विजय दिवस विशेष-2:बॉर्डर पर हर दिन युद्ध जैसा; पाक के पोस्ट पर कुएं का पानी पीकर 4 महीने गुजारे जवानों ने

बीकानेरएक महीने पहले
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1971 के युद्ध में बीएसएफ 14वीं बटालियन के जवानों ने पाकिस्तान की सनाउतार जीटी स्टेशन पोस्ट को कैप्चर किया था। पोस्ट पर मौजूद बीएसएफ के अधिकारी और जवान। - Dainik Bhaskar
1971 के युद्ध में बीएसएफ 14वीं बटालियन के जवानों ने पाकिस्तान की सनाउतार जीटी स्टेशन पोस्ट को कैप्चर किया था। पोस्ट पर मौजूद बीएसएफ के अधिकारी और जवान।

बॉर्डर पर हर दिन युद्ध जैसा होता है। गर्मी में धूल भरी आंधियां, झुलसा देने वाले लू के थपेड़े। दिसंबर में हाड़ कंपा देने वाली ठंड। पश्चिमी सरहद की सुरक्षा आसान नहीं थी। शहर से करीब 200 किलोमीटर दूर जाने के लिए इतने साधन भी नहीं थे। कोटगेट से रणजीतपुरा के लिए एक बस चलती थी। बीएसएफ के जवान उसी बस से सांचू पहुंचे थे। वह जब रेत में घंस जाती तो जवानों को धक्के लगाने पड़ते।

ऐसे विषम हालात में आर्मी और बीएसएफ ने 1971 में बॉर्डर पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। बॉर्डर से सौ किलोमीटर तक एरिया में पीने के लिए मीठा पानी नहीं था। बीकानेर से टैंकर भेजने पड़ते थे। पानी का स्टोर करने के लिए सीमा चौकियों पर टांके बनाए गए। बारिश होने पर टांके भर जाते तो जवान उसी पानी से प्यास बुझाते। युद्ध के दौरान पानी का संकट खड़ा हो गया। पाकिस्तान की रनिहाल पोस्ट कैप्चर की तो वहां मीठे पानी का कुआं मिल गया। बीएसएफ के जवान चार महीने तक वहां रहे। उसी पानी से अपनी प्यास बुझाते थे। भोजन के लिए सूखा राशन ऊंटों पर भिजवाया जाता।

कंपनी के पहुंचने से पहले ही भाग खड़े हुए पाक सैनिक
चार्ली कंपनी खाजूवाला सेक्टर में खरुला पोस्ट पर तैनात थी। पाक की भूरा का टोबा पोस्ट को कैप्चर करना था। सात दिसंबर को आदेश मिला। दो दिन दुश्मन की रैकी की। दस दिसंबर को दोपहर 12 बजे कूच किया। हमारी तीन प्लाटून थी, जिसमें से एक का मैं कमांडर था। मेरी प्लाटून को अटैक करना था। बाकी दोनों प्लाटून ने कवरिंग फायर के लिए पॉजिशन ले ली। भूरा का टोबा पहुंचे तो वहां कोई नहीं मिला। हमारे आने की आहट पाकर पाक सेना भाग खड़ी हुई। हम छह महीने पोस्ट पर रहे।- भंवर सिंह राठौड़, रि. कमांडेंट, बीएसएफ

युद्ध से पहले सीएम हरिदेव जोशी आए थे हौसला बढ़ाने
हमें सात मई को ही सांचू भेज दिया। पलटन कोटगेट से रणजीतपुरा जाने वाली बस में सवार हो गई। रणजीतपुरा से आगे सड़क नहीं थी। रेतीले मार्ग पर पैदल चलकर सांचू पहुंचे। गंगा रिसाला 13 ग्रेनेडियर भी पहुंच गई। युद्ध शुरू होने से पहले सीएम हरिदेव जोशी पोस्ट पर आए। उन्होंने कहा, आप सभी को मजबूती से खड़े रहना है। पीने के पानी की बड़ी समस्या थी। सौ किमी तक मीठा पानी नहीं था। रनिहाल कैप्चर किया तो वहां मीठे पानी का कुआं मिला। चार महीने तक वहां रहे। उसी का पानी पीकर प्यास बुझाई।-पेमाराम, रिटायर्ड नायक, बीएसएफ

गाइड बनकर गए थे भैरोंसिंह, पाक की जिप्सी उड़ा आए
लोंगेवाला में बड़ा अटैक होने की सूचना पर आर्मी आ पहुंची। सेना को गाइड की जरूरत थी। हम चार जवान गाइड बनकर गए। पाकिस्तान की टैंक ब्रिगेड सामने खड़ी थी। हमने फर्जी लैंड माइन बिछाई। डर के मारे पाक सेना ने अपने टैंक रोक दिए। हमारे पास एलएमजी थी। मौत सामने खड़ी थी। माता तनौट राय को याद किया और फायरिंग शुरू कर दी। पाक के कमांडर की जिप्सी उड़ा दी, जिसमें दिल्ली का नक्शा रखा था। सुबह पांच बजे बाद हमारी वायुसेना के विमानों ने बमबारी शुरू कर दी।-भैरों सिंह, रिटायर्ड नायक, बीएसएफ

पलटन रास्ता ना भूले इसलिए झाड़ियों में सफेद कागज लगाए
पाक की सनाउतार जीटी स्टेशन पोस्ट को कैप्चर करने का टास्क 14 बीएसएफ को मिला था। यह पोस्ट काफी ऊंचाई पर थी। कमांडेंट जय सिंह थैलासर के नेतृत्व में कंपनी 12 किमी पैदल चलकर बॉर्डर पहुंची। वहां से पाक की पोस्ट पांच किमी दूर थी। रास्ता केवल मुझे पता था। पलटन रास्ता ना भटके इसलिए मैं झाड़ियों में सफेद पेपर लगाता गया। पोस्ट कैप्चर करने के बाद हमारी पलटन को “थार के योद्धा’ का खिताब मिला।-सुभाष जोशी, रिटायर्ड कमांडेंट, बीएसएफ

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