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राहत:जनआधार कार्ड बनाने में राशन कार्ड की अनिवार्यता खत्म, बीकानेर जिले में अब 4144 मामले वेटिंग में

बीकानेरएक महीने पहले
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अटल सेवा केंद्र के मुताबिक बीकानेर जिले में अब तक चार लाख 25 हजार 51 जनआधार कार्ड बने हैं, जिसमें 15 लाख 47 हजार 741 सदस्य जुड़े हुए हैं। - Dainik Bhaskar
अटल सेवा केंद्र के मुताबिक बीकानेर जिले में अब तक चार लाख 25 हजार 51 जनआधार कार्ड बने हैं, जिसमें 15 लाख 47 हजार 741 सदस्य जुड़े हुए हैं।
  • जिले में अब तक बन चुके हैं चार लाख 25 हजार 51 जनअाधार कार्ड

जनआधार कार्ड बनवाने वाले आवेदकाें काे राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब राशन कार्ड के अभाव में उनके आवेदन काे खारिज नहीं किया जाएगा। पूर्व में कईयाें के आवेदन खारिज करने से उन्हें मुख्यमंत्री चिरंजीवी बीमा याेजना सहित जनकल्याणकारी याेजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया था। इस संबंध में विभाग काे शिकायतें भी मिली थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने आवेदकाें काे राहत देते हुए यह आदेश सभी कलेक्टर्स काे जारी किए। अटल सेवा केंद्र के मुताबिक बीकानेर जिले में अब तक चार लाख 25 हजार 51 जनआधार कार्ड बने हैं, जिसमें 15 लाख 47 हजार 741 सदस्य जुड़े हुए हैं।

जिले के नाै ब्लाॅक, तीन पंचायत समितियाें व नगरनिगम में 4144 जनआधार कार्ड की फाइल पेंडिंग पड़ी है। ग्रामीण एरिया में यह ग्राम सेवकाें के पास पेंडिंग हैं, जिसे बीडीओ फाइनल करता है। ऐसे ही शहरी क्षेत्र में नगर पालिका, नगर निगम में प्रकरण बकाया चल रहे हैं, जिन्हें प्रथम रिपाेर्ट के बाद एसडीएम फाइनल करता है।

उधर अटल सेवा केंद्र के ज्वाइंट डायरेक्टर सत्येंद्रसिंह राठाैड़ ने बताया कि जनआधार कार्ड के आवेदन की ये पेडेंसी मुख्यमंत्री चिरंजीवी बीमा याेजना के चलते हुई हैं। दाे महीने की पेंडेंसी हैं। जनआधार कार्ड बनना रूटीन प्रक्रिया है। नए आवेदन भी आ रहे हैं। पुराने प्रकरण संबंधित अधिकारी के पास जांच के लिए पड़े हैं। राशनकार्ड की अनिवार्यता खत्म हाेने से प्रकरणाें का निस्तारण अब तेजी से हाेगा।

जनआधार के लिए चाहिए ये दस्तावेज : जनआधार कार्ड बनवाने के लिए परिवार की महिला का बैंक खाते का विवरण, आधार कार्ड, अन्य सदस्य का आधार कार्ड व उसके पंजीयन की रसीद, कार्ड में जुड़ने वाले परिवार के सभी सदस्याें के फाेटाे लगाने अनिवार्य है। इसके बाद वह जनआधार कार्ड दस्तावेज के अभाव में निरस्त नहीं हाेगा।

क्या है जनआधार कार्ड

यह कार्ड व्यक्तिगत नहीं बनकर पूरे परिवार का एक साथ बनता है। इसी कार्ड के माध्यम से जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ राज्य के लोगों को मिलता है। वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल के दौरान इसे भामाशाह कार्ड के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में अशोक गहलोत सरकार ने इसका नाम बदलकर जन आधार कार्ड कर दिया। परिवार में महिला नहीं हाेने पर यह पुरुष के नाम से भी बनवाया जा सकता है।

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