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ये संकेत अच्छे हैं:गोरैया दे रही 2 के बजाय 4 अंडे, नीम पर आ रहे हैं फूल; टिटहरी भी पहुंची ऊंचाई पर, ये सब अच्छे मानसून का इशारा है

बीकानेर2 महीने पहले
चिड़िया दे रही है ज्यादा अंडे।
  • महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग का निष्कर्ष

आधुनिक संसाधनों के बीच आज भी परंपरागत संकेतों को भुलाया नहीं जा सकता। खासकर मौसम को लेकर। माना जाता है कि परंपरागत संकेत कभी गलत नहीं होते। राजस्थान में इसको लेकर लोगों का विश्वास भी बहुत है। इन्हीं परम्परागत और पर्यावरण आधारित संकेतों को देखें तो इस बार मौसम अच्छा होने का अनुमान है। कोरोना के इस पीड़ादायक काल में इस तरह की सूचनाएं सुकून देते हैं। विशेषज्ञें की मानें तो आने वाले दिनों में न सिर्फ मानसून अच्छा होगा, बल्कि फसलें भी लहलहाएंगी। बीकानेर के महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने कुछ ऐसी ही उम्मीद जताई है।

विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार छंगाणी कहते हैं- इस बार पर्यावरण 'अच्छे दिन' संकेत दे रहा है। परंपरागत मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, पिछले कई सालों का श्रेष्ठ मानसून इस बार आने वाला है। किसानों को अभी से अच्छी फसल के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बार रोहिड़े, नीम, फोग आदि में फूल आना, खेजड़ी पर अच्छी तादाद में सांगरी लगना, गैरों (कैर) का उत्पादन कम होना, अच्छा समय आने के संकेत हैं।

अच्छा मानसून
छंगाणी बताते हैं कि इस बार घरेलू चिड़िया 'गोरैया' ने 3-4 अंडे एक साथ दिए। इनमें 85 से 90 प्रतिशत सफल हो रहे हैं। टिटहरी ने भी 4-4 अंडे दिए। साथ ही, अंडे ऊंचाई वाले स्थानों पर दिए, जो अपने आप में अच्छी बारिश के संकेत हैं। राजस्थान और विशेषकर थार मरुस्थल में किसान सालों से इसी तरह मौसम का और बारिश का पूर्वानुमान लगाता रहा है, जो आज भी सार्थक और सटीक है।

रोहिडे के पेड पर आम दिनों से ज्यादा फूल आ रहे हैं।
रोहिडे के पेड पर आम दिनों से ज्यादा फूल आ रहे हैं।

ये संकेत भी करते हैं पूर्वानुमान

लगातार आंधी के चलते, कुछ प्री मॉनसून साइक्लोनिक बारिश का भी पूर्वानुमान है। पिछले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के चलते हुई बारिश से घास और छोटी झाड़ियों की बढ़ोतरी हुई, जिसके चलते मरुस्थल के बायोमास और जैव विविधता में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इस बार हाउस स्पैरो (गोरैया) , बेब्लर, बुलबुल, तीतर, मोर, टिटहरी, गोयरा, कोबरा, घरेलू छिपकलियों, लंगुरो, चिंकारा, ब्लैकबक, नीलगाय, सूअर आदि कई प्रजातियों का भी प्रजनन सफल रहने का पूर्वानुमान है।

कैर का उत्पादन कम होना भी अच्छा संकेत है।
कैर का उत्पादन कम होना भी अच्छा संकेत है।

इन संकेतों से शुरू होती है तैयारी

मरुस्थलीय क्षेत्र में इसी तरह के संकेत मिलने पर किसान अपने खेतों में तैयारियां शुरू कर देते हैं। खेतों में बुवाई से पहले खेतों में बीज का मिश्रण तय करने का सिलसिला शुरू कर देते हैं। बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान के अनकमांड (गैर सिंचित) खेतों में किसान इसी समय में काम शुरू कर देते हैं। ऐसे संकेत मिलते हैं तो किसान एक बारिश का भी नुकसान पसंद नहीं करते। खेत तैयार रहता है, जैसे ही बादलों की उमड़ घुमड़ दिखती है, वैसे ही बीज डाल देते हैं।