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आरटीई:प्री-प्राइमरी को आरटीई से बाहर करने से कम हुए 85 हजार छात्र, रिफंड बचेगा सरकार का

बीकानेर8 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • नए सेशन में 1.10 लाख स्टूडेंट्स को मिला फ्री एडमिशन, पिछले साल यह संख्या 1.95 लाख रही थी
  • कोरोना के चलते प्राइवेट स्कूलों की पहली क्लास में नॉन आरटीई के प्रवेश भी कम हुए

(दिलीप सिंह पंवार) प्री-प्राइमरी कक्षाओं को राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के दायरे से बाहर करने का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ा है। निशुल्क प्रवेश के नियम बदलने से पिछले साल के मुकाबले 2020-21 में 85 हजार एडमिशन कम हुए हैं। शिक्षा सत्र 2019-20 में आरटीई के तहत 1.95 लाख बच्चों को निशुल्क प्रवेश मिला था, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 1.10 लाख रह गई।

प्राइवेट स्कूलों में क्लास फर्स्ट में भी नए प्रवेश कम होने से इस बार निशुल्क प्रवेश की संख्या भी घटी है। प्री प्राइमरी एडमिशन हटाने से राज्य सरकार के पास 85 हजार बच्चों का रिफंड भी बच गया है। वंचित रहे स्टूडेंट्स के अभिभावकों को प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन के लिए अब अगले साल तक इंतजार करना होगा।

पहले जहां प्री-प्राइमरी कक्षा में निशुल्क प्रवेश के लिए 3 से 6 साल के छात्र आवेदन के पात्र थे। वहीं अब नियम बदलने से फर्स्ट क्लास में फ्री एडमिशन के लिए 5 से 7 साल के बच्चे ही आवेदन कर पाएंगे। प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए उन स्टूडेंट्स को प्राथमिकता दी जाती है, जो संबंधित वार्ड के निवासी हैं। यदि ऐसे आवेदनों की संख्या उपलब्ध सीटों से कम हो तो अन्य वार्ड के बच्चों को उनकी वरीयता के आधार पर प्रवेश का भी प्रावधान किया गया है।

नए नियम के कारण...इस साल हुए सबसे कम एडमिशन
पिछले चार सालों की तुलना की जाए तो इस साल सबसे कम एडमिशन आरटीई के तहत हुए हैं। 2017-18 में 1.17 लाख प्रवेश हुए थे। इसके बाद लगातार दो साल तक ग्राफ बढ़ा। इस साल आंकड़ा गिरकर 1.10 लाख तक पहुंच गया। 31,038 प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क एडमिशन के लिए 8.40 लाख आवेदन आए थे।

कोरोना में नॉन आरटीई एडमिशन भी हुए कम
कोरोना के चलते प्राइवेट स्कूलों की पहली क्लास में नॉन आरटीई के प्रवेश भी कम हुए। प्राइवेट स्कूलों में अधिकतर नए प्रवेश प्री-प्राइमरी कक्षा में ही ज्यादा होते हैं। हालांकि इस बार निशुल्क प्रवेश के तहत अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है।

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