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मानसून:12 दिन देर से पहुंचा मानसून देश में सबसे कम बीकानेर में 40 दिन रहेगा

बीकानेर17 दिन पहले
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  • छितराए बादलों ने उमस से बेहाल शहर की राहत रोकी, 72 घंटे में हो सकती है मूसलाधार बारिश
  • नागौर के रास्ते बीकानेर आए मानसून से दूसरे दिन भी भीगे गांव

दाे जुलाई तक पहुंचने वाला मानसून इस बार 12 दिन की देरी से 14 जुलाई काे बीकानेर पहुंचा। नागौर के रास्ते मानसून ने जिले में एंट्री तो कर ली, लेकिन 48 घंटे बाद भी शहर में बारिश का इंतजार ही होता रहा, जबकि बुधवार को दूसरे दिन भी कई ग्रामीण इलाकों में बारिश हुई। बीकानेर में मानसून पूरी तरह एक्टिव है, लेकिन बादलों के छितराने से शहर में बारिश नहीं हो पा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि 72 घंटे के भीतर जैसे ही बादल इकजाई हुए, मूसलाधार बारिश हो सकती है।

देश में सबसे कम मानसून सीजन बीकानेर में ही 40 से 45 दिन का हाेता है। इस बार 14 जुलाई काे मानसून पहुंचा है और सितंबर के प्रथम सप्ताह में बीकानेर से विदा हाे जाएगा। इस बीच मानसून अगर शिथिल पड़ गया ताे वापस एक्टिव हाेने में भी सात से 10 दिन लगते हैं। इस लिहाज से पूरे मानसून सीजन में रेनी-डे तकरीबन पांच से सात ही हाेते हैं।

उधर, मानसून की एंट्री के बाद शहर काे एक मूसलाधार बारिश का इंतजार है। इससे लगातार एक सप्ताह से हाे रही उमस से लाेगाें काे राहत मिलेगी। शहर में उमस बढ़ने के दो कारण माने जा रहे हैं। एक बादल छाए रहने से और दूसरा आसपास के इलाकाें में बारिश हाेने से। आसपास के इलाकों में बारिश के दौरान धरती से निकली गर्मी वातावरण में पहुंचकर उन इलाकाेें में ज्यादा असर दिखाता है, जहां बारिश कम हुई रहती है।

बुधवार काे श्रीडूंगरगढ़ के करीब एक दर्जन गांवाें में बारिश हुई। ये बारानी इलाका है। इस इलाके में किसानाें काे बारिश का इंतजार भी था। देशनाेक में भी बारिश हाे चुकी है। बीकानेर शहर को छाेड़कर ज्यादातर गांव-कस्बाें में मानसून के एक दाैर की बारिश हाे चुकी है।

इंफॉर्मेेशन टू इनसाइट

मानसून की एंट्री हुई तो बादल इकजाई नहीं थे, छितरे हुए थे...इसलिए पूरे जिले में एकधार बारिश नहीं हुई...जैसे ही हवा की दिशा बदलेगी छितराए बादल इकजाई होकर बीकानेर को भिगा देंगे

शहर में बारिश के आसार कब तक

मानसून पूरी तरह एक्टिव है। 72 घंटे में कभी भी अच्छी बारिश हाे सकती है। दरअसल अभी बीकानेर के ऊपर बादल छितराए हुए हैं। इनके इकजाई होते ही तेज बारिश होगी। इसके लिए ही मौसम विभाग ने 72 घंटे का समय दिया है। मानसून की एंट्री के दौरान बादल इकजाई नहीं थे, इसलिए पूरे जिले में एकधार की बारिश नहीं हो सकी।

कोलायत-पूगल में दोगुनी बारिश हो चुकी: इस साल अभी तक मानसून बारिश के लिहाज से सामान्य है। काेलायत और पूगल में औसत से दाेगुनी बारिश हाे चुकी है। यानी ग्रामीण क्षेत्र की लगभग प्रत्येक तहसील में एक जून से अब तक बारिश सामान्य से बेहतर है। शहर में बारिश कम हुई है, लेकिन मौसम विभाग के मुताबिक बीकानेर में तीन दिन में अच्छी बारिश होगी। कृषि विभाग के मुताबिक फसलों के लिहाज से औसत है।

बीकानेर में मानसून सीजन देश में सबसे कम दिन का क्यों

बीकानेर में अमूमन मानसून जुलाई के दूसरे सप्ताह में आता है। बीकानेर में देश में सबसे देरी से मानसून आता है। मौसम विभाग भी मानता है कि बीकानेर में मानसून पहुंचने का मतलब पूरे प्रदेश में मानसून की एंट्री हो गई। मानसून की विदाई भी सबसे पहले होती है। देश में सबसे पहले सितंबर के पहले सप्ताह से विदा हाेने लगता है। इसलिए बीकानेर में 40 से 45 दिन का ही मानसून सीजन हाेता है। मानसून सीजन देश में सबसे छाेटा हाेने के कारण यहां बारिश भी सबसे कम हाेती है।

मानसून की एंट्री नागाैर की ओर से हुई, इसलिए नागाैर से सटे इलाकों में ज्यादा बारिश हुई है। काेलायत, पूगल, नाेखा में औसत से ज्यादा बारिश हाे चुकी है। बीकानेर शहर में हवा का रुख बदलते ही 3 दिन में बारिश होगी। -राधेश्याम शर्मा, निदेशक माैसम विभाग

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