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भीगा भादवा:5 दिन में जिले का हर कोना भीगा, ढाई लाख हैक्टेयर की फसलें फिर जी उठीं, शनिवार की बारिश से ही 11% औसत सुधरा

बीकानेर7 दिन पहले
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गजनेर झील और चांडासर तालाब एक ही व्यू में। फोटो : विनोद मोदी - Dainik Bhaskar
गजनेर झील और चांडासर तालाब एक ही व्यू में। फोटो : विनोद मोदी

अब बंगाल की खाड़ी और चार दिन पहले उड़ीसा-छत्तीसगढ़ के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र ने जिले के हर काेने को सींच दिया है। हर तहसील में कुछ गांव बचें तो दीगर बात है वरना तकरीबन हर जगह तीन से चार दिन में एक बार तो बारिश हो ही चुकी है। इसका सीधा फायदा उन फसलों को होगा जिनकी लेट बिजाई हुई है। क्योंकि अगर इस वक्त इन फसलों को सिंचाई नहीं मिलती तो ये सूख जाती।

इसमें मूंग, बाजरा, माेठ, ग्वार शामिल है। सबसे अच्छी खबर यह है कि बीते दिनाें सूखे के हालात के कारण पशुओं के सामने जाे चारे का संकट खड़ा हाे रहा था उसमें भी कमी आएगी क्याेंकि खाली मैदानाें में घास भी उगने के आसार हैं। दरअसल समय पर बोई गई मोठ अब लगभग कटाई पर आने वाली है लेकिन लेट बिजाई वाली मोठ में अभी फलियां बन रही हैं। कमोबेस यही हालात बाजरा में हैं। बाजरे में फलियां बन रही और ऐसे में बारिश से दाना मजबूत होगा।

मूंग और ग्वार के भी ये ही हालात हैं। कृषि विशेषज्ञ इसे बूस्टर डोज मान रहे हैं क्योंकि इस बारिश के बाद लगभग हर फसल को ना सिर्फ फायदा होगा बल्कि फलियां मजबूत होंगी क्योंकि कुछ दिन पहले इन फसलों पर सूखे का संकट बना हुआ था। जिन फसलों पर सूखे का संकट टला है वो करीब ढाई लाख हैक्टेयर कृषि विभाग ने आंका है जिसकी लेट बिजाई हुई है।

भादू बरसै सायबा, पगा बिलूंबी गार, दरख्त मीठी बेलड़ी अर पीव नै प्यारी नार

मानसूनी फुहारों के बीच गीली माटी की सौंधी सुगंध और तीज -त्योहारों के मेले भादवे का लोकगीतों में कुछ यूं ही बखान किया गया है। इस बार भादवा इसलिए भी खास है क्योंकि सावन सूखा जाने के बाद इसी महीने में फुहारों की राहत मिली है।

राहत इंदौरी इस राहत को कुछ यूं भी बयां करते हैं

मुद्दतों बाद यूं तब्दील हुआ है मौसम,
जैसे छुटकारा मिला हो किसी बीमारी से...
बीकानेर का कोटा सिर्फ 9 फीसदी कम, आगे भी बारिश की उम्मीद

सिर्फ शनिवार काे हुई बारिश ने जिले की बारिश के औसत में 11 प्रतिशत का सुधार किया। जिसमें सबसे ज्यादा बड़ी भूमिका बीकानेर शहर और उसके आसपास के गावाें का बारिश का असर है। पूरे मानसून की सबसे ज्यादा बारिश शनिवार काे 33 मिलीमीटर बारिश हुई लेकिन शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्राें में भी बादल बरसे।

इसलिए दाे दिन पहले बीकानेर 19 प्रतिशत घाटे में था जाे अब सिर्फ 9 प्रतिशत रह गया। 12 सितंबर तक बीकानेर में 216 मिलीमीटर बारिश हाेनी चाहिए थी जाे अब अब तक 197 मिलीमीटर हाे चुकी है। सिर्फ नाै प्रतिशत कम है इसलिए माैसम विभाग ने बारिश के लिहाज से बीकानेर जिले काे सामान्य कैटेगरी में शामिल किया है।

जिले में 10 लाख हैक्टेयर में बिजाई हुई है। 20 से 25 प्रतिशत ऐसी फसल है जाे देरी से बाेई गई। इन फसलाें के लिए ये बारिश अमृत के समान है। इससे जाे फसलें सूख रही थी वे ना सिर्फ बचेगी बल्कि आगे भी सिंचाई की कम ही जरूरत पड़ेगी। ज्यादातर फसलें फलियाें पर है इसलिए अब पकने तक काेई दिक्कत नहीं हाेगी।
डाॅ. उदयभान, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग

शहर में 1.2 एमएम बारिश, 48 घंटे में 4 डिग्री गिर गया तापमान

रविवार को भी मानसून मेहरबान रहा। गांव से शहर तक कहीं हलकी तो कहीं तेज बारिश का सिलसिला जारी रहा। नापासर, लालमदेसर बड़ा, पलाना, जयमलसर, देशनाेक, ऊपनी, बिग्गा, गजनेर, माेरखाणा, लूणकरणसर, बाना, नाेखा में बारिश दर्ज की गई। माेमासर में ताे लगातार आठ घंटे तक बूंदाबांदी का दाैर रहा। बीकानेर शहर में भी सुबह 11 बजे के करीब बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 33.2 व न्यूनतम 24.6 डिग्री रहा।

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