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बेरोजगारों के लिए छोड़ दी 15 लाख की जॉब:आईआईटीयन नौकरी छोड़ युवाओं को दे रहे ट्रेनिंग, आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना भी किया कैंसल

बीकानेरएक महीने पहले

कोरोना की पहली लहर में लॉकडाउन के कारण ज्यादातर लोग 'वर्क फ्रॉम होम' करने लगे। समाजसेवी कोविड संक्रमितों के घर और अस्पताल में फूड पैकेट्स पहुंचाकर मदद कर रहे थे। ऐसा ही एक ग्रुप बीकानेर में भी काम कर रहा था। यहां प्रद्युमन सिंह ने आईआईटीयन फ्रेंड्स के साथ मिलकर लोगों की मदद में जुटे थे। कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के बाद सभी आईआईटीयन फ्रेंड्स वापस जॉब पर लौट गए हैं, लेकिन प्रद्युमन वापस जॉब पर नहीं गए। बीकानेर में ही रुक गए।

प्रद्युमन सिंह का कहना है कि कोरोना काल में उसने बीकानेर के बेरोजगारों को नजदीक से देखा है, इसलिए अब उनको जॉब दिलाने के लिए काम करेंगे। ऐसे में ये आईआईटीयन इन दिनों अपनी 15 लाख की नौकरी छोड़कर बीकानेर के बेरोजगारों को रोजगार दिलाने में जुटे हैं।

प्रद्युमन सिंह ने बीकानेर के पुरानी गिन्नाणी क्षेत्र में एक सेंटर शुरू किया है। यहां बेरोजगार युवाओं को अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर की फ्री ट्रेनिंग दी जा रही है। महिलाओं को सिलाई ट्रेनिंग दी जा रही है। यह ट्रेनिंग निशुल्क दी जा रही है। देश की बड़ी कंपनियों से संपर्क किया जा रहा है ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। इनमें कंपनियों को अकाउंटेंट उपलब्ध कराने की बात की जा रही है। रेडिमेड कपड़ों को बेचने वाली कंपनियों से महिलाओं के लिए ऑर्डर लिए जा रहे हैं। ऑर्डर का पूरा पैसा इन महिलाओं के खातों में डाला जाएगा।

बड़ी कंपनियों का सपोर्ट
बीकानेर के प्रद्युमन सिंह ने अपने अन्य आईआईटीयन फ्रेंड्स के साथ मिलकर स्टार्क नाम से एक फाउंडेशन बनाया है। ये फाउंडेशन बड़ी कंपनियों से संपर्क करता है। अब तक टैली और सिंगर कंपनी से इनके एग्रीमेंट हो गए हैं। टैली ने अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने के साथ ही इन्हें सर्टिफिकेट देने का निर्णय किया है। सिंगर सिलाई मशीन कंपनी ने अपनी तरफ से कुछ मशीनें उपलब्ध कराई है। इन्हीं मशीनों पर महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रद्युमन का कहना है कि जल्द ही बड़ी कंपनियों से कपड़े बनाने का ऑर्डर मिलना शुरू हो जाएगा। महिलाओं को रोजगार मिल जाएगा। फिर ये अपने घर में ही ऑर्डर के आधार पर काम करके कमाई कर सकेंगी।

अमेरिका में करना चाहते थे पढ़ाई
प्रद्युमन का चयन अमेरिका की एक युनिवर्सिटी में फाइनेंशियल इंजीनियरिंग के लिए हो गया था। प्रद्युमन चाहते तो अमेरिका जाकर मास्टर डिग्री कर सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने देश के युवाओं के लिए कुछ करना था। वाराणसी से आईआईटी प्रद्युमन चाहता हैं कि यूथ को उसकी योग्यता के अनुरूप काम मिले।

युवाओं को दी जा रही ट्रेनिंग।
युवाओं को दी जा रही ट्रेनिंग।

हर एक फ्रेंड जरूरी होता है
प्रद्युमन ने बताया कि उनके आईआईटीयन फ्रेंड्स वापस जॉब के लिए जरूर चले गए, लेकिन सोशल जिम्मेदारी के तहत वे सभी फाउंडेशन में काम कर रहे हैं। मोहित खत्री, प्रमेंद्र चतुर्वेदी, अंकिता शुक्ला और समर हल्देर उसका सहयोग करते हैं। इनको अलग-अलग जिम्मेदारी दी हुई है। कोई कंपनी से कॉर्डिनेट करके ट्रेनिंग फेसिलिटी की व्यवस्था कर रहा है, कोई बड़ी कंपनियों से जॉब लेने में जुटा है तो कोई लाइजनिंग व अकाउंटिंग काम देख रहे हैं। फंडिंग, प्रोजेक्ट डिजाइनिंग व पब्लिक रिलेशनशिप का काम अलग-अलग फ्रेंड्स को दिया गया है।

ऐसे होता है बेरोजगार का चयन
अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग के लिए ऑनलाइन फार्म भरवाए गए। फिर सभी को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। जो अकाउंट्स समझ रहे थे, जरूरतमंद थे, उनका चयन किया गया। पहले बैच में करीब 20 स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी तरह सिलाई के लिए भी जरूरतमंद महिलाओं का चयन किया गया।

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