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VIDEO में देखें, ये छप्पन भोग पशुओं के लिए है:युवाओं ने जेब खर्च तो दिव्यांग ने 2 माह की पेंशन दी, मिठाइयों की जगह 56 तरह के फल-सब्जियों का चढ़ाया भोग, फिर गांव के हर पशु को खिलाया

बीकानेर21 दिन पहले
पशुओं के लिए तैयार छप्पन भोग।

अब तक आपने मंदिरों में छप्पन भोग देखे होंगे। बीकानेर के नापासर में सजा छप्पन भोग जरा हटकर था। मकसद भी अलग। लॉकडाउन में भूखे पशुओं की परेशानी को देखते हुए छप्पन भोग का इंतजाम किया गया। यहां के युवाओं ने जेब खर्च दिए तो किसी दिव्यांग ने अपनी 2 महीने की पेंशन राशि दे दी। एक-एक कर अच्छी-खासी राशि इकट्‌ठी हुई। इसके बाद पशुओं के लिए छप्पन भोग का इंतजाम हुआ। इस छप्पन भोग में मिठाइयों के लिए कोई जगह नहीं थी। पशुओं को ध्यान में रखकर छप्पन भोग तैयार हुआ। इसमें छप्पन तरह की सब्जियां और फल थे। शनिवार से रविवार तक यह छप्पन भाेग कस्बे में हर पशु तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

इस छप्पन भोग में सभी तरह के फलों को पहले सलीके से काटा गया। फिर सजाया गया।
इस छप्पन भोग में सभी तरह के फलों को पहले सलीके से काटा गया। फिर सजाया गया।

छप्पन भोग में हरी सब्जियां, फल, गुड़, खल, चूरी को मिलाया गया। तरबूज, केले, पपीते, मतीरा, चीकू, सेव, अनार भी शामिल था। इसके अलावा सब्जी में पालक, टमाटर, भिंडी, ककड़ी, खीरा सहित तरह तरह की सब्जियां मिलाई गईं। इनको बकायदा एक जगह छप्पन भोग की तरह सजाया गया। बाद में पूरे कस्बे में और आसपास के गांवों में पशुओं के बीच वितरित किया गया।

गांव के युवाओं की टीम ने बहुत ही शिद्दत से इन फलों काे प्रसाद के रूप् में तैयार किया।
गांव के युवाओं की टीम ने बहुत ही शिद्दत से इन फलों काे प्रसाद के रूप् में तैयार किया।

लॉकडाउन में यही सेवा

लंबे समय से चल रहे लॉकडाउन के कारण पशुओं को चारा उपलब्ध कराने वाले इन दिनों घरों में हैं। ऐसे में पशुओं को भूखे देख गांव के कुछ युवाओं ने ही छप्पन भोग करने की सोची। पिछले एक महीने से किसी न किसी तरह पशुओं के लिए कुछ न कुछ प्रबंध किया जा रहा है। कभी पानी पिलाकर तो कभी चारा डालकर। इसी बीच पशुओं के लिए छप्पन भोग करने का मन बन गया। इस काम में एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनभर युवाओं ने जोश के साथ काम किया।

एक ऊंट गाड़ी में इसे सजाया, फिर पशुओं तक पहुंचाया।
एक ऊंट गाड़ी में इसे सजाया, फिर पशुओं तक पहुंचाया।

दिव्यांग ने दी दो महीने की पेंशन

इस नेक काम में दिव्यांग जयकिशन ने तो दो महीने की पेंशन भी समर्पित कर दी। उनका मानना है कि इस विकट दौर में न तो पशुओं को चारा मिल रहा है और न पानी। यहां तक कि दुधारु पशुओं के लिए भी चारा मुश्किल है। ऐसे में आवारा घूम रहे पशुओं की भूख मिटानी ही सबसे बड़ा धर्म है।

छप्पन भाेग को एकत्र करने के लिए फावड़े का उपयोग करना पड़ा।
छप्पन भाेग को एकत्र करने के लिए फावड़े का उपयोग करना पड़ा।

टीम में ये रहे शामिल

अजय आसोपा, नवरतन आसोपा, रविकांत आसोपा, दिव्यांग जयकिशन आसोपा, खुशबू आसोपा, जगदीश तंवर, विकास माली,मनोज आसोपा, अनुज आसोपा, सीताराम आसोपा, निरंजन आसोपा,विजय कुमार राठी, शुभम।

पशुओं ने भी बड़े चाव से छप्पन भोग ग्रहण किया।
पशुओं ने भी बड़े चाव से छप्पन भोग ग्रहण किया।
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