पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

उद्यमी बोले- अनलॉक हो व्यापार:लाॅकडाउन में जिले के 40% हाेटल-रेस्टाेरेंट पर लगा लाॅक

बीकानेर9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • बीकानेर में 25 हजार लोगों को रोजगार देर रहा होटल सेक्टर वेंटिलेटर पर

लाॅकडाउन में हर प्रकार का काम बाधित हुआ है। हर वर्ग के राेजगार पर संकट आया हुआ है। कइयाें की नाैकरियां जा चुकी है, किसी की जाने की कगार पर है। इससे आर्थिक संकट आम आदमी की जिंदगी में गहराने लगा है। अब जब फिर लॉकडाउन खुलने की उम्मीद है तो सरकार से रियायत चाहते हैं।

बीकानेर जिले में करीब 20-25 हजार लाेगाें काे राेजगार देने वाला हाेटल व रेस्टाेरेंट उद्याेग भी बदहाल हो चुका है। लाॅकडाउन में सरकार ने केवल टेक हाेम डिलीवरी की छूट दी है। इसका लाभ केवल बड़े रेस्टाेरेंट ही उठा सके। छाेटे रेस्टाेरेंट व हाेटल ताे पूरी तरह से बर्बादी के कगार पर पहुंच गए। स्टाफ काे सैलेरी देने, किराया देने, बिजली-पानी के बिल भरने जैसे भारी-भरकम खर्च हर काेई वहन नहीं कर पाया।

इसी का परिणाम रहा कि बीकानेर जिले में 40 प्रतिशत हाेटल-रेस्टाेरेंट पूरी तरह से लाॅक हाे गए। हाेटल-रेस्टाेरेंट में काम करने वाली सर्वाधिक लेबर अन्य राज्याें से आती है। उनमें से अधिकांश जा चुकी है। कारण, हाेटल व रेस्टाेरेंट के मालिक उनकी भारी-भरकम सैलरी का बाेझ बंद दुकान से उठा नहीं पाए।

500 हाेटल-रेस्टाेरेंट थे, 200 बंद हुए
कांफीट्रेडर्स आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश सचिव व हाेटल व्यवसायी रामचंद्र पुराेहित बताते हैं कि बीकानेर शहर सहित आस-पास के हाइवाें पर मिलाकर करीब 500 से अधिक हाेटल-रेस्टाेरेंट काेराेना महामारी के दाैर से पहले अच्छे से चल रहे थे। इनमें करीब 20-25 हजार लाेगाें काे प्रत्यक्ष व 50 हजार से अधिक लाेगाें काे प्रत्यक्ष रूप से राेजगार मिलता था।

एक चेन सिस्टम था, जाे लाॅकडाउन व महामारी के कारण लगी बंदिशाें ने ताेड़ दिया है। अब हजाराें लाेगाें का राेजगार छिन गया है। 500 में से 40 प्रतिशत हाेटल-रेस्टाेरेंट पर ताला लग चुका है यानी 200 के करीब। अब जाे बचे हुए हैं, उनके लिए भी इन्हें वापस खाेलना एक बड़ी चुनाैती हाेगी, कारण लेबर अपने राज्याें में जा चुकी है। हर हाेटल-रेस्टाेरेंट चालक के लिए लेबर काे इतने महीनाें तक बगैर काम के वेतन देना संभव नहीं था।

प्रतिदिन 20 कराेड़ रुपए का हाेता था व्यापार: कैट के प्रदेश सचिव बताते हैं कि बीकानेर में 500 हाेटल रेस्टाेरेंट प्रतिदिन 20 कराेड़ रुपए का व्यापार करते थे। वे इसके पीछे का तर्क भी देते हैं। उनका कहना है कि छाेटे से छाेटे रेस्टाेरेंट जिसे ढाबा भी कह दे ताे उसका गला 10 हजार रुपए प्रतिदिन का कम से कम बैठता था।

इसी तरह बड़े हाेटल व रेस्टाेरेंट एक लाख रुपए तक का गला उठाते थे। कुछ 20 हजार ताे कुछ 30, 40 हजार रुपए का व्यापार कर ही लेते थे। बड़े हाेटल व रेस्टाेरेंट वाले 60-80 हजार रुपए तक सेल करते थे। इनकी औसत निकाली जाए ताे 40 हजार रुपए प्रत्येक दुकान का औसत आता है। इस लिहाज से 20 कराेड़ रुपए का व्यापार आसानी से हाेता था। अब यह संख्या लाखाें में सिमट गई है।

खबरें और भी हैं...