ज्याणी को यूएनओ का लैंड फॉर लाइफ अवार्ड:कोरोना के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ की यूएनसीसीडी संस्था ने ऑनलाइन ही दिया अवार्ड

बीकानेर2 महीने पहले
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मंगलवार शाम को बीकानेर में एक नया इतिहास रचा गया। यूएनओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वोच्च संस्था यूएनसीसीडी ने बीकानेर के श्याम सुंदर ज्याणी को भूमि संरक्षण के सर्वोच्च अवार्ड लैंड फॉर लाइफ अवार्ड से सम्मानित किया। कोरोना के कारण हवाई सेवा बाधित होने के कारण यह अवार्ड दुनियाभर में ऑनलाइन ही मनाया गया। हर दो साल में दिए जाने वाले इस अवार्ड में दुनियाभर से 12 लोगों का नाम अंतिम सूची में था जिसमें ज्याणी अंतिम रूप से चुने गए थे।

इस साल 17 जून को कोस्टारिका में इसकी घोषणा की गई थी। अगले वर्ष मई में अफ्रीकी देश आइवरी कोस्ट में सदस्य देशों के वैश्विक सम्मेलन में ज्याणी को विशेष उद्बोधन के लिए आमंत्रित किया जाएगा तब उन्हें यह ट्राफी प्रदान की जाएगी। मंगलवार शाम 4.30 बजे रायसर स्थित विंसम वर्ल्ड ऑफ एजुकेशन परिसर में इस ऑनलाइन आयोजन को देखने के लिए शहरभर से गणमान्य लोग पहुंचे। विंसम निदेशक सुरेंद्र धारणिया व डूंगर कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विजयपाल बेनीवाल ने बताया कि शाम 5 बजे से 5.15 बजे तक अवार्ड समारोह का प्रसारण किया गया।

इसके बाद सांस्कृतिक संध्या हुई। समारोह में पहुंचे अतिथियों को उपहार स्वरूप पौधे दिए गए। इस दौरान ज्याणी ने कहा कि यह अवार्ड उन्हें पर्यावरण की दिशा में काम करने के लिए और प्रेरित करेगा। इस अवसर पर पूर्व विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, मदन मेघवाल, जितेंद्र धारणिया, राम निवास बेनीवाल, सुनील घिंटाला आदि उपस्थित थे।

जानिए ज्याणी के बारे में : प्रोफेसर श्यामसुंदर ज्याणी श्रीगंगानगर जिले की रायसिंहनगर तहसील के गांव 12 टीके के मूल निवासी है। वर्तमान में बीकानेर के राजकीय डूंगर कॉलेज में समाजशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर है। इन्होंने 15000 से अधिक गांवों के दस लाख से ज्यादा परिवारों को जोड़ते हुए 25 लाख पौधे लगवाने में अपना योगदान दिया है। डूंगर कॉलेज परिसर में ही ज्याणी ने 6 हैक्टेयर भूमि पर 3000 पेड़ों लगाए हैं।

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