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बंदी फरार:सजायाफ्ता कैदियों ने पैरोल को बनाया जेल से फरार होने का हथियार, पुलिस को ऐसे 29 बंदियों की तलाश

बीकानेर13 दिन पहले
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  • एक चौथाई सजा काट चुके बंदियों को पैरोल पर छोड़ने का कमेटी करती है निर्णय

बीकानेर जेल के सजायाफ्ता बंदियाें ने पैराेल काे अपनी फरारी का हथियार बना लिया। पैराेल हासिल करने के बाद वे तय समय पर वापस जेल आने की बजाय फरार हाेने लगे हैं। पुलिस काे ऐसे 29 बंदियाें की तलाश है। जेल में एक चाैथाई सजा पूरी करने वाले बंदियाें काे पैराेल पर छाेड़ने का नियम का है।

ऐसे बंदी अब पुलिस के लिए सिरदर्द बनने लगे हैं। जेल से पैराेल पर छूटने वाले बंदी तय समय-सीमा पर वापस लाैटने की बजाय फरार हाेने लगे हैं। जेल प्रशासन फरार बंदियाें के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज करवाता है जिनकी गिरफ्तारी पुलिस के जिम्मे हाेती है। बीकानेर जेल से पैराेल पर फरार हुए ऐसे ही 29 बंदियाें की बीछवाल पुलिस काे तलाश है।

इनमें दाे ओपन जेल के बंदी शामिल हैं। हर साल पैराेल हासिल कर बंदी फरार हाे रहे हैं और जेल प्रशासन की ओर से मुकदमे दर्ज करवाए जा रहे हैं। फरारी के बाद बंदियाें काे पकड़ना पुलिस के लिए मुश्किल साबित हाे रहा है।

बीछवाल थाने में कब-कितने मुकदमे दर्ज
पैराेल से फरार हुए बंदियाें के खिलाफ बीछवाल थाने में वर्ष 15 में छह, वर्ष 16 में तीन, वर्ष 17 में चार, वर्ष 18 में छह, वर्ष 19 में सात और वर्ष 20 में नाै मुकदमे दर्ज हुए।

^बंदी काे पैराेल पर छाेड़ने का नियम है। पैराेल पर जाने वाले बंदी के रिश्तेदार या परिचित के जमानत मुचलके भरवाए जाते हैं। अगर वह फरार हाे जाता है ताे जेल प्रशासन की ओर से बंदी और जमानत देने वालाें के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाता है।
परमजीतसिंह सिद्धू, जेल अधीक्षक
^ पैराेल से बंदियाें के फरार हाेने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। ऐसे बंदियाें के खिलाफ मुकदमा दर्ज हाेने पर पुलिस उन्हें तलाश करती है। अब तक 12 बंदियाें काे गिरफ्तार कर चुके हैं। फरार चल रहे अन्य बंदियाें की भी तलाश कर रहे हैं।
मनाेज शर्मा, बीछवाल एसएचओ

जनवरी के 13 दिन में ही दो बंदी हो गए फरार
जेल प्रशासन ने इस माह पैराेल से फरार हाेने के दाे मुकदमे बीछवाल थाने में दर्ज करवाए गए हैं। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहे चूरू के सुजानगढ़ निवासी असलम खां काे 40 दिन की पैराेल मिली थी। उसे 28 नवंबर, 20 काे छाेड़ा गया और छह जनवरी, 21 काे वापस आना था। इसी तरह पाेक्साे एक्ट में 10 साल की सजा भुगत रहे सीकर के खंडेला थानांतर्गत बुधसिंह की ढाणी निवासी सुरेन्द्रसिंह काे भी 40 दिन की पैराेल दी थी। उसे तीन दिसंबर, 20 काे छोड़ा और 11 जनवरी, 21 काे वापस आना था।

ये है नियम: सजायाफ्ता बंदियाें काे 20, 30, 40 दिन की मिलती है पैराेल
जेल अधिनियम में ऐसे सजायाफ्ता बंदियाें काे पैराेल देने का अधिकार है जाे एक चाैथाई सजा काट चुके हैं और जिनका आचरण अच्छा या संताेषप्रद हाे। कलेक्टर, जेल अधीक्षक, एसपी और समाज कल्याण अधिकारिता विभाग के प्रतिनिधियों वाली कमेटी बंदियाें की सामान्य पैराेल अर्जी पर सुनवाई कर निर्णय लेती है।

काेर्ट से भी बंदियाें काे पैराेल पर छाेड़ने के आदेश दिए जाते हैं। बंदी काे पहली बार 20, दूसरी बार 30 और तीसरी बार 40 दिन की पैराेल मिलती है। उसके बाद भी 40-40 दिन की पैराेल दी जा सकती है। इसके अलावा परिजनों की मृत्यु, बीमारी या अन्य आवश्यक परिस्थितियों में आपात पैराेल भी दी जाती है। कलेक्टर और जेल आईजी काे 15-15 दिन और जेल अधीक्षक काे सात दिन की आपात पैराेल देने का अधिकार है।
और ये व्यवस्था भी: एक बार फरार बंदी काे फिर देते पैराेल
जेल से पैराेल पर फरार हाेने वाले बंदी काे पकड़े जाने के बाद दुबारा भी पैराेल मिल सकती है। हालांकि, उसकी पैराेल की अवधि कम कर दी जाती है। ऐसे बंदियाें काे पहली बार सात दिन, दूसरी बार 15 दिन और तीसरी बार 20 दिन की ही पैराेल मिल पाती है। सामान्यत: जेल प्रशासन पूर्व में फरार बंदियाें काे पैराेल के लिए रिकमंड नहीं करता। उन्हें आपाता पैराेल या काेर्ट के आदेश से पैराेल मिलती है।

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