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बीकानेर एक्सप्रेस हादसे के पीड़ित बोले:ब्रेक लगते ही तेज धमाका, ऐसा लगा भूकंप आ गया; दो बार कोच पलटा, ऊपर बैठे लोग नीचे गिरे

बीकानेर9 महीने पहले

बीकानेर से 11 जनवरी की देर रात पौने दो बजे गुवाहाटी के लिए रवाना हुई बीकानेर एक्सप्रेस गुरुवार शाम 5 बजे पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी और मैनागुड़ी के बीच पटरी से उतर गई। NWR पीआरओ शशिकिरण के मुताबिक, ट्रेन में 308 यात्री बीकानेर से और 564 जयपुर से सवार हुए थे।

दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने ट्रेन में सवार साधासर (बीकानेर) के दो यात्री फूसाराम बिजारणियां और दुर्गाराम सिद्ध से बात की। उन्होंने बताया कि शाम का समय था और लंबे सफर की वजह से लोग थक चुके थे। हम दोनों कोच नंबर डी-4 में बैठे थे। अचानक तेज धमाका हुआ। ऐसा लगा मानो भूकंप आ गया हो। कुछ ही क्षण में ऊपर बैठे पैसेंजर नीचे आ गिरे। सामान भी गिरने लगा। हमारा कोच दो बार पलटी खाकर रुक गया। हम समझ गए थे कि बड़ा हादसा हुआ है। हम दोनों किसी तरह उठकर बाहर निकले। बाहर आकर देखा तो नजारा दर्दनाक था। कुछ कोच पटरी से उतर गए थे तो कुछ एक-दूसरे के ऊपर चढ़े हुए थे। प्रभावित डिब्बों में करीब 100 से ज्यादा लोग फंसे थे। जो यात्री बच गए, उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जिन लोगों की मौत हुई, वे भी हमारे आसपास के कोच के थे।

ट्रेन के इसी डिब्बे में सवार यात्रियों की मौत हुई। पास के डिब्बों में सवार यात्रियों का कहना है कि अचानक तेज धमाका हुआ। ऐसा लगा मानो भूकंप आ गया हो।
ट्रेन के इसी डिब्बे में सवार यात्रियों की मौत हुई। पास के डिब्बों में सवार यात्रियों का कहना है कि अचानक तेज धमाका हुआ। ऐसा लगा मानो भूकंप आ गया हो।

अचानक ब्रेक लगाने से हुई घटना
ये हादसा कैसे हुआ? यह अभी जांच का विषय है। गाड़ी में सवार यात्रियों का कहना है कि अचानक ब्रेक लगाने से यह हादसा हुआ। बिजारणियां ने बताया कि तीन बार ब्रेक लगाया गया। ऐसे में इंजन खड़ा हो गया। पीछे वाले डिब्बे रुके नहीं, बल्कि उसी स्पीड से दौड़ते रहे। आगे के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए। इसके बाद के डिब्बे खड़े रहे, लेकिन उसके पीछे के डिब्बे पटरी पर खड़े डिब्बों पर चढ़ गए।

प्रभावित डिब्बों में करीब 100 से ज्यादा लोग फंसे थे। गनीमत रही कि राहत कार्य भी बहुत जल्दी शुरू हो गया, क्योंकि महज एक किलोमीटर दूर ही रेलवे स्टेशन था।
प्रभावित डिब्बों में करीब 100 से ज्यादा लोग फंसे थे। गनीमत रही कि राहत कार्य भी बहुत जल्दी शुरू हो गया, क्योंकि महज एक किलोमीटर दूर ही रेलवे स्टेशन था।

मदद की जरूरत थी
फूसाराम बिजारणियां एवं दुर्गनाथ सिद्ध ने अपने सामान की चिंता किए बिना कई लोगों को बाहर निकाला। बड़ी संख्या में सामान भी उन डिब्बों से बाहर निकाला, जो दूसरे डिब्बों पर चढ़ चुके थे। बिजारणियां कहते हैं- महिलाएं और बच्चे बहुत ज्यादा घबरा गए थे। जहां हादसा हुआ, उससे कुछ दूरी पर ही सड़क थी। बड़ी संख्या में आसपास के लोग वहां पहुंच गए। उन्होंने भी बिना किसी सरकारी सहायता का इंतजार किए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू कर दिया।

मजदूरी पर निकले हैं दोनों दोस्त
साधासर के फूसाराम बिजारणियां एवं दुर्गनाथ सिद्ध गुवाहाटी में सड़क बनाने वाले नोखा के एक ठेकेदार के साथ काम करते हैं। इसी काम को देखने के लिए जा रहे थे। वहां सड़क निर्माण में बीकानेर के ठेकेदार व मजदूर काम कर रहे हैं। ज्यादा नोखा व आसपास के गांवों से हैं।

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