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दिल्ली की दो कंपनियां लगाएंगी प्राेजेक्ट:एग्रीकल्चर वेस्ट से बीकानेर के जसरासर-छत्तरगढ़ में बनेगी बिजली, 29.9 मेगावाट क्षमता के दाे बायाेमास पावर प्राेजेक्ट स्वीकृत

बीकानेरएक महीने पहले
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नई दिल्ली की दो कंपनियों काे बीकानेर में दाे बायाेमास पाॅवर प्लांट स्वीकृत हाे चुके हैं।(प्रतीकात्‍मक फोटो) - Dainik Bhaskar
नई दिल्ली की दो कंपनियों काे बीकानेर में दाे बायाेमास पाॅवर प्लांट स्वीकृत हाे चुके हैं।(प्रतीकात्‍मक फोटो)

एग्रीकल्चर वेस्ट से बीकानेर में जल्द ही बिजली बनेगी। इसके लिए नई दिल्ली की दो कंपनियों काे बीकानेर में दाे बायाेमास पाॅवर प्लांट स्वीकृत हाे चुके हैं। कंपनियों ने प्राेजेक्ट लगाने के लिए छत्तरगढ़ और जसरासर में जमीन की खरीद भी कर ली है। जिला कलेक्टर ने इस जमीन का लैंड यूज भी चेंज कर दिया है। अब 12 जनवरी काे बीकानेर में हाेने वाले इनवेस्टर्स समिट 2022 में उन दोनों कंपनियों का राज्य सरकार से केवल एमओयू हाेना बाकी है।

महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं वानिकी केंद्र मंजू नैण गोदारा ने बताया कि कंपनियों ने दाेनाें जगहाें पर बायाेमास प्राेजेक्ट काे लगाने की तैयारी कर दी है। जमीन खरीदने के साथ ही उसका लैंड यूज भी चेंज किया जा चुका है। अब एमओयू के बाद आगे की कार्रवाई हाेगी। उम्मीद है कि 2022 में यह प्राेजेक्ट मूर्त रूप में आ जाएगा।

दाेनों प्रोजेक्ट 29.8 मेगावाट क्षमता के
छत्तरगढ़ व जसरासर में लगने वाले दोनों बायोमास पॉवर प्लांट 14.9-14.9 मेगावाट के होंगे। यह बिजली सस्ती होगी जिसे राज्य सरकार को ही बेचा जाएगा। इसके लिए छत्तरगढ़ में 49 बीघा जमीन व जसरासर में 52 बीघा जमीन अलॉट की गई है।

175-175 कराेड़ रुपए हाेंगे खर्च : छत्तरगढ़ व जसरासर में बायाेमास प्राेजेक्ट लगाने के लिए नाेएडा की कंपनी 175-175 कराेड़ रुपए दाेनाें जगहाें पर इनवेस्ट करेगी। इससे इन दाेनाें गांवाें में राेजगार के साधन बढ़ेंगे।

राजस्थान ऊर्जा विकास निगम से मिली मंजूरी : राज्य सरकार के उपक्रम राजस्थान ऊर्जा विकास निगम ने इस प्रोजेक्ट को मंजूर कर दिया है। अक्टूबर में विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में यह निर्णय हुए थे।

दो हजार लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार
दोनों ही जगहों पर प्लांट लगने से करीब दो हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकेगा।

फैक्ट फाइल

  • भारत अपने कृषि, कृषि-उद्योग तथा वन्य क्षेत्रों के क्रियाकलापों के अंतर्गत बड़ी मात्रा में बायोमास सामग्री पैदा करता है। एक आकलन के अनुसार 500 मिलियन टन कृषि तथा कृषि-उद्योग अवशिष्ट हर साल पैदा किया जाता है।
  • ताप ऊर्जा के अर्थ में यह मात्रा तकरीबन 175 मिलियन टन तेल के बराबर है।
  • इन सामग्रियों का कुछ भाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चारे और इंधन के लिए प्रयोग किये जाते हैं। हालांकि अध्ययन से पता चलता है कि इस बायोमास सामग्री का कम से कम 150-200 मिलियन टन का कोई खास उपयोग नहीं होता और इसका सस्ती दर पर वैकल्पिक प्रयोग किया जा सकता है।
  • इन सामग्रियों में भूसी तथा पुआल शामिल हैं। बायोमास की यह मात्रा 15000-25000 मेगावाट बिजली के उत्पादन के लिए पर्याप्त है।
  • इसके अलावा बंजर भूमि, सड़क तथा रेल की पटरियों के किनारे के पौधों आदि से भी बिजली पैदा की जा सकती है। ऐसे बायोमास से पैदा की जानी बिजली की मात्रा करीब 70000 मेगावाट अनुमानित की गई है।
  • इस प्रकार बायोमास से पैदा होने वाली बिजली की संभावित मात्रा 100000 मेगावाट तक पहुंच सकती है।
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