भास्‍कर इन्वेस्टिगेशन:चिरंजीवी योजना: महंगी जांच कराते हैं निजी अस्पताल, एक्सक्यूज-ये तो योजना में नहीं

बीकानेरएक महीने पहलेलेखक: जयभगवान उपाध्याय
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की महत्वाकांक्षी ‘चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े बीमा धारकों के साथ प्राइवेट हॉस्पिटल संचालक जमकर ठगी हाे रही है। - Dainik Bhaskar
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की महत्वाकांक्षी ‘चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े बीमा धारकों के साथ प्राइवेट हॉस्पिटल संचालक जमकर ठगी हाे रही है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की महत्वाकांक्षी ‘चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े बीमा धारकों के साथ प्राइवेट हॉस्पिटल संचालक जमकर ठगी हाे रही है। भर्ती होने से पहले और बाद में जांच के नाम पर मरीजों और उनके परिजनों से मोटी रकम ली जा रही है। मरीजों के साथ हो रही ठगी की जब भास्कर ने पड़ताल की तो चौकाने वाली तस्वीरें सामने आई। शहर की कई ऐसे प्राइवेट हॉस्पिटलों के बारे में पता चला जो इलाज के दौरान मरीज के परिजनों को सर्जिकल उपकरण और दवाइयां महंगी कीमत में बेचते हैं, लेकिन उनका बिल नहीं देते।

यहां तक की भर्ती होने से पहले और बाद में महंगी-महंगी जांचें करवाते हैं, लेकिन परिजनों को यह कहकर टरका देते हैं कि यह जांच और उपकरण चिरंजीवी योजना में शामिल नहीं है। जबकि नियमानुसार मरीज के हॉस्पिटल में भर्ती होने से पांच दिन पहले और छुट्टी मिलने के 15 दिन तक संपूर्ण इलाज और जांच निशुल्क करने का प्रावधान है। बीकानेर में फिलहाल सात हॉस्पिटल चिरंजीवी योजना से जुड़ी है। हैरानी की बात यह है कि ठगी के इस खेल में कोई भी हॉस्पिटल अछूती नहीं है, जिसकी शिकायत सीएमएचओ ऑफिस या कॉल सेंटर के नंबर 181 पर नहीं हुई हो। जिन मरीजों ने प्राइवेट हॉस्पिटल में हुई ठगी की शिकायत की है, उन्हें हॉस्पिटल द्वारा वसूली गई रकम वापस भी मिली है।

लेकिन जिन्हें योजना के बारे में जानकारी नहीं थी, वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। बीकानेर में पिछले एक साल में हैल्थ डिपार्टमेंट ने करीब दो लाख रुपए की राशि मरीजों को वापस लौटाई है, जिसे अवैध रूप से प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों ने मरीजों से वसूली थी। बीकानेर में एक मई 2021 से अब तक करीब पांच करोड़ रुपए का इलाज चिरंजीवी योजना के तहत मुफ्त किया जा चुका है, जिसमें प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल शामिल है। जिले में करीब 60 हजार लोग चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हैं।

अस्पतालों के अजीब बहाने-हमारे डॉक्टर चिरंजीवी योजना से नहीं जुड़े

बड़ा बाजार स्थित सुराणा मोहल्ले में रहने वाली सुशीला देवी को कोरोना होने पर रानी बाजार स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। लेकिन इन्हें कोरोना का इलाज चिरंजीवी योजना में शामिल नहीं होने का कहकर करीब 56 हजार रुपए हॉस्पिटल प्रशासन ने वसूल लिए। जब इसकी शिकायत सुशीला देवी के परिजनों ने 181 नंबर पर की तो उन्हें 56 हजार रुपए की राशि हॉस्पिटल को लौटानी पड़ी।

