REET टॉपर सुरभि से जानिए- कैसे करें तैयारी:बोलीं- कई बार तो समझ नहीं आता था कि क्या पढूं,  छठी से आठवीं तक की किताबें खूब पढ़ीं

बीकानेर3 महीने पहले
सुरभि पारीक

बीकानेर की कांता खतूरिया कॉलोनी के पास रहने वाली सुरभि पारीक राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा REET के लेवल 2 में टॉपर बनी हैं। सुरभि ने इस परीक्षा में सर्वाधिक 146 अंक हासिल किए। इस मुकाम को हासिल करने के लिए सिंपल फंडा अपनाया। वो कहती हैं कि छठी से आठवीं तक की विज्ञान की किताबों को खूब पढ़ा। उसमें दिए गए हर सवाल को हल किया। इसके साथ ही पुराने पेपर का अभ्यास हर रोज किया।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में सुरभि ने कहा कि जब हमें छठी से आठवीं तक कक्षा पढ़ाने के लिए ही परीक्षा देनी है तो उसी कक्षा की पुस्तकों पर फोकस करना था। मैंने इन तीनों कक्षाओं के सिलेबस की किताबों को खूब पढ़ा। छोटे से छोटे कांसेप्ट को दूर किया। किताब में दिए गए प्रश्नों को ही हल किया। कुछ सवाल तो किताब से ही हुबहू आ गए। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. पवन कुमार पारीक की बेटी सुरभि का कहना है कि उसने बारहवीं विज्ञान में करने के बाद मेडिकल में जाने की कभी इच्छा नहीं जताई।

कॉम्पिटिशन की तैयारी कैसे करनी चाहिए?

आप कोई भी परीक्षा दे रहे हैं तो उसके लिए सबसे पहले डेडीकेशन जरूरी है। आपको उस परीक्षा के मर्म को समझना चाहिए। जिस विषय को आपने चुन लिया है, उसके बारे में सारी जानकारी आपके पास होनी चाहिए। विषय को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कैसे तैयारी की थी आपने?

मैंने बीएएसी की पढ़ाई के साथ ही रीट की परीक्षा दी थी। सभी तरह के कांसेप्ट दूर करने का प्रयास किया। मैंने कोचिंग की कुछ बुक्स पढ़ने के साथ छठी से आठवीं तक की बुक्स को खूब पढ़ा। कई बार तो समझ नहीं आता था कि क्या क्या पढूं। लेकिन बाद में लगा कि मुझे छोटे कांसेप्ट दूर करने चाहिए। इस परीक्षा का आधार भी ये ही था, जो मैंने समय पर पकड़ लिया।

जीवन में टीचर ही बनना है, या लक्ष्य अलग है?

सुरभि कहती हैं कि अभी मैं बीएएसी कर रही हूं। इसके बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए प्रयास करूंगी। मैं आम लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करना चाहती हूं।

सुरभि पारीक अपनी मां विनीता के साथ।
सुरभि पारीक अपनी मां विनीता के साथ।

टीचर क्यों बनना चाहती हैं?

मैं साइंस स्टूडेंट थी, फिर भी एमबीबीएम नहीं करना चाहती थी बल्कि टीचर ही बनना चाहती थी। स्कूल समय से ही मेरे टीचर मुझे आकर्षित करते थे। वो कुछ भी कहते तो हम बच्चे एकाग्र होकर उसे सुनते। मुझे लगता था कि कभी मैं भी कुछ कहूंगी तो बच्चे मुझे सुनेंगे। अब वो दिन दूर नहीं है जब मैं भी टीचर बन जाऊंगी।

परिवार के बारे में बताएं

मेरे पिता आयुर्वेद चिकित्सक हैं। मां विनीता पारीक गृहिणी हैं। भाई अभी बारहवीं का स्टूडेंट है और बहन सूरतगढ़ थर्मल पावर में इंजीनियर है।

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