एडिटर्स एक्सक्लूसिव:5 साल में 83% घटे मलेरिया रोगी, इसलिए बीकानेर-जोधपुर में साइलेंट स्प्रेडर की खोज

बीकानेर2 महीने पहले
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आनंद ठाकुर, स्थानीय संपादक, बीकानेर। - Dainik Bhaskar
आनंद ठाकुर, स्थानीय संपादक, बीकानेर।
  • अब सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आ रहा मलेरिया

देशभर में मलेरिया के मरीज तेजी से घट रहे हैं। साल 2030 तक मलेरिया फ्री इंडिया की दिशा में यह सुकून देने वाली बात है, लेकिन चिंता भी है। अचानक रोगी कम होने का मतलब साइलेंट स्प्रेडर छिपे होना तो नहीं है? ये स्प्रेडर लो डेंसिटी पैरासाइट इन्फेक्टेड हैं, लेकिन सामान्य जांच में पकड़ नहीं आते। ऐसा हुआ तो यह बीमारी फिर से महामारी बनकर उभर सकती है। इसीलिए आईसीएमआर के संगठन मलेरिया एलिमिनेशन रिसर्च एलायंस बीकानेर और जोधपुर सहित देश के 8 शहरों में साइलेंट स्प्रेडर तलाशने और मच्छरों का घनत्व मापने सहित उनमें छिपे पैरासाइट की तलाश करने पर रिसर्च कर रहा है।

बीकानेर-जोधपुर को इसलिए शामिल किया क्योंकि डेजर्ट मलेरिया सर्वाधिक इन क्षेत्रों में रहा था, लेकिन बीते सालों में नगण्य रोगी आ रहे हैं। अन्य शहरों में गुवाहाटी, चेन्नई, गोवा, रायपुर, गोरखपुर, त्रिपुरा भी हैं। सभी शहरों के लिए अलग-अलग मेडिकल कॉलेज से सीनियर स्तर के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेट सहित टीम का चयन हुआ है।

बीकानेर से मलेरिया पर रिसर्च कर चुके डॉ. संजय कोचर को प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर चुना गया है। इसके साथ ही मेरा इंडिया की अलग-अलग टीमें भी इन शहरों में जाएंगी। इस सारी कवायद के लिए 27 से 30 सितंबर तक चार दिन दिल्ली में हाई पावर कमेटी, साइंटिस्ट, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर्स की मीटिंग है।

मलेरिया एंडमिक जोन में लोगों को बुखार जैसे लक्षण नहीं आते

2015 से 2020 के बीच देश में 5 सालों में 83.6% मलेरिया रोगी कम हुए। राजस्थान में एक साल में 1050 से 55 रोगी (मई तक) रह गए। अब 8 शहरों में अक्टूबर से सर्वे होगा। जिन शहरों का चयन हुआ है, उनमें अधिकांश मलेरिया एंडमिक जोन में हैं। यहां लोगों को बुखार तक नहीं आता, लेकिन ये महामारी फैला सकते हैं।

- आनंद ठाकुर, स्थानीय संपादक, बीकानेर

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