भाजपा में फिर चौड़े आई फूट:बीकानेर भाजपा में नहीं थम रही गुटबाजी, जेपी नड्‌डा के कार्यक्रम के इन्विटेशन कार्ड में नहीं है महापौर का नाम

बीकानेर15 दिन पहले

भारतीय जनता पार्टी के बीकानेर कार्यालय परिसर के उद्घाटन समारोह को लेकर पार्टी की गुटबाजी एक बार फिर चौड़े आ गई है। इस समारोह के लिए छपे इन्विटेशन कार्ड में महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित का नाम तक नहीं है, जबकि एमपी और विधायकों का नाम दिया गया है। पार्षदों का आरोप है कि पूरे जिले में एक ही महापौर है लेकिन इसके बाद भी उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया गया।

दरअसल, गांधी नगर स्थित पार्टी के नए कार्यालय का उद्घाटन 11 मई को राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्‌डा वर्चुअल करेंगे। हालांकि पूजन सहित अन्य आयोजन भी होंगे। इस कार्यक्रम के लिए छपे इन्विटेशन कार्ड में सांसद और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, विधायक सिद्धिकुमारी, बिहारीलाल बिश्नोई और सुमित गोदारा का नाम है, लेकिन महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित का जिक्र नहीं है। इस कार्ड के सार्वजनिक होने के बाद से कुछ भाजपा पार्षद इसका विरोध कर रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि दो विधानसभाओं की जनता ने मिलकर भाजपा की महापौर को चुना है। इसके बाद भी अगर पार्टी कार्यक्रम में उन्हें तरजीह नहीं मिलती है तो ये अपमान है।

पार्षद झगड़े का असर?

अब माना जा रहा है कि पिछले दिनों लक्ष्मीनाथ मंदिर में पार्षद अरविन्द किशोर आचार्य और शहर अध्यक्ष अखिलेश प्रताप सिंह में हुई तूं-तूं मैं-मैं का असर माना जा रहा है। दरअसल, अरविन्द किशोर सांसद अर्जुनराम मेघवाल के साथ रहते हैं और महापौर को भी भाजपा में उन्हीं के गुट से माना जाता है। ऐसे में सांसद को अहसास कराने के लिए महापौर का नाम नहीं दिया गया।

प्रदेशाध्यक्ष तक मामला

इस मामले को अब प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया तक पहुंचाया गया है। जिसमें शहर अध्यक्ष अखिलेश प्रताप सिंह की कार्यप्रणाली पर सवाल किए गए हैं। दरअसल, पुनिया पहले ही गुटबाजी नहीं करने के निर्देश दे चुके हैं। पत्र में पार्षदों ने लिखा है कि लक्ष्मीनाथ मंदिर में जो आक्रोश पार्षद अरविन्द किशोर आचार्य का फूटा था, वो पार्षदों व मेयर की लगातार हो रही उपेक्षा का नतीजा था। हालांकि इस मामले में अब तक पार्टी की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।