भास्कर एक्सक्लूसिव:लेह के बाद अब थार में पश्चिमी सीमा पर पाक से हिफाजत करेगी ‘के-9 वज्र होवित्जर’ तोप

बीकानेरएक वर्ष पहले
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महाजन रेंज में ट्रेनिंग के दौरान के9 वज्र की मारक क्षमता को परखा। - Dainik Bhaskar
महाजन रेंज में ट्रेनिंग के दौरान के9 वज्र की मारक क्षमता को परखा।

लेह की बर्फीली पहाड़ियों के बाद के9 वज्र होवित्जर तोप अब राजस्थान की पश्चिमी सरहद की रक्षा भी करेगी। सेना ने थार में वज्र की मारक क्षमता को परखा है। सप्त शक्ति कमांड के तहत एशिया की सबसे बड़ी ट्रेनिंग नोड महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में पिछले कई दिनों से के9 वज्र होवित्जर को आजमाया जा रहा है।

सेना की आर्मर्ड, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी और एयरफोर्स की इंटीग्रेटेड फायरिंग ट्रेनिंग के दौरान वज्र ने टारगेट पर सटीक निशाने साधकर साबित कर दिया है कि दुश्मन को 40 किमी दूर से ही नेस्तनाबूत किया जा सकता है। अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित होने के कारण सेना ने इसे अब तक की सबसे बेहतरीन तोप माना है।

इससे पहले वज्र का दो बार थार में परीक्षण हो चुका है। के9 वज्र लद्दाख में चीन और राजस्थान में पाकिस्तान के पसीने छुड़ाएगी। एलएंडटी ने सेना को 100 के-9 वज्र-टी स्वचालित तोप की सप्लाई की हैं, जिन्हें अलग-अलग रेजीमेंटों में तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सरहद पर के9 की तैनाती इसलिए

राजस्थान की पश्चिमी सरहद पर के9 वज्र होवित्जर तोप की तैनाती काफी अहम मानी जा रही है। सीमा के सामने 50 से 70 किमी देर पाक का बहावलपुर जिला है, जहां पाक आर्मी की 31 कोर का हेडक्वार्टर और एयरबेस है। यहीं पर पाक का परमाणु केंद्र भी बताया जा रहा है।

इसके अलावा आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का कैंप होने के भी संकेत हैं। जम्मू कश्मीर के बाद पश्चिमी सरहद पर घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं। मादक पदार्थों की तस्करी के जरिए पाक भारत में नारको टेरेरिज्म फैलाने की कोशिश भी कर रहा है।

बोफोर्स तोप कांड के बाद से थमी थी भारी आर्टिलरी की खरीद : भारतीय सेना में बोफोर्स तोप कांड के बाद साल 1986 से कोई भारी आर्टिलरी शामिल नहीं की गई थी, इस लिहाज से 100 के-9 वज्र-टी तोपों को सेना में शामिल किया जाना बेहद अहम माना जा रहा है।

तोप की खासियत

दक्षिण कोरियाई हॉवित्जर के-9 थंडर का भारतीय संस्करण है के-9 वज्र स्वचालित तोप। }38-40 किमी की मारक क्षमता वाली के-9 जीरो रेडियस पर चारों तरफ घूमकर करती है वार। } क्रू को रासायनिक हमलों से बचाने में सक्षम।

मेक इन इंडिया से निर्माण, 80% स्वदेशी

  • दक्षिण कोरियाई कंपनी हान्वा टेकविन ने दी तकनीक, एलएंडटी ने किया निर्माण।
  • मई, 2017 में रक्षा मंत्रालय ने वैश्विक बोली के जरिये दिया था एलएंडटी को 4500 करोड़ रुपए में 100 के-9 वज्र बनाने का ऑर्डर।
  • गुजरात के हजीरा में इसके लिए जनवरी, 2018 में शुरू की गई निर्माण इकाई।
  • नवंबर, 2018 में भारतीय सेना में शामिल की गई थी पहली के-9 वज्र हॉवित्जर।
  • 80 फीसदी स्वदेशी कार्य पैकेज के निर्माण में 1000 एमएसएमई कंपनियों ने बनाए पुर्जे।
  • 13000 से ज्यादा पुर्जे हर तोप के लिए चार राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु में बनाए गए।
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