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माता-पिता और चचेरे भाई की कोरोना से मौत:शारीरिक रूप से बीमार 22 साल के युवक को संभालने वालें तीनों लोगों की मौत, दिन में 10 से ज्यादा बार आते हैं मिर्गी के दौरे

बीकानेर19 दिन पहले
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अपने माता-पिता के साथ पीयूष। - Dainik Bhaskar
अपने माता-पिता के साथ पीयूष।

महज 22 साल का पीयूष शारीरिक रूप से बीमार है। उसे बार बार मिर्गी के दौरे आते हैं, कभी दिन में दस बार तो कभी इससे भी ज्यादा। वो खुद अपना कोई काम नहीं कर पाता। ऐसे में उसके पिता ओमजी ही उसके सभी काम कर रहे थे। इस बीच कोरोना ने इस परिवार पर हमला बोल दिया। 8 मई को पीयूष के पिता ओमजी का निधन हो गया। अब पीयूष के लिए उसकी मां सरस्वती ही एकमात्र सहारा रह गई थी। उन्हें भी 23 मई को ये बीमारी निगल गई। माता-पिता के अलावा चचेरा भाई सुनील था, जो पीयूष को प्यार करता था। माता-पिता से भी पहले 7 मई को उस भाई की भी कोरोना से मौत हो गई थी। एक महीने पीयूष तीन लोगों को खो चुका है। अब कोई है तो घर के आसपास रहने वाले चाचा। जिनसे पीयूष हर सुबह एक ही सवाल करता है कि पापा-मम्मी और भइया गए तो कहां गए?

पीयूष का ध्यान रखने वाले तीनों लोगों की मौत के बाद आसपास रहने वाले चाचा और अन्य परिजनों को यह तक पता नहीं था कि उसे कब कौनसी दवा देनी है। चाचा शिवकुमार व्यास ने घर में वो पर्चियां ढूंढी, जिस पर डॉक्टर्स ने दवाएं लिखी थी। फिलहाल शहर के नामी डॉक्टर्स से चर्चा करके दवाएं दी जा रही है, लेकिन जब उसे एपीलेप्सी के दौरे आते हैं तो संभाल पाना मुश्किल हो जाता है। चाचा बताते हैं कि कभी एक मिनट में चार बार तो कभी एक घंटे में दस बार दौरे भी आते हैं। हम धीरे-धीरे ही सही लेकिन उसे संभाल रहे हैं।

भविष्य की चिंता
परिजनों को उसके भविष्य को लेकर चिंता है। वो अपने स्तर पर कोई काम नहीं कर पा रहा है। भारी शरीर के कारण उसे संभालने के लिए भी मजबूत सहारा चाहिए। वो चाहते हैं कि इस बीमारी से किसी तरह पीयूष को निजात मिल जाए तो जीने का सहारा मिले। इलाज पर होने वाले खर्च को तो परिजन वहन कर सकते हैं, लेकिन उसकी पीड़ा को समझ पाना मुश्किल हो रहा है। पीयूष की 2 बहनें हैं। जो शादीशुदा हैं। दोनों बीकानेर में ही रहती हैं। जो काफी हद तक भाई का सहारा बन रही हैं। वहीं, पिता शिक्षा विभाग में कर्मचारी थे। उसके तीन चाचा हैं जिनके मकान भी पीयूष के घर के आसपास के क्षेत्रों में ही हैं।

खुद ने हरा दिया कोरोना को
सबसे बड़ी बात है कि पीयूष ने खुद कोरोना को हरा दिया। उसे भी अपने पापा व मम्मी के साथ कोरोना हुआ। कुछ दिन संक्रमण रहा, लेकिन एसिम्टोमेटिक होने के कारण वो ठीक हो गया। वहीं, पापा व मम्मी दोनों दुनिया से विदा हो गए। कोरोना को हराने के बाद एपिलेप्सी जैसी बीमारी से हराने के लिए उसे सहारे की जरूरत है।

इस दौर से भी निकलेंगे
ये परिवार महज एक महीने में तीन सदस्य खो चुका है। जवान भतीजे सुनील, भाई ओमप्रकाश और भाभी सरस्वती को खोने के बाद से सदमे में आये शिवकुमार व्यास का कहना है कि इस बुरे वक्त पर भी विजय पा लेंगे। किसी न किसी तरह सब फिर रुटीन जीवन में आने की कोशिश करेंगे। पूरा परिवार इस विकट दौर में एक साथ खड़ा है, लेकिन भविष्य की चिंता सब को सता रही है।

पीएम केयर फंड देगा सहारा?
केंद्र सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि पीएम केयर फंड से उन अनाथ बच्चों को आर्थिक सहायता दी जायेगी जो अपने माता व पिता को इस बीमारी के कारण खो चुके हैं। पीयूष अब 22 साल का वयस्क है, लेकिन वो शारीरिक रूप से अक्षम है। ऐसे में उसे इस घोषणा से कोई राहत मिलेगी या नहीं? इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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