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ग्राउंड रिपोर्ट:बारिश में फिर डूबेगा बीकानेर, वजह- 12 नालों का हाल देखा सब जगह लापरवाही का मलबा

बीकानेर25 दिन पहले
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चाैखूंटी पुलिया के पास प्रताप बस्ती के इस नाले की सफाई भी नहीं हाे पाई है। जबकि यह नाला निगम की प्राथमिकता में शाामिल है। यह नाला पुलिया के दूसरी तरफ भी जाम पड़ा है। - Dainik Bhaskar
चाैखूंटी पुलिया के पास प्रताप बस्ती के इस नाले की सफाई भी नहीं हाे पाई है। जबकि यह नाला निगम की प्राथमिकता में शाामिल है। यह नाला पुलिया के दूसरी तरफ भी जाम पड़ा है।
  • भास्कर टीम ने 20 किमी घूमकर नाला सफाई की पड़ताल की....निगम के दावे खोखले निकले

बारिश में हर साल बीकानेर के कई इलाके डूबने की स्थिति में आ जाते हैं। नगर निगम हर बार अच्छी सफाई का दावा भी करता है। अभी मानसून में डेढ़ महीने का समय है। नगर निगम ने फिर नालों की सफाई का अभियान शुरू किया है। एक महीने के इस अभियान को 10 दिन बीत चुके हैं। दावा किया जा रहा कि 10 दिन में 18 वार्ड के हिस्से में आने वाले नालों की सफाई हो चुकी है।

पुराने हालात इस बार न बनें, इसलिए भास्कर ने बारिश से पूर्व ही निगम के सफाई अभियान की पड़ताल की, ताकि समय रहते सिस्टम को अलर्ट किया जा सके। भास्कर टीम ने शहर के प्रमुख 12 नालों पर पहुंचकर हकीकत जानी। सुजानदेसर के खुदखुदा नाले से लेकर बल्लभ गार्डन तक करीब 20 किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे किया। लेकिन नालों की सफाई नजर नहीं आई। नालों में अब भी सिल्ट जमा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार फिर बारिश में क्या हालात होंगे।

सफाई का कड़वा सच : जेसीबी का पंजा जहां तक जाता है वहीं तक होती है नालों की सफाई
निगम ने पहले चरण में पुलिस लाइन, पुरानी गिन्नाणी, सैटेलाइट हॉस्पिटल, प्रताप बस्ती, खुदखुदा और रेलवे स्टेशन के पीछे गैस गोदाम के पास वाला नाला सफाई के लिए चुना है। लेकिन जहां तक जेसीबी मशीन का पंजा जाता है, वहीं तक सफाई हो पा रही है। जहां से नाला कवर है उसके नीचे भारी मात्रा में सिल्ट जमा है।

ऐसे में बारिश का पानी आगे कैसे जाएगा, यह बड़ा सवाल है। उधर, निगम के स्वास्थ्य अधिकारी ओमप्रकाश का दावा है कि दस दिन में 18 वार्ड कवर किए हैं। मैनुअल सफाई के लिए 90 श्रमिक भी ठेके पर लगाए हैं। सफाई सुबह पांच घंटे और शाम को तीन घंटे हो रही है।

भास्कर बता रहा शहर के दो प्रमुख सबसे बड़े नालों का हाल-

पूरे शहर का ड्रेनेज जिन दो बड़े नालों से जुड़ा है, उसमें जगह-जगह सिल्ट जमा है, सफाई का नामो निशान नहीं

  • 1. पूर्व विधानसभा क्षेत्र में सोहन कोठी से लेकर पीबीएम हॉस्पिटल, आदर्श कॉलोनी, रानी बाजार पुल, डुप्लेक्स कॉलोनी से पवनपुरी होकर बल्लभ गार्डन तक करीब आठ किलोमीटर लंबे इस नाले की सफाई दो साल पहले हुई थी। वर्ष 2019 में निगम ने चार करोड़ के टेंडर किए थे, जिसमें सोहन कोठी के अलावा पुलिस लाइन, एमएन हॉस्पिटल, सदर थाने के पीछे वाला नाला भी शामिल था। हालांकि सफाई पर सवा करोड़ ही खर्च हो पाए क्योंकि अतिक्रमण के कारण कुछ जगहों पर सफाई नहीं हो पाई। उस दौरान नालों की सफाई के लिए सदर थाने के पीछे, पीबीएम हॉस्पिटल परिसर, रानी बाजार पुल और फोर्ट डिस्पेंसरी के पास पॉइंट भी बनाए गए थे। बारिश के पानी की निकासी इन्हीं नालों के जरिए होती है। टीम को इस नाले के सभी पाॅइंट्स पर कहीं सफाई नजर नहीं आई। जगह-जगह सिल्ट भरी हुई थी।
  • 2. पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 3.15 किमी लंबे नाले का काम अधूरा : दशनाम गोस्वामी मोहल्ला से छोटा रानी बास तक करीब 3.15 किलोमीटर लंबा यह नाला पुराने शहर के 17 वार्डों को कवर करता है। इसी नाले से इन 17 वार्डों का ड्रेनेज सिस्टम जुड़ा है। दो साल पहले नाले की मरम्मत के लिए डेढ़ करोड़ मिले थे, लेकिन कोविड के कारण काम बीच में ही रुक गया। इसमें 12 जगह पुलिया बनाए जाने थे। आरसीसी का काम भी बाकी पड़ा है। नाले में करीब 200 पीपल के पेड़ हैं। इन पेड़ों को हटाना भी नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती है।

मेयर सुशीला राजपुरोहित से सवाल जवाब

Q- बारिश में हर साल बीकानेर के कई इलाके डूबते हैं, इस बार आपने क्या अलग किया है, जिससे पुराने हालात नहीं बनें? A- नालों की सफाई के लिए एक महीने का अभियान शुरू किया है। शहर के सभी नालों की सफाई कराई जाएगी।

Q- आपने अब तक कितने नाले देखे। क्या नजर आया? A- मैंने तीन नाले देखे हैं, जिनमें 56 नंबर वार्ड में प्रताप बस्ती के नाले की स्थिति बहुत खराब है। यह यूआईटी का नाला है। लोगों ने नाले पर घर बना लिए हैं। नाले को मैनुअल साफ कराने के प्रयास हैं।

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