पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोना में सुस्त पड़े सुर और ताल:लोक कलाकारों को डेढ़ साल से काम नहीं, दो वक्त की रोटी का संकट, बीकानेर के युवक ने शुरू किया मिशन मदद

बीकानेर18 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
एक कलाकार घर तक मदद पहुंचाते लोग। - Dainik Bhaskar
एक कलाकार घर तक मदद पहुंचाते लोग।

कभी अपनी गायकी के दम पर तो कभी म्युजिकल इंस्ट्रूमेंट की सुरीली आवाज के दम पर घर परिवार का पेट पालने वाले लोक कलाकार इन दिनों परेशान है। पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश जिलों में इन कलाकारों के पास करीब डेढ़ साल से कोई काम नहीं है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अब दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी नहीं हो रहा। इनमें अधिकांश कलाकार वो है जो बड़े आयोजनों में हजारों की वाहवाही बटोरते रहे हैं। फिलहाल इन कलाकारों को वाहवाही के बजाय आटा, चावल और तेल की जरूरत है। बीकानेर में हर साल कबीर यात्रा का आयोजन कर इन कलाकारों के दिल में जगह बनाने वाले गोपाल सिंह चौहान ने इन हालातों को समझा है। अब तक वो एक हजार से अधिक लोक कलाकारों के घर तक राशन पहुंचा चुके हैं। गोपाल सिंह की भावनाओं को बीकानेर की कई संस्थाओं ने समझा और उसे आर्थिक सहयोग भी दिया।

गोपाल सिंह बताते हैं कि बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर व जोधपुर के लोक कलाकार उनके संपर्क में है। लोकायन संस्था के तहत गोपाल सिंह हर साल कबीर यात्रा का आयोजन करते हैं, इसके अलावा लुप्त होती कलाओं काे संरक्षित करने का काम भी कर रहे हैं। इस बुरे वक्त में कलाकारों ने उन्हें ही याद किया। ऐसे में कुछ लोगों को राशन किट भेजी गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में कलाकारों ने फोन करके सहयोग की अपील की। ऐसे में गोपाल सिंह ने एक गूगल शीट तैयार कर दी। इसमें उन कलाकारों के नाम लिखे गए जिन्हें आर्थिक सहायता की जरूरत है। इन जिलों में गोपाल ने अपने मित्रों का सहयोग लिया और गूगल शीट शेयर कर दी। जैसे-जैसे गोपाल को सहयोग के रूप में रुपए मिलते गए, वैसे-वैसे वो अपने मित्रों को भेजते रहे, जो राशन किट तैयार करके कलाकार तक पहुंचाते और गूगल शीट में अपडेट कर देते कि कितने दिन का राशन दे दिया गया है। यह सिलसिला अभी जारी है। बीकानेर के पूगल, खाजूवाला, छत्तरगढ़ सहित अनेक गांवों में वो खुद पहुंचकर राशन किट दे रहे हैं।

पिछले एक महीने से गोपाल सिंह द्वारा बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर के लोक कलाकारों हेतु राशन किट का वितरण जारी है। गोपाल ने बताया कि पिछले लगभग डेढ़ साल से राजस्थान के लोक कलाकारों के पास कमाई का कोई साधन नहीं है, पर्यटन, शादियों तथा सांस्कृतिक महोत्सवों के जरिये ये लोक कलाकार अपनी रोजी रोटी कमाते थे मगर कोरोना के कारण कमाई के सारे जरिए लगभग बंद पड़े हैं।

कहां और किसको पहुंची किट

बीकानेर के अक्कासर, कोलायत, गजनेर, तेजरासर, नापासर, पूगल गांव में किट पहुंची है। इसके अलावा जैसलमेर के खूरी, बरना, छतांगढ़, कलाकार कॉलोनी एवं बाड़मेर के चोहटन, शिव, गडरा रोड, रेडाणा गांवों में 150 से अधिक मांगणियार, लंगा, मिरासी, कालबेलिया, ढोली, भोपा तथा लोक नृत्य से जुड़े लोक कलाकारों को राशन सामग्री पहुंचाई जा चुकी है।

मदद को मिली मदद

गोपाल सिंह बताते हैं कि लोकायन संस्था की इस कोशिश को अनेक लोगों ने सहयोग दिया। बीकानेर की वयम क्लब की ओर से ही सौ से ज्यादा किट उपलब्ध करा दिए गए। इसमें बीकानेर की डॉ. दीप्ति वहल ने तीस किट दी तो एसबीआई कर्मचारी सरोज बोड़ा के प्रयास से तीस किट मिली। IIT'ian दोस्तों के स्टार्क फाउंडेशन ने भी 28 किट उपलब्ध कराये। इनके अलावा भी अनेक समाजसेवी इस अभियान में जुटे हुए हैं।

खबरें और भी हैं...