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बीकानेर की राहत का काउंटडाउन शुरू-4 दिन शेष:आज राजस्थान पहुंच जाएगा नहर का पानी, कल कंवरसेन लिफ्ट में छूटेगा

बीकानेर25 दिन पहले
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हरिके बैराज से शुक्रवार को इंदिरा गांधी नहर में छोड़ा गया पानी रविवार सुबह 7 बजे तक राजस्थान सीमा तक पहुंचेगा। एक जून की सुबह बिरधवाल हेड तक आने की संभावना है। एक जून को ही बिरधवाल हैड से कंवरसेन लिफ्ट में पानी छोड़ा जाएगा। माना जा रहा है कि 2 जून की रात या 3 जून की सुबह तक बीछवाल जलाशय में पानी पहुंच जाएगा।

इंदिरा गांधी नहर अभियंताओं ने जलदाय विभाग को आगाह किया है कि बीकानेर पहुंचने से पहले ही पानी की सैंपलिंग की जाए ताकि पानी की गुणवत्ता का पता चल सके। यदि पानी में ज्यादा कचरा हो तो कुछ घंटे पानी जलाशय में ना लेकर कैचमेंट एरिया में छोड़ा जाए। जलदाय विभाग ने भी अभियंताओं की टीम तैयार कर दी है जो बिरधवाल हैड से पानी के साथ-साथ चलेगी और जगह-जगह पानी की सैंपलिंग होगी।

कंवरसेन लिफ्ट में जलदाय विभाग ने तीन जगह जालियां लगाई हैं ताकि कचरा जलाशय तक आने से पहले ही रोक लिया जाए। क्योंकि बीते वर्षों का अनुभव है कि जलाशय में कचरा आने से कई बार फिल्टर चोक हो चुका है। इससे पानी कम साफ होता है। यही गंदा पानी शहर में सप्लाई होने से उल्टी-दस्त के रोगी बढ़ जाते हैं। बीते वर्ष शोभासर जलाशय में दो बार फिल्टर चोक हो गया था।

दूसरी ओर, अब बीछवाल और शोभासर जलाशय का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। बीछवाल जलाशय में 2 जून तक ही पीने का पानी मुश्किल से उपलब्ध है। जलस्तर शोभासर का भी कम है लेकिन शोभासर जलाशय में सिल्ट सिर्फ 50 सेमी ही है। जबकि बीछवाल जलाशय में सवा मीटर के आसपास सिल्ट जमी है।

पारा 46 पार पर पानी की किल्लत बेशुमार: एक तरफ पानी की किल्लत बढ़ रही है तो दूसरी तरफ मांग भी बढ़ती जा रही है। अब इंसान से ज्यादा कूलर पानी पी रहे हैं। दिन-रात कूलर चल रहे हैं। एक कूलर प्रतिदिन औसत 40 से 50 लीटर पानी पी रहा है। इस वजह से हर घर में पानी की मांग दोगुनी हो गई है। दूसरी ओर जलदाय विभाग पानी की कमी से लगातार सप्लाई में कटौती करता जा रहा है।

अब शहर में एक से सवा घंटे ही जलापूर्ति हो रही है। इस वजह से पानी की किल्लत दिनोदिन बढ़ती जा रही है। जलदाय विभाग का कहना है कि आने वाले तीन-चार दिन संकट भरे हैं। जनता से अपील है कि वह पानी का कम से कम उपयोग करे।

इन इलाकों में भारी जल संकट: कसाइयों की बारी, हर्षों का चौक, बारह गुवाड़, उस्ता बारी, जनता प्याऊ, हरोलाई हनुमान मंदिर, डागा चौक, आसानियों का चौक, मोहल्ला चूनगरान, ब्रह्मपुरी, भट्टडों का चौक, रानीसर बास, रथखाना, धोबीधोरा, राज विलास, राम रहीम गली, गिन्नाणी डेरा, कुचीलपुरा, भुट्टा बास, पिंक मॉडल स्कूल क्षेत्र, बागवानों का मोहल्ला, फड़ बाजार, बांठिया स्कूल, चौपड़ा बाड़ी, हरिराम मन्दिर के पास, जिया बाई ढाणी, धोबी तलाई, परदेसियों की बगीची, सोहन कोठी, खरनाडा, सिटी कोतवाली के पास, छींपों का मोहल्ला, मदीना मस्जिद, खटीक मोहल्ला, लोहार मोहल्ला, आर्य मन्दिर के पास, प्रताप बस्ती, वाल्मिकी बस्ती, एमएम ग्राउंड के पास, नत्थूसर बास, मुरलीधर व्यास नगर, आचार्यों का चौक, बागड़ी मोहल्ला, गोपेश्वर बस्ती, खेतेश्वर बस्ती, लाल गुफा, ठंठेरा बाजार, शीतला गेट, चौधरी कॉलोनी, गुर्जर मोहल्ल्ला, भीमनगर, कैलाशपुरी, माजीसा का बास आदि क्षेत्रों में भारी जल संकट है। ज्यादातर इलाके टेल के हैं।

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