बंगलानगर निवासी संजय पारीक ने एक महिला मरीज को गजनेर रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था, लेकिन उन्होंने मरीज का चिरंजीवी योजना में इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने योजना में इलाज करने का कहकर इलाज शुरू किया। लेकिन इलाज के दौरान मरीज से 15 हजार रुपए ले लिए। संजय पारीक ने इसकी शिकायत चिरंजीवी योजना के पोर्टल पर की है, लेकिन उन्हें अभी तक 15 हजार रुपए की राशि अभी तक वापस नहीं मिली है। इंदिरा कॉलोनी निवासी विशाल को डेंगू होने पर माजीसा बास स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया, लेकिन हॉस्पिटल प्रशासन ने चिरंजीवी योजना में इलाज नहीं करने का अजीब बहाना निकाला। प्रशासन ने बोला हमारे यहां के डॉक्टर चिरंजीवी योजना से नहीं जुड़े हैं। जबकि योजना से डॉक्टर नहीं, बल्कि हॉस्पिटल जुड़े होते हैं। हॉस्पिटल प्रशासन ने इलाज के बाद परिजनों से 22475 रुपए वसूल लिए, जिसे शिकायत के बाद हॉस्पिटल को वापस लौटाने पड़े।

850 रुपए देकर जुड़ सकते हैं योजना से

13517298 कुल पंजीकृत लाभार्थी 1542710 कृषक (लघु और सीमांत) 76936 संविदाकर्मी (समस्त विभागों/ बोर्ड/निगम/ सरकारी कंपनी) 10489833 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) 1199 सामाजिक आर्थिक जनगणना के पात्र परिवार 298193 निराश्रित एवं असहाय परिवार

उपरोक्त सभी का बीमा निशुल्क किया जाता है। वहीं 850 रुपए चुकाकर योजना से जुडऩे वालों की संख्या 1108427 है।

बेड के नाम पर ठगी: सामान्य की जगह एसी वार्ड में रखते हैं, इसका पैसा मरीज जेब से चुकाते हैं
प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों के ठगी का जरिया बनी मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना में मरीजों को लूटने के नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। संचालक मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती करने से पहले और छुट्टी मिलने के बाद की जाने वाली जांचों के रुपए तो ले ही रहे हैं, उनके साथ बेड के नाम पर भी ठगी हो रही है। मरीज को सामान्य बेड के स्थान पर एसी बेड देकर प्रति दिन 2-3 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं। जबकि हॉस्पिटल संचालक अपनी पुनर्भरण राशि में सामान्य बेड की राशि जोड़ते हैं। यानी एक मरीज से बेड के दो बार रुपए वसूल कर लिए जाते हैं।

भास्कर Explainer- मेरे साथ ठगी हुई, मैं अपनी रकम वापस कैसे पाऊं
अगर आपसे या आपके किसी परिचित से चिरंजीवी योजना से जुड़ी हॉस्पिटल में भर्ती होने से पांच दिन पहले और छुट्टी मिलने के 15 दिन बाद तक किसी प्रकार का शुल्क लिया गया है तो वह नियमानुसार वापस लौटाया जाएगा। अगर हॉस्पिटल प्रशासन नहीं लौटा रहा हो तो इसकी शिकायत सीएमएचओ या टोल फ्री नंबर 181 पर करनी होगी। शिकायत करने के लिए इलाज के दौरान ली गई समस्त राशि के बिल आपके पास होने चाहिए। बीमाधारक का अगर कोई चिरंजीवी योजना से जुड़ी हॉस्पिटल के संचालक या डॉक्टर इलाज करने में आनाकानी करते हैं तो उसकी 181 पर शिकायत करें।

ये हॉस्पिटल योजना से जुड़े
आरोग्यम मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, एएसजी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, जीवन रक्षा हॉस्पिटल, कोठारी मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर, एमएन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, श्री कृष्णा एनएस एंड एमएस हॉस्पिटल तथा श्रीराम सुपर स्पेशियलिटी सर्जिकल सेंटर, एपेक्स हॉस्पिटल।

सख्त कार्रवाई करेंगे:CMHO
सीएमएचओ डॉ. बीएल मीणा ने बताया कि ऐसे मरीज इसकी शिकायत 181 टोल फ्री नंबर या सीएमएचओ ऑफिस में कर सकता है। उसकी शिकायत पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। एक ही हॉस्पिटल की बार-बार शिकायतें मिली तो उसे योजना से हटाने का प्रावधान भी है।

ये गंभीर है, जांच कराएंगे: डीएम
कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल ने कहा कि अगर प्राइवेट हॉस्पिटल मरीजों के साथ ठगी कर रहे हैं, तो कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी के साथ ठगी हुई हो तो वह सीधे मुझे या संबंधित विभाग को लिखित में शिकायत कर सकता है। मैं इसकी पूरी पड़ताल करवाऊंगा।

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