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रेमडेसिविर घोटाला:चार स्टॉकिस्ट की जांच में अनियमितताएं, दो के रिकार्ड में 48 इंजेक्शन गायब, लाइसेंस निरस्त होंगे

बीकानेरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

रेमडेसिविर की कालाबाजारी को लेकर मामला अभी थमा नहीं है। पुलिस के बाद ड्रग कंट्रोलर ने भी इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है। रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले शहर के चार स्टॉकिस्टों की जांच की गई हैं। उनके रिकार्ड में अनियमितताएं मिली हैं।

ड्रग इंस्पेक्टर चद्रंकांत शर्मा की रिपोर्ट पर सहायक ड्रग कंट्रोलर सुभाष मुटनेजा ने तंवर मेडिकोज, जिंदल मेडिकोज, गौरव एजेंसी और राजेंद्र जनरल स्टोर को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनके लाइसेंस सस्पेंड या निरस्त करने की कार्यवाही की जाएगी। दो अन्य स्टॉकिस्ट मित्तल ड्रग एजेंसी और मित्तल फार्मा बंद होने के कारण उनका निरीक्षण नहीं हो पाया।

गौरतलब है कि पिछले महीने सदर थाना पुलिस ने चार रेमडेसिविर इंजेक्शन जब्त कर कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उसके बाद एसओजी ने शहर के छह स्टॉकिस्टों पर छापे मारकर 510 रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पकड़ी थी तथा दो स्टॉकिस्ट के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इन सभी को जेल भेज दिया गया।

वरदान हॉस्पिटल का डॉ. सिद्धार्थ असवाल अब तक फरार है। सदर थाना पुलिस को उसकी तलाश है। इस मामले में रसूखदार डॉक्टर्स और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के नाम आने के बाद पुलिस और एसओजी की जांच ठंडी पड़ी है।

स्टॉकिस्ट की जांच में मिली अनियमितताएं : तंवर मेडिकोज ने 72 रेमडेसिविर खरीद थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान डिटेल 52 इंजेक्शन की ही दी, जबकि वास्तव में 64 इंजेक्शन बेचे गए। यानी इसके यहां 12 इंजेक्शन का रिकार्ड नहीं मिला। इसी प्रकार जिंदल मेडिकोज ने 96 इंजेक्शन की खरीद बताई थी। लेकिन डिटेल 44 की ही दी, जबकि 80 इंजेक्शन बेचे थे। इसके यहां 36 इंजेक्शन का रिकार्ड नहीं मिला।

दोनों स्टॉकिस्ट के यहां जो इंजेक्शन नहीं बिके वे स्टॉक में पाए गए। ड्रग इंस्पेक्टर को निरीक्षण के दौरान दोनों स्टॉकिस्ट के पास कुल 48 इंजेक्शन का रिकार्ड नहीं मिला है। इसी प्रकार गौरव एजेंसी ने 95 और राजेंद्र जनरल स्टोर ने 118 इंजेक्शन खरीदे थे।

इनके यहां बिक्री का रिकार्ड मिला है। लेकिन मांग पत्र को लेकर गड़बड़ी मिली है। इन चारों के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 एवं नियमावली 1945 के तहत लाइसेंस निलंबन या निरस्त की कार्यवाही की जाएगी।

टोटल रिकॉल : इंजेक्शन घोटाले में अब तक आठ गिरफ्तार

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबजारी की जांच के लिए पिछले माह आई एसओजी की टीम ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए 510 इंजेक्शन का घोटाला पकड़ा था। एक अप्रैल से तीन मई तक छह स्टॉकिस्ट की गड़बड़ियां उजागर हुई थी। उन अस्पतालों को भी इंजेक्शन बेचे गए जो कोविड 19 के लिए अधिकृत नहीं थे।

जांच में सामने आया कि स्टॉकिस्ट ने कुल 1400 इंजेक्शन बेचे और स्टॉक में 980 ही बताए। 510 इंजेक्शन अधिक दामों पर बेच दिए। इससे पूर्व पांच मई को सदर थाना पुलिस ने रेमडेसिविर की कालाबजारी के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर चार रेमडेसिविर बरामद किए।

जांच में सामने आया कि आरोपी संदीप नायक, रमेश सिंह, महेंद्र बिश्नोई, अनिल जाट ने एक इंजेक्शन 24 हजार में बेचा। इन पर 30 से ज्यादा इंजेक्शन बेचने का आरोप है। इस मामले में बाद में निजी अस्पताल में काम करने वाले साहिल को भी गिरफ्तार किया गया। बाद में एसओजी ने पीबीएम हॉस्पिटल से भी मरीजों को रेमडेसिविर लगाने की डिटेल ली थी। प्रकरण में अब तक कुल आठ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

रेमडेसिविर की कालाबाजारी के मामले में शहर के चार स्टॉकिस्ट के रिकार्ड में अनियमितताएं मिली हैं। उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। अगले सप्ताह तक लाइसेंस सस्पेंड या निरस्त करने की कार्यवाही की जाएगी। दो स्टॉकिस्ट की दुकानें बंद होने के कारण उनका निरीक्षण बाद में होगा।-सुभाष मुटनेजा, सहायक ड्रग कंट्रोलर

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