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कौन देगा जीवन ?:कालाबाजारी के भय से उखड़ रही है निजी अस्पतालों में सांसें, गिन-गिनकर दे रहे हैं सिलेंडर, उसमें भी लेटलतीफी है हावी

बीकानेर13 दिन पहले
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पीबीएम अस्पताल का कोविड वार्ड जहां ऑक्सीजन की कमी नहीं है। - Dainik Bhaskar
पीबीएम अस्पताल का कोविड वार्ड जहां ऑक्सीजन की कमी नहीं है।

बीकानेर में कोरोना से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच ऑक्सीजन की कमी ने इस समस्या को और ज्यादा भयावह बना दिया है। खास बात यह है कि संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल की ऑक्सीजन व्यवस्था पर तो प्रशासन की पूरी नजर है लेकिन निजी अस्पतालों में कालाबाजारी के भय से ऑक्सीजन जरूरत से कम दी जा रही है। ऐसे में रोगी को कंजूसी के साथ ऑक्सीजन देने के मामले सामने आ रहे हैं। निजी अस्पतालों में रोगियों की कोरोना से मौत भी हो रही है, जो सरकारी रिकार्ड में नहीं जोड़ी जा रही।

इन अधिकारियों के बीच घूमती है ऑक्सीजन अप्रुवल

जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन देने के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक के अलावा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और दवा नियंत्रक को शामिल किया है। इन तीन अधिकारियों की अप्रुवल के बाद ही ऑक्सीजन मिल पाती है। अगर रोगी अस्पताल में भर्ती नहीं है तो उसे ऑक्सीजन के लिए सबसे पहले अपने चिकित्सक से लिखवाना होगा। चिकित्सक की उस पर्ची को संयुक्त निदेशक को भेजना पड़ता है। जो यह देखते हैं कि रोगी को ऑक्सीजन की जरूरत है या नहीं। वो इस पर्ची को सोशल मीडिया से ही जिला परिषद के सीईओओ को भेजते हैं। जहां से स्वीकृति मिलने पर सोशल मीडिया से ही दवा नियंत्रक को भेजा जाता है। यहां तक का सफर सिर्फ सोशल मीडिया से भेजने का है तो दस मिनट लगने चाहिए लेकिन एक दिन भी लग जाता है। खासकर जिला परिषद् सीईओ से दवा नियंत्रक और दवा नियंत्रक से ऑक्सीजन सप्लायर तक संदेश पहुंचने में घंटों बीत जाते हैं। ऐसे में घर पर ऑक्सीजन ले रहे मरीज इंतजार ही करते रहते हैं।

गैर कोविड रोगी परेशान

जिन रोगियों को अब तक कोरोना नहीं हुआ है लेकिन पैरालेसिस सहित अन्य बीमारियों के कारण अगर ऑक्सीजन लेवल कम हो गया है तो भी उसे उपरोक्त प्रक्रिया से ही गुजरना पड़ेगा। ऑक्सीजन की कमी से पहले इन रोगियों को बहुत आसानी से सिलेंडर सुलभ हो रहे थे लेकिन अब राशनिंग होने के साथ ही सांस उखड़ने लगी है।

निजी अस्पताल में जरूरत पूरी नहीं

प्रशासन को आशंका है कि कुछ निजी अस्पताल ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी कर सकते हैं। ऐसे में जरूरत से आधे सिलेंडर भी नहीं दिए जा रहे हैं। जिन निजी अस्पतालों ने पिछले दिनों पचास सिलेंडर मांगे थे, उन्हें महज पंद्रह सिलेंडर दिए गए। प्रशासन अस्पताल प्रशासन के उन पत्रों का भरोसा ही नहीं कर रहे हैं, जिसमें रोगी के नाम ऑक्सीजन लेवल की जरूरत का जिक्र किया गया है। दरअसल, इसे तय करने वाले गैर चिकित्सीय अधिकारी है। पिछले दिनों बीकानेर के कई निजी अस्पतालों में रोगियों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है। एक अस्पताल के हेल्पडेस्क प्रभारी ने बताया कि उसके यहां 42 सिलेंडर की जरूरत है लेकिन महज पंद्रह दिए गए हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि प्रशासन कभी भी आकर इनकी जांच कर सकता है। हिसाब ले सकता है। अपने अधिकारी को यहां लगा सकते हैं लेकिन मांग के अनुरूप सिलेंडर तो दें।

पीबीएम में कमी नहीं

अच्छी बात है कि बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। यहां 1400 सिलेंडर प्रतिदिन की जरूरत रविवार तक थी, जो पूरी हो रही है। यह मांग लगातार बढ़ रही है। बीकानेर में कोरोना संक्रमितों में बीस फीसदी को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, वहीं पांच फीसदी ऐसे भी है, जिन्हें चौबीस घंटे ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।

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