, 5 माह से एक भी जयपुर नहीं गई, महापौर-आयुक्त विवाद के पत्र भी अटके

बीकानेरएक वर्ष पहले
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  • रिसिप्ट डिस्पेच अनुभाग अधिकारी और बाबू को नोटिस, महापौर ने बैठाई जांच कमेटी

सरकारी महकमों में काफी समय से ई मेल और वाट्सअप से पत्राचार होने लगे हैं। लेकिन डाक विभाग के माध्यम से सरकारी डाक भेजने की परंपरा अब भी कायम है। डाक से आये पत्र को आज भी महत्वपूर्ण समझा जाता है। लेकिन नगर निगम में यह व्यवस्था पिछले 5 महीने से ठप पड़ी है।

नगर निगम में पांच महीने से डाक से पत्र भेजने का काम बंद है। हाल ही में जब इसका खुलासा हुआ तो महापौर सहित अफसरों की नींद उड़ गई। दरअसल निगम हेल्पलाइन सेंटर में रिसिप्ट डिस्पेच का भी काम होता है। निगम से स्वायत्त शासन विभाग सहित अन्य निगम और सरकारी विभागों को पत्र लिखे जाते हैं या उनकी प्रतियां भेजी जाती है। लेकिन यह सभी पत्र इनके ठिकानों पर भेजने के बजाय एक अलमारी में बन्द हैं।

निगम में हर दिन सात आठ डाक बाहर भेजी जाती है। इनमें महापौर और आयुक्त के बीच विवाद को चले लेटर वार के भी पत्र थे। उनकी प्रतियां डीएलबी को भेजी जानी थी। हालांकि मेल के जरिए पत्र भेजे जा चुके हैं। लेकिन डाक की सरकारी व्यवस्था 5 महीने से ठप पड़ी है।

महापौर ने जब कर्मचारियों से पूछताछ की तो मामले का खुलासा हुआ। इस लापरवाही के लिए रिसिप्ट डिस्पेच बाबू और अनुभाग प्रभारी को नोटिस जारी किए गए हैं। महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित ने कनिष्ठ लेखाकार राजेन्द्र राय, वरिष्ठ लिपिक प्रतीक झा और प्रेम तंवर को प्रकरण की जांच कर सभी डाक की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।

  • डाक नहीं भेजने का मामला हाल ही में संज्ञान में आया है। इसकी जांच बैठा दी गई है। दोषी कर्मचारी और अनुभाग अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। - सुशीला कंवर राजपुरोहित, महापौर
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