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बड़ी परेशानी:होम आइसोलेट मरीजों को 2-2 दिन बाद मिल रही ऑक्सीजन, कमेटी मेंबर्स बोले- मीटिंग में रहते हैं, वाट्सएप नहीं देख पाते

बीकानेर9 दिन पहले
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सिलेंडर नहीं आने तक प्रोनिंग के जरिए
 सुंदरलाल को ऑक्सीजन दिया गया। - Dainik Bhaskar
सिलेंडर नहीं आने तक प्रोनिंग के जरिए सुंदरलाल को ऑक्सीजन दिया गया।

कोरोना के मरीजों के लिए इस वक्त ऑक्सीजन ही संजीवनी है और इसी की कमी है। ऑक्सीजन किसी को मिल नहीं रही तो किसी को आठ-आठ घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। दरअसल, प्रशासन ने ऑक्सीजन की राशनिंग कर दी है। मरीज की डिमांड की जांच के लिए तीन ऐसे अफसरों की कमेटी बना रखी है, जिन्हें वाट्सअप देखने की फुर्सत ही नहीं है।

कोरोना पीड़ित सुंदरलाल पारीक के लिए परिजनों को सिलेंडर अब तक नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि उन्होंने रविवार को ऑक्सीजन की डिमांड भेजी थी। अब तक पूरी नहीं हो पाई है। एक सदस्य ने कहा आपका कोटा खत्म हो गया। दुबारा डिमांड भेजो। परिजनों का आरोप है कि सिलेंडर देने में गड़बड़ी की जा रही है।

इसी प्रकार नरेश कुमार को आठ घंटे बाद ऑक्सीजन सिलेंडर मिला। इन परिस्थितियों से हर मरीज को जूझना पड़ रहा है। पीड़ित लोगों का कहना है कि कमेटी के सदस्य फोन तक नहीं उठाते। एक बार मैसेज भेजने के एक-दो घंटे बाद कांटेक्ट करने पर वापस भेजने को कहते हैं। कमेटी के एक सदस्य को दस फोन किए। शाम को सात बजे उन्होंने फोन अटेंड किया। तब जाकर सिलेंडर मिला।

तीन डॉक्टरों की टीम रोज करती है डिमांड की जांच
ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए जॉइंट डायरेक्टर, हैल्थ डॉ.देवेंद्र चौधरी को वाट्सअप पर डिमांड भेजनी पड़ती है। उनके अंडर में तीन डॉक्टरों की टीम रुक्का देख कर तय करती है कि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत है या नहीं। उसके बाद मैसेज जिला परिषद के सीईओ ओम प्रकाश को भेजा जाता है। वे उसे असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर सुभाष मुटनेजा को फॉरवर्ड करते हैं। ऑक्सीजन प्लांट पर डिमांड भेजने की जिम्मेदारी मुटनेजा की है।

पोस्ट कोविड मरीजों को 50 सिलेंडर रोज घर पर चाहिए
पोस्ट कोविड पेशेंट्स को ऑक्सीजन की डिमांड ज्यादा है। हॉस्पिटल से छुट्‌टी मिलने के बाद भी उन्हें कुछ दिन तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहना पड़ रहा है। होम आइसोलेशन में भी कुछ मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। रोजाना करीब 50 सिलेंडर घरों पर जा रहे हैं। इन्हीं हो ज्यादा परेशानी हो रही है। इसके अलावा प्राइवेट हॉस्पिटल्स को 150 सिलेंडरों की सप्लाई हर दिन हो रही है।

लापरवाही की ये चेन भी टूटे... कोविड पॉजिटिव का पता गलत लिखा, दो दिन बाद दवा और परामर्श मिल सका
कोविड की जांच में लोगों के नाम, पते ही गलत दर्ज किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की इस लापरवाही का खमियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। पुलिस से सेवानिवृत सवाई सिंह और उनकी पत्नी की 30 अप्रैल को रेलवे स्टेशन पर कोरोना की जांच हुई थी। जिसमें उनकी पत्नी पॉजिटिव आ गई। सवाई सिंह जयपुर रोड स्थित अमर कॉलोनी में रहते हैं।

लेकिन जांच टीम ने उनका पता अमरपुरा लिख दिया, जो खाजूवाला ब्लॉक में है। यह सूची एक मई को खाजूवाला ब्लॉक पहुंची। यूपीएचसी की एएनएम ने गांव में खोजबीन की, लेकिन सवाई सिंह की पत्नी के नाम की कोई महिला पॉजिटिव नहीं मिली। ग्राम पंचायत स्तर पर गठित कोर ग्रुप के सदस्यों ने सवाई सिंह के नंबर पर फोन किया तो उन्हें पता गलत होने की जानकारी मिली।

यह सही है कि कई बार वीसी और मीटिंग की व्यस्तता के कारण हम मैसेज समय पर नहीं देख पाते। लेकिन एक-दो घंटे बाद ही मैसेज देखकर फॉरवर्ड कर दिया जाता है। डिमांड पूरी करने में इतना समय लग ही जाता है। क्योंकि डॉक्टरों की टीम जांच करने के बाद पर्ची ओके करती है। इमरजेंसी केस मे ऑक्सीजन सिलेंडर तत्काल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।-ओमप्रकाश, सीईओ, जिला परिषद

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