महाजन फायरिंग रेंज में युद्धाभ्यास ‘शत्रुनाश’:रूस-यूक्रेन युद्ध से सीख भारतीय सेना ने पहली बार इंटीग्रेटेड फायर पावर दिखाया

बीकानेर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
आर्मी और एयरफोर्स ने संयुक्त रूप से हमला कर 2 घंटे में दुश्मन को तहस-नहस कर दिया। - Dainik Bhaskar
आर्मी और एयरफोर्स ने संयुक्त रूप से हमला कर 2 घंटे में दुश्मन को तहस-नहस कर दिया।

सेना को रात 9 बजे अपने इंटेलीजेंस, सर्विलांस रेकॉनेशन्स (आईएसआर) यंत्रों से खबर मिली कि दुश्मन की एक टुकड़ी फसादावाला टोबा की ओर बढ़ रही है। सूचना मिलते ही लड़ाकू विमान सुखोई 30 ने बम डालकर दुश्मन को चेताया, लेकिन दुश्मन नहीं माना। कुछ ही क्षण में दो एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर रुद्र और उसके बाद अपाचे हेलीकॉप्टर ने ताबड़तोड़ रॉकेट दाग कर टारगेट ध्वस्त कर दिए। अचानक भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैन्ट्री के सैनिकों ने छिपे हुए स्थानों से बाहर निकलकर हमला बोल दिया।

संयुक्त जमीनी दस्तों ने दुश्मन को करारा जवाब दिया। रॉकेट लाॅन्चर दागे गए। रैकी के लिए भेजे दुश्मन के ड्रोन को मार गिराया। दुश्मन तहस-नहस हो गया। अभ्यास में के9 वज्र, शारंग गन, टी 90 टैंक, टी 72 टैंक सहित कई तरह के हथियारों का उपयोग किया गया। तीन दिवसीय युद्धाभ्यास का सोमवार को समापन हो गया।

खास बात ये है कि रूस और युक्रेन युद्ध से सीख भारतीय सेना ने इंटीग्रेटेड अभ्यास शुरू किया है। इसके तहत महाजन फायरिंग में इस साल का पहला युद्धाभ्यास ‘शत्रुनाश’ किया गया। सेना की दक्षिणी-पश्चिमी कमान, चेतक कोर और एयरफोर्स ने इस अभ्यास को संयुक्त रूप से अंजाम दिया। इस अभ्यास में आत्मनिर्भर भारत के तहत निर्मित स्वदेशी हथियारों ने सटीक निशाने साध कर अपना कौशल दिखाया।

रूस-यूक्रेन युद्ध से सीख : सेना ने रूस और युक्रेन युद्ध से सीखा कि बिल्टअप एरिया में टैंक को इन्फैन्ट्री कैरियर व्हीकल्स ( आईसीबी) की लोकल प्रोटेक्शन उतनी ही जरूरी है जितनी ओपन एरिया में आईसीबी को टैंक की जरूरत है। आईसीबीज कवच की तरह है। इसमें मैकेनाइज्ड इन्फैन्ट्री के जवानों को युद्ध भूमि में पहुंचाया जाता है।

काउंटर ड्रोन से लैस होगी सेना : भिंडर
सेना की दक्षिणी-पश्चिमी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल अमरदीप सिंह भिंडर ने कहा है कि रूस और युक्रेन युद्ध का अध्ययन करते हुए इस साल आर्मी और एयरफोर्स का यह पहला इंटीग्रेटेड अभ्यास है। भारतीय सेना भी जल्दी ही काउंटर ड्रोन प्रणाली से लैस होगी। उन्होंने कहा कि युद्धाभ्यास इंटीग्रेशन, आत्मनिर्भर भारत में बन रहे हथियारों की परफॉर्मेंस दिखाने और नई टेक्नोलॉजी पर काम करना करने पर केंद्रित रहा। रशिया और युक्रेन युद्ध को हर देश की सेना समझने की कोशिश कर रही है। हम भी उसका अध्ययन कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी को देखा और सीखा जा रहा है।

इन हथियारों को परखा युद्धाभ्यास में
आकाश मिसाइल:
सरफेस से एयर में वार करने वाली शॉर्ट रेंज भारतीय मिसाइल। सेंट्रल एक्वीजीशन रडार सिस्टम से लैस। 150 किमी में दुश्मन को मारने में सक्षम।
शारंग गन: रशियन गन 130 एमएम -एम 46 को मेक इन इंडिया के तहत भारत में 155 एमएम का बनाया गया। ड्रोन को गिराने में सक्षम।
टी 90 भीष्मा टैंक : रशिया निर्मित यह टैंक दस किलोमीटर तक फायर करने में समक्ष है। ऑपरेशनल रेंज 550 किलोमीटर है।
के9 वज्र: इस स्वदेशी तोप को पूर्वी लद्दाख के फारवर्ड एरिया के बाद पश्चिमी सीमा की रक्षा के लिए भी तैनात किया गया है। 155 एमएम की गन से लैस।
रॉकेट लाॅन्चर : बीएम 21 ग्रेड मल्टी बैरल रॉकेट लाॅन्चर रशिया का बना हुआ है। इसकी 122 एमएम की केलिबर गन ग्राउंड टारगेट 51 किलोमीटर तक कवर करती है। इससे 20 सेकंड में 40 लाॅन्चर फायर किए जा सकते हैं।