कोरोना में बदला काम का तरीका:किसान मिट्‌टी और पानी की जांच रिपोर्ट कृषि वैज्ञानिकों को भेजकर ऑनलाइन ले रहे परामर्श

बीकानेर6 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

कोरोना संक्रमण के चलते वर्तमान परिस्थितियों में काफी बदलाव हुआ है। इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने भी अपने तरीकों में बदलाव किया है। अब कृषि वैज्ञानिक सोशल मीडिया के जरिए किसानों और पशुपालकों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। वर्तमान में खरीफ की फसलों की बुवाई के लिए खेतों की तैयारी की जा रही है और किसान अपने खेत की मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट, वैज्ञानिकों को भेजकर परामर्श ले रहे हैं।

साथ ही बागवानी एवं सजावटी फूलों के विषय में उद्यानिकी विशेषज्ञ से मार्गदर्शन ले रहे हैं। हालांकि कोरोना काल से पहले कृषक खुद कृषि विज्ञान केंद्र, बीज अनुसंधान केंद्र एवं कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र से संपर्क करते थे। लेकिन सरकार द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइंस की पालना में कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए उपयोगी सूचनाएं साझा कर रहे हैं।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि मौसम आधारित कृषि साप्ताहिक सूचना से किसानों को मौसम, तापमान, आंधी, बूंदाबांदी वज्रपात आदि की जानकारी मिल जाती है। इससे किसान को फसल काटने, भंडारण उचित प्रबंधन में काफी मदद मिली है। किसानों द्वारा कई प्रश्न पूछे जा रहे हैं जैसे कि नई फसल के बीज कहां मिलेंगे, खेती की तैयारी कैसे की जाए, कौन सी बीच काम में लिया जाए। मूंग, मोठ, मूंगफली की फसल से संबंधित जानकारी भी किसान ऑनलाइन ले रहे हैं।

विश्वविद्यालय के कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र के वाट्सएप ग्रुप पर कृषि वैज्ञानिक किसानों को पशु पालन एवं खेती से जुड़ी समस्याओं और प्रश्नों के समाधान कर रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर समस्त कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों की मोबाइल नंबर दिए गए हैं, जरूरतमंद किसान इनसे संपर्क कर सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।-प्रो.आरपी सिंह, कुलपति, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय

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