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  • Irrigation Is Being Done By 6 Thousand Cusecs Of Water Coming In The Canals, The Department Is Not Issuing Regulation, For Doing So, It Will Have To Be Given Three Times Of Water.

इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र:नहराें में आ रहे 6 हजार क्यूसेक पानी से हाे रही सिंचाई, विभाग जारी नहीं कर रहा रेगुलेशन, ऐसा करने पर देना पड़ेगा तीन बारी पानी

बीकानेर15 दिन पहले
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खरीफ में तीन बारी सिंचाई के लिए इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र के किसानों को 8400 क्यूसेक पानी चाहिए। 21 जून से राजस्थान काे 7000 क्यूसेक के आसपास पानी मिल रहा है। फिर भी सिंचाई के लिए अधिकृत एलान नहीं हुआ है।

सवाल ये है कि पीने के लिए सिर्फ 1000 क्यूसेक पानी चाहिए फिर बाकी 6000 क्यूसेक पानी कहां जा रहा है। जाहिर ताैर पर सिंचाई में उपयाेग हाे रहा है। नहर विभाग भी ये जानता है लेकिन उसे अधिकृत अमलीजामा इसलिए नहीं पहनाया जा रहा है क्याेंकि अगर रेगुलेशन जारी कर दिया ताे आगे की बारी के लिए पानी देना जरूरी हाे जाएगा।

पानी देने की बाध्यता से बचने के लिए नहर अधिकारी लगातार सिंचाई का पानी देने की जिम्मेवारी लेने से बच रहे हैं। बीते दिनों हरीके बैराज से राजस्थान को सिंचाई के लिए 8500 क्यूसेक भी पानी दिया गया। बावजूद इसके िसंचाई के लिए अधिकृत रेगुलेशन फिर भी नहीं दिया जा रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि नहराें में पानी सिंचाई की वरीयता के हिसाब से साढ़े आठ दिन का पानी दिया जा रहा। उसके बाद फिर उस नहर में 25 दिन बाद यानी तीन बारी की वरीयता के हिसाब से पानी अाएगा। किसान उसका फायदा भी ले रहे हैं।

इंफॉर्मेेशन टू इनसाइट

20 जून से सिंचाई जितना पानी फिर भी सिंचाई का रेगुलेशन नहीं

हरिके बैराज में राजस्थान की पानी की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है। यानी जितना पानी आएगा उसका आधा पानी राजस्थान का है। 16 जुलाई तक पाैंग डेम का जलस्तर 1308 फीट है। नियमाें के तहत डेम का जलस्तर 1310 फीट हाेना चाहिए। यानी 1310 के ऊपर पानी हाेने पर ही ज्यादा पानी की निकासी हाे सकती है। पिछले साल डेम का लेवल 1336 फीट था।

इसलिए पिछले साल सिंचाई का पानी दिया गया था। पिछले साल की तुलना में इस साल डेम में 28 फीट पानी कम है। तीन समूह के लिए रेगुलेशन जारी करने के लिए चार बारियाें में पानी देना हाेगा जिसके लिए आठ लाख क्यूसेक पानी चाहिए, जाे फिलहाल नहीं है। समस्या डेम के 1400 फीट तक भरने की भी है। अगर डेम पूरा नहीं भरा ताे सालभर तक पीने और रबी में सिंचाई की समस्या बढ़ेगी।

नुकसान : भले ही नहर विभाग ने रेगुलेशन जारी ना किया हाे पर सिंचाई का पानी मिल रहा है फिर भी किसानाें काे नुकसान हाे रहा है। वाे ये कि स्थायी रेगुलेशन जारी ना हाेने से किसानाें के मन में पानी काे लेकर शंका है कि कभी भी पानी बंद या कम हाे सकता है। इस डर से किसानाें ने पूरी बिजाई नहीं की। यही वजह है कि नहरी क्षेत्र में करीब दो लाख 75 हजार हैक्टेयर में बिजाई हाेनी चाहिए लेकिन इस साल अब तक डेढ़ से पाैने दाे लाख हैक्टेयर के बीच ही बिजाई हुई।

आगे क्या : भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बाेर्ड के नियमाें के तहत अगर पाैंग डेम में जलस्तर लक्ष्य से ज्यादा हुआ ताे सिंचाई के लिए अधिकृत पानी दिया जा सकता है। उसके लिए हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश हाेनी जरूरी है। बीते 24 घंटे से डेम में फिर से एक लाख 20 हजार क्यूसेक पानी की आवक हाेने लगी है। इसी वजह से साेमवार काे डेम का जाे लेवल 1297 फीट था वह मंगलवार काे 1308 फीट हाे गया। अगर ऐसी ही आवक एक सप्ताह हाे जाए ताे किसानाें काे सिंचाई के लिए अधिकृत पानी दिया जा सकता है वरना अघाेषित ही पानी मिलेगा।

डेम का जलस्तर सभी काे पता है। हम इतने कम पानी में रेगुलेशन कैसे जारी करें। 1310 फीट डेम मंगलवार तक भर जाना चाहिए था, जाे नहीं भरा। फिर भी हम नहराें में पानी दे रहे हैं। किसान उसका उपयाेग भी कर रहे हैं। जब बीबीएमबी राजस्थान काे पानी देगा ताे हम रेगुलेशन जारी कर देंगे।
विनाेद मित्तल, मुख्य अभियंता, जल संसाधन हनुमानगढ़

